अगले दो माह के दौरान महिलाओं के जनधन खातों में दो किस्तों में 1,000 रुपये डालेगी सरकार
Author : Rajneesh Anand Published by : Prabhat Khabar Updated At : 09 Apr 2020 5:34 PM
Jan Dhan accounts infuse Rs 1,000 in two installments : प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत महिला खाताधारकों के खातों में अगले दो माह के दौरान 500-500 रुपये की दो समान किस्तों में 1,000 रुपये डाले जाएंगे. महिला जनधन खाताधारकों के खातों में पहली किस्त के रूप में अप्रैल में 500 रुपये डाले गए हैं.
नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत महिला खाताधारकों के खातों में अगले दो माह के दौरान 500-500 रुपये की दो समान किस्तों में 1,000 रुपये डाले जाएंगे. महिला जनधन खाताधारकों के खातों में पहली किस्त के रूप में अप्रैल में 500 रुपये डाले गए हैं. इस बात की जानकारी वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को दी.
मंत्रालय ने लोगों से कहा है कि वे इसको लेकर किसी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं दें. अगले दो महीने में दो किस्तें और डाली जायेंगी. इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के भारतीय स्टेट बैंक ने लाभार्थियों से कहा है कि वे इन अफवाहों पर ध्यान नहीं दें कि यदि वे इस पैसे को नहीं निकालेंगी तो सरकार उसे वापस ले लेगी. इन अफवाहों के चलते बड़ी संख्या में लोग बैंकों में पैसा निकालने के लिए जुट रहे हैं.
एसबीआई में सबसे ज्यादा जनधन खाते हैं. इसके चलते बैंकों की शाखाओं में भीड जमा हो रही है और कोरोना वायरस पर अंकुश के लिए सामाजिक दूरी दिशानिर्देशों का उल्लंघन हो रहा है. वित्तीय सेवा विभाग ने ट्वीट में कहा है कि सरकार ने अप्रैल के लिए महिला जनधन खाताधारकों के खातों में 500-500 रुपये डाल दिए हैं. लाभार्थी इस पैसे को कभी भी निकाल सकते हैं. विभाग ने कहा है कि मई और जून में इन खाताधारकों के खातों में 500- 500 रुपये और डाले जाएंगे.
विभाग ने लाभार्थियों से किसी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने को कहा है. लाभार्थियों से कहा गया है कि वे अपनी सुविधानुसार एटीएम या बैंक से पैसा निकाल सकते हैं. पीएमजेडीवाई के तहत कुल खातों की संख्या 38.08 करोड़ है. इनमें से 20.60 करोड़ महिला खाताधारक हैं. एक अप्रैल तक पीएमजेडीवाई खातों में 1.19 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा की गयी थी.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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