Shinde vs Uddhav: उद्धव गुट के पास आगे क्या है रास्ता? स्पीकर के फैसले को संजय राउत ने बताया मैच फिक्सिंग

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 10 Jan 2024 7:29 PM

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सदस्यता मामले पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने साजिश बताया. उन्होंने कहा, स्पीकर नार्वेकर के पास इतिहास लिखने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने बड़ा मौका गंवा दिया. हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. जो जश्न मना रहे वो सभी गद्दार हैं. यह मैच फिक्सिंग है.

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महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने बुधवार को उद्धव ठाकरे गुट को तगड़ा झटका देते हुए एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना माना. शिंदे गुट के 16 विधायकों की अयोग्यता मामले पर फैसला सुनाते हुए नार्वेकर ने कहा, 21 जून, 2022 को जब प्रतिद्वंद्वी समूहों का उदय हुआ तो शिवसेना का एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला धड़ा ही असली शिवसेना था. स्पीकर के फैसले के बाद जहां शिंदे गुट के कार्यकर्ता जश्न मना रहे हैं, वहीं उद्धव ठाकरे में निराशा दिख रही है. अब सवाल उठता है कि विधानसभा अध्यक्ष से झटका लगने के बाद उद्धव गुट के पास आगे क्या रास्ता है.

स्पीकर के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे उद्धव ठाकरे

सदस्यता मामले पर विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर शिवसेना उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने साजिश बताया. उन्होंने कहा, स्पीकर नार्वेकर के पास इतिहास लिखने का मौका मिला था, लेकिन उन्होंने बड़ा मौका गंवा दिया. हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे. जो जश्न मना रहे वो सभी गद्दार हैं. यह मैच फिक्सिंग है. संजय राउत ने कहा, आज का फैसला साजिश है. शिवसेना कभी खत्म नहीं होगी. शिवसेना(UBT) सांसद संजय राउत ने कहा, आज का फैसला कोई न्याय नहीं है ये एक षड्यंत्र है, हम सुप्रीम कोर्ट जरूर जाएंगे. हमारी लड़ाई न्यायालय में जारी रहेगी.

वही होता है जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है

शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुवेर्दी ने कहा, मैं बिल्कुल भी आश्चर्यचकित नहीं हूं. हमने सुना था ‘वही होता है जो मंजूर-ए-खुदा’ होता है’…2014 के बाद एक नई परंपरा शुरू हुई है ‘वही होता है जो मंजूर-ए-नरेंद्र मोदी और अमित शाह होता है’. यही हम महाराष्ट्र में होते हुए देख रहे हैं. जिस चीज को सुप्रीम कोर्ट ने ‘अवैध’ और ‘असंवैधानिक’ कहा था, उसे वैध करने का काम हो रहा है. यह दुर्भाग्यपूर्ण है.

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उद्धव ठाकरे के पास पार्टी बचाने की चुनौती

स्पीकर से झटका मिलने के बाद उद्धव ठाकरे के पास आगे पार्टी को बचाने की नयी चुनौती होगी. चुनाव आयोग एकनाथ शिंदे गुट को पहले की असली शिवसेना मानते हुए चुनाव चिह्न तीर कमान सौंप चुका है. स्पीकर के फैसले के बाद ऐसी आशंका जताई जा रही है कि उद्धव गुट के कुछ विधायक शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं. यही नहीं आगामी चुनाव में उद्धव ठाकरे के सामने खुद को साबित करने की बड़ी चुनौती होगी.

उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंद और उनके नेताओं को हटाने का अधिकार नहीं

शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी धड़े द्वारा एक-दूसरे के विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर अपना फैसला पढ़ते हुए नार्वेकर ने कहा, उद्धव ठाकरे के पास एकनाथ शिंदे और उनके विधायकों को हटाने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग को सौंपा गया 1999 का पार्टी संविधान मुद्दों पर फैसला करने के लिए वैध संविधान था. उन्होंने कहा कि इस संविधान के अनुसार ‘राष्ट्रीय कार्यकारिणी’ सर्वोच्च निकाय है.

शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता: स्पीकर

महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कहा, शिवसेना के 2018 संशोधित संविधान को वैध नहीं माना जा सकता क्योंकि यह भारत के चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में नहीं है. रिकॉर्ड के अनुसार, मैंने वैध संविधान के रूप में शिव सेना के 1999 के संविधान को ध्यान में रखा है.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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