आर्थिक मोर्चे पर चीन को एक और झटका, एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट भारत में शिफ्ट
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 07 Sep 2020 7:45 PM
नयी दिल्ली : लद्दाख (Ladakh) में भारत और चीन (India-China) के बीच सीमा विवाद के बीच कई बड़ी कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन से हटाकर भारत में शिफ्ट कर रही हैं. इससे चीन को बड़ा झटका लगना तय है. भारत के साथ विवाद के बीच चीन कई बड़े देशों के निशाने पर है. भारत को अमेरिका (USA), ब्रिटेन (UK), ऑस्ट्रेलिया (Australia), रूस (Russia) और जापान (Japan) जैसे देशों का साथ मिल रहा है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज बताया कि एप्पल की आठ कंपनियां चीन को छोड़कर भारत में आ चुकी हैं.
नयी दिल्ली : लद्दाख (Ladakh) में भारत और चीन (India-China) के बीच सीमा विवाद के बीच कई बड़ी कंपनियां अपना मैन्युफैक्चरिंग यूनिट चीन से हटाकर भारत में शिफ्ट कर रही हैं. इससे चीन को बड़ा झटका लगना तय है. भारत के साथ विवाद के बीच चीन कई बड़े देशों के निशाने पर है. भारत को अमेरिका (USA), ब्रिटेन (UK), ऑस्ट्रेलिया (Australia), रूस (Russia) और जापान (Japan) जैसे देशों का साथ मिल रहा है. केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज बताया कि एप्पल की आठ कंपनियां चीन को छोड़कर भारत में आ चुकी हैं.
प्रसाद ने कहा कि भारत उत्पादन का हब बन रहा है. भारत बड़े विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है और ग्लोबल मैन्युफैक्चरर इकोसिस्टम यह महसूस कर रहा है कि इसे चीन के अलावा अन्य स्थानों पर भी होना चाहिए. मुझे जानकारी मिली है कि एप्पल अपनी लगभग 8 फैक्ट्रीज को चीन से भारत में स्थानांतरित कर चुका है. उम्मीद है आने वाले समय में और भी बड़ी कंपनियां भारत में अपना इकाई स्थापित करेंगी.
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि जब लद्दाख में चीन कोई भी हिमाकत करता है तो हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हमेशा दृढ़ता से खड़े रहते हैं. इस बार भी ऐसा ही हुआ, चीन को उसी की भाषा में जवाब दिया गया. भारत के इस साहसिक रुख पर अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और अमेरिका ने भी साथ दिया. प्रधानमंत्री हमेशा यही बात कहते हैं कि भारत कभी भी अपनी संप्रभुता से कोई भी समझौता नहीं करेगा.
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भारतीय और चीनी सेनाओं ने तनाव को कम करने के प्रयासों में पूर्वी लद्दाख में रविवार को एक और दौर की वार्ता की. हालांकि, सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए बताया कि दोनों पक्षों द्वारा पिछले हफ्ते बनी टकराव की स्थिति के बाद अतिरिक्त सैनिकों तथा हथियारों को पहुंचाने के कारण स्थिति ‘नाजुक’ बनी हुई है. सूत्रों ने कहा कि चुशूल के पास करीब चार घंटे तक चली ब्रिगेड कमांडर स्तर की बातचीत में कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया.
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अत्यधिक उच्च स्तर की सतर्कता बरत रही है और इलाके में किसी भी स्थिति से निपटने को तैयार है. बता दें कि पूर्वी लद्दाख स्थित पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर स्थित भारतीय इलाके पर कब्जे के लिए चीन द्वारा 29 अगस्त और 30 अगस्त को की गयी असफल कोशिश के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ गया है.
भारत ने पैंगोंग झील के दक्षिण में रणनीतिक रूप से अहम कई ऊंचाई वाले स्थानों पर मुस्तैदी बढ़ा दी है. चीन की घुसपैठ की कोशिश के मद्देनजर भारत ने अतिरिक्त जवानों को भेजा है और संवेदनशील इलाकों में हथियारों की तैनाती की है. चीन द्वारा पैंगोंग झील के दक्षिणी तट पर यथास्थिति बदलने की कोशिश के मद्देनजर भारत ने इलाके में अपनी सैन्य उपस्थिति और बढ़ा दी है.
Posted By: Amlesh Nandan.
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