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डॉ एस जयशंकर ने UNSC में चीन को लगाई कड़ी फटकार, कहा- आतंकियों पर नकेल कसने में आड़े आ रही राजनीति

Updated at : 22 Sep 2022 11:11 PM (IST)
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डॉ एस जयशंकर ने UNSC में चीन को लगाई कड़ी फटकार, कहा- आतंकियों पर नकेल कसने में आड़े आ रही राजनीति

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन संकट पर हो रही चर्चा के दौरान डॉ एस जयशंकर ने कहा कि जवाबदेही से बचने के लिए राजनीति की आड़ में छिपना नहीं चाहिए. सबने देखा कि आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने की बात आई तो क्या हुआ?

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संयुक्त राष्ट्र : संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में भारत के विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने चीन को कड़ी फटकार लगाई है. चीन ने अभी हाल ही में 26/11 मुंबई हमलों के साजिशकर्ता साजिद मीर को काली सूची में डालने के प्रस्ताव पर रोक लगा दिया था. विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने चीन का नाम लिये बगैर कहा कि आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने में राजनीति दखल दे रही है. यह दुभार्ग्यपूर्ण है कि यह सब राजनीति की आड़ में हा रहा है.

जवाबदेही से बचने के लिए राजनीति को न बनाएं ढाल

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यूक्रेन संकट पर हो रही चर्चा के दौरान डॉ एस जयशंकर ने कहा कि जवाबदेही से बचने के लिए राजनीति की आड़ में छिपना नहीं चाहिए. सबने देखा कि आतंकियों पर प्रतिबंध लगाने की बात आई तो क्या हुआ? रूस-यूक्रेन युद्ध पर भारत का रुख साफ करते हुए उन्होंने कहा कि टकराव किसी समस्या का समाधान नहीं है. बातचीत से भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है. हालांकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अभी हाल ही में समरकंद में आयोजित हुए शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई मुलाकात के दौरान यह बात कही थी.

भारत का स्थायी सदस्य नहीं होने से विश्व को नुकसान

इसके साथ ही, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता को लेकर भी उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार किया. स्थायी सदस्यता के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत का संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं होना केवल हमारे लिए ही नहीं, बल्कि इस वैश्विक निकाय के लिए भी सही नहीं है तथा इसमें सुधार बहुत पहले ही हो जाना चाहिए था. जयशंकर से पूछा गया था कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने में कितना वक्त लगेगा? उन्होंने कहा कि वह भारत को स्थायी सदस्यता दिलाने के लिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जब मैं कहता हूं कि मैं इस पर काम कर रहा हूं, तो इसका मतलब है कि मैं इसे लेकर गंभीर हूं.

स्थायी सदस्यता की मांग मौलिक

जयशंकर ने कोलंबिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल एंड पब्लिक अफेयर्स के राज सेंटर में कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर तथा नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के साथ बातचीत के दौरान कहा कि स्वाभाविक रूप ये यह बहुत कठिन काम है, क्योंकि अंत में अगर आप कहेंगे कि हमारी वैश्विक व्यवस्था की परिभाषा क्या है? वैश्विक व्यवस्था की परिभाषा को लेकर पांच स्थायी सदस्य बहुत महत्वपूर्ण हैं. इसलिए हम जो मांग कर रहे हैं, वह बहुत ही मौलिक, बहुत गहरे बदलाव से जुड़ा है.

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स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका हैं तथा इन देशों किसी भी प्रस्ताव पर वीटो करने का अधिकार प्राप्त है. समसामयिक वैश्विक वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग बढ़ रही है. इस बीच, विदेश मंत्री ने कहा कि हम मानते हैं कि बदलाव काफी समय से अपेक्षित है, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र 80 साल पहले की स्थितियों के परिणामस्वरूप बनी. उन्होंने कहा कि कुछ वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा, यह दुनिया की सबसे घनी आबादी वाला देश होगा. उन्होंने कहा कि ऐसे देश का अहम वैश्विक परिषदों का हिस्सा न होना जाहिर तौर पर न केवल हमारे लिए बल्कि वैश्विक परिषद के लिए भी अच्छा नहीं है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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