गद्दार! दिल्ली में शरद पवार के समर्थन में लगे पोस्टर, 'कटप्पा' को 'बाहुबली' की पीठ में छुरा घोंपते दिखाया

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 06 Jul 2023 10:27 AM

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एनसीपी अपने गठन के 24 साल बाद दो जुलाई को टूट गयी, और पहली बार पार्टी की अलग-अलग बैठकें (दो गुटों की) हुई. शरद पवार ने शिवसेना-भाजपा सरकार में शामिल होने को लेकर अपने भतीजे अजित पवार की आलोचना की. इस बीच दिल्ली में पोस्टर वॉर जारी है.

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एनसीपी प्रमुख शरद पवार दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए आज सुबह अपने आवास सिल्वर ओक से रवाना हुए. इस बीच दिल्ली में एक पोस्टर की चर्चा तेज हो चली है जो राष्ट्रवादी विद्यार्थी कांग्रेस के द्वारा लगायी गयी है. पोस्टर में फिल्म ‘बाहुबली – द बिगिनिंग’ के एक दृश्य को डिज़ाइन किया गया है. पोस्टर में उसके चरित्र ‘कटप्पा’ को ‘अमरेंद्र बाहुबली’ की पीठ में छुरा घोंपते हुए दिखाया गया है. इसके साथ ही इसमें हैशटैग के साथ गद्दार लिखा गया है.

राष्ट्रवादी विद्यार्थी कांग्रेस ने इस पोस्टर में लिखा है कि सारा देश देख रहा है अपने में छिपे गद्दारों को…माफ नहीं करेगी जनता…ऐसे फर्जी मक्कारों को…आपको बता दें कि शरद पवार आज दिल्ली में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए पहुंच रहे हैं. दिल्ली में एनसीपी प्रमुख शरद पवार के आवास के बाहर भी पोस्टर लगाये गये हैं. पोस्टर में लिखा गया है, सच और झूठ की लड़ाई में पूरा देश शरद पवार साहेब के साथ है और भारत देश का इतिहास है कि इसने कभी धोखा देने वाले को माफ नहीं किया.


चुनाव चिह्न छीनना संभव नहीं : शरद पवार

यहां चर्चा कर दें कि महाराष्ट्र में चाचा और भतीजे के बीच जंग जारी है. इस बीच एनसीपी के संस्थापक और अध्यक्ष शरद पवार ने पार्टी कार्यकर्ताओं से चिंता नहीं करने को कहा है. वाई बी चव्हाण केंद्र में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा कि अब नये नेताओं की एक पीढ़ी तैयार करने का वक्त आ चुका है. पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर चाहे कोई भी दावा कर रहा हो, लेकिन इसे छीनना संभव नहीं है.

गाड़ी यहीं रूक गयी: अजित पवार

इस बीच अजित पवार ने उपनगर बांद्रा की भुजबल नॉलेज सिटी में खुद के द्वारा बुलाई गई बैठक में अपने समर्थकों को संबोधित किया. उन्होंने कहा कि मैंने पांच बार उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की है जो एक रिकॉर्ड है, लेकिन गाड़ी यहीं रूक गयी है, आगे नहीं बढ़ती नजर आ रही है. मुझे तहेदिल से ऐसा लगता है कि मुझे राज्य का प्रमुख (मुख्यमंत्री) बनना चाहिए.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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