CEC की नियुक्ति को लेकर SC के निर्देश पर कानून मंत्री का बयान, कहा- 'संविधान में लक्ष्मण रेखा बहुत स्पष्ट'

Published by : Abhishek Anand Updated At : 18 Mar 2023 6:02 PM

विज्ञापन

कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कार्यपालिका और न्यायपालिका समेत विभिन्न संस्थाओं की पथप्रदर्शक संवैधानिक ‘लक्ष्मण रेखा’ की ओर ध्यान दिलाया और हैरानी जताते हुए प्रश्न किया यदि कि न्यायाधीश प्रशासनिक नियुक्तियों का हिस्सा बनते हैं तो न्यायिक कार्यों को कौन करेगा ?

विज्ञापन

कानून मंत्री किरेन रीजीजू ने शनिवार को कार्यपालिका और न्यायपालिका समेत विभिन्न संस्थाओं की पथप्रदर्शक संवैधानिक ‘लक्ष्मण रेखा’ की ओर ध्यान दिलाया और हैरानी जताते हुए प्रश्न किया यदि कि न्यायाधीश प्रशासनिक नियुक्तियों का हिस्सा बनते हैं तो न्यायिक कार्यों को कौन करेगा।

CEC की नियुक्ति प्रक्रिया पर कानून मंत्री का बयान

रीजीजू ने उच्चतम न्यायालय के हाल में दिए गए एक निर्देश के बारे में पूछे गये सवाल के जवाब में यह बात कही. उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह नया कानून बनने तक मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और अन्य चुनाव आयुक्तों का चयन करने के लिए प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता की सदस्यता वाली एक समिति का गठन करे. जिसे लेकर कानून मंत्री ने कहा, ‘‘ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया संविधान में दी गई है. संसद को एक कानून बनाना है जिसके अनुरूप नियुक्ति की जानी है. मैं मानता हूं कि इसके लिए संसद में कोई कानून नहीं है, यहां एक रिक्तता है.’’

संविधान में ‘लक्ष्मण रेखा’ बहुत स्पष्ट है- रीजीजू

रीजीजू ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय के निर्णय की आलोचना नहीं कर रहे हैं और ना ही इसके ‘परिणामों’ के बारे में बात कर रहे हैं. मंत्री का मानना है कि यदि न्यायाधीश प्रशासिक कार्यों में लिप्त होते हैं, तो उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है. रीजीजू ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि आप प्रधान न्यायाधीश या एक न्यायाधीश हैं. आप एक प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं जिस पर सवाल उठेंगे। फिर यह मामला आपकी अदालत में आयेगा। क्या आप एक ऐसे मामले में फैसला कर सकते हैं जिसका आप हिस्सा हैं? यहां न्याय के मूल सिद्धांत से समझौता करना पड़ेगा। इसलिए संविधान में ‘लक्ष्मण रेखा’ बहुत स्पष्ट है।’’

CEC की नियुक्ति को लेकर SC के निर्देश

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को कार्यपालिका के हस्तक्षेप से बचाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक फैसले में उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में व्यवस्था दी है कि उनकी नियुक्तियां प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की सदस्या वाली समिति की सलाह पर राष्ट्रपति द्वारा की जाएगी। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने इस महीने की शुरुआत में सर्वसम्मति से सुनाए गए फैसले में कहा कि यह नियम तब तक कायम रहेगा जब तक कि संसद इस मुद्दे पर कानून नहीं बना देती

विज्ञापन
Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola