महिला आरक्षण बिल : मोदी सरकार के ‘मास्टरस्ट्रोक’ पर राष्ट्रपति की मुहर, गजट जारी

Edited by Rajneesh Anand
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राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भारत सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गजट अधिसूचना जारी कर दी है. इस बिल के कानून बनते ही लोकसभा और राज्यविधानसभा की 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई है

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला आरक्षण बिल ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति की मंजूरी के साथ ही यह बिल कानून बन गया है. राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद भारत सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर गजट अधिसूचना जारी कर दी है. इस बिल के कानून बनते ही लोकसभा और राज्यविधानसभा की 33 प्रतिशत सीट महिलाओं के लिए आरक्षित हो गई है, यानी कि लोकसभा की 543 सीट में से 181 महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएंगी. महिला आरक्षण बिल मोदी सरकार का मास्टरस्ट्रोक था जिसे राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दे दी है. इसे अब आधिकारिक तौर पर संविधान के (106वां संशोधन) अधिनियम के रूप में जाना जायेगा. इसके प्रावधान के अनुसार, ‘‘आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित केंद्र सरकार की अधिसूचना की तारीख से यह प्रभावी होगा.


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महिलाओं को अब मिलेगा 33 प्रतिशत आरक्षण

इस बिल के प्रावधानों के अनुसार लोकसभा की 543 सीट में से 181 अब महिलाओं के लिए आरक्षित होगी. आरक्षण का प्रावधान 15 वर्षों के लिए लागू रहेगा. उसके बाद इसकी अवधि बढ़ाने पर फैसला संसद को करना होगा. यह संविधान का 128वां संशोधन विधेयक है. ‘नारी शक्ति वंदनअधिनियम’ के तहत एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण की व्यवस्था नहीं होगी, लेकिन जो सीटें एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षित हैं उनमें से 33 प्रतिशत अब महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी. वहीं ओबीसी महिलाओं के लिए बिल में अलग से आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है. उन्हें अनारक्षित सीटों पर ही चुनाव लड़ना होगा.

महिला आरक्षण विधेयक को सभी पार्टियों ने अपना समर्थन दिया है. एकमात्र असदुद्दीन ओवैसी ने बिल को अपना समर्थन नहीं दिया था.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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