हिमाचल प्रदेश में बादल फटने से फंसे 50 लोगों को एनडीआरएफ की टीम ने बचाया, बद्दी-पिंजौर को जोड़ने वाला पुल गिरा

Mandi: Rescue officials evacuate residents of Kholanal village during flash floods, in Mandi district, Thursday, Aug. 23, 2023. (PTI Photo)(PTI08_24_2023_000297B)
गुरुवार को शेहनु गोउनी गांव में बादल फटने की घटना हुई थी जिससे कई जगहों पर भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो गईं. अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ का एक दल 15 किलोमीटर पैदल चलकर फंसे हुए लोगों को बचाने पहुंचा
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून बारिश आफत बनकर आयी है. भूस्खलन की वजह से कई इमारतें ढह गईं हैं और जून से अबतक 250 लोगों की मौत हो चुकी है. आज एनडीआरएफ की टीम ने यह जानकारी दी है कि हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में बादल फटने के बाद फंसे हुए 50 से अधिक लोगों को बचा लिया गया है.

ज्ञात हो कि गुरुवार को शेहनु गोउनी गांव में बादल फटने की घटना हुई थी जिससे कई जगहों पर भूस्खलन से सड़कें अवरुद्ध हो गईं. अधिकारियों ने बताया कि एनडीआरएफ का एक दल 15 किलोमीटर पैदल चलकर फंसे हुए लोगों को बचाने पहुंचा और 15 बच्चों समेत सभी लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया. वहीं अत्यधिक बारिश से हिमाचल प्रदेश के बलाद नदी में पानी का प्रवाह इतना बढ़ गया कि बद्दी और पिंजौर को जोड़ने पुल गिर गया. हालांकि इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है.


गौरतलब है कि गुरुवार को कुल्लू में भूस्खलन की वजह से आठ इमारतें ढह गई हैं. हालांकि इस क्षेत्र को पहले ही असुरक्षित घोषित कर दिया गया था इसलिए किसी के मौत की सूचना नहीं है. लेकिन इमारतें जिस तरह से ढहीं, वो चिंता का कारण बन गयी हैं. इस मानसून प्रदेश को 10 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश से भूस्खलन की वजह से 709 सड़कें बंद हैं. कई राष्ट्रीय राज्यमार्ग बाधित हैं और आवागमन में परेशानी हो रही है.

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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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