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केंद्रीय कर्मचारियों को एक और झटका देने की तैयारी सरकार, डीए के बाद यात्रा भत्ता पर भी लग सकती है रोक

Updated at : 27 Apr 2020 8:18 PM (IST)
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केंद्रीय कर्मचारियों को एक और झटका देने की तैयारी सरकार, डीए के बाद यात्रा भत्ता पर भी लग सकती है रोक

महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के डीआर में जुलाई 2021 तक रोक लगाने के बाद सरकार अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक और झटका देने की तैयारी में जुट गयी है.

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नयी दिल्ली : महंगाई भत्ता (DA) और पेंशनभोगियों के डीआर में जुलाई 2021 तक रोक लगाने के बाद सरकार अब केंद्रीय कर्मचारियों को एक और झटका देने की तैयारी में जुट गयी है. कयास लगाये जा रहे हैं कि सरकार अब कर्मचारियों को मिलने वाले यात्रा भत्ता (TA) में भी कटौती कर सकती है. सरकार ने पिछले गुरुवार को ही केंद्र सरकार ने करीब 48 लाख कर्मचारियों का महंगाई भत्ता (DA) फ्रीज किया था. सरकार के इस फैसले का असर 54 लाख सरकारी कर्मचारियों और 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ा.

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, वित्त मंत्रालय के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि अभी इस तरह का कोई फैसला नहीं हुआ है, लेकिन सरकारी कर्मचारियों के यात्रा भत्ता में कटौती करने से सरकार को एक महीने में करीब 3500 करोड़ रुपये की बचत होगी. यदि किसी महीने देश के सभी केंद्रीय कर्मचारियों और अधिकारियों का यात्रा भत्ता रोक दिया जाए, तो सरकार को इस मद में करीब 3500 करोड़ रुपये की बचत होगी.

केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) के अधिकारी का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों का यात्रा भत्ता सरकार का अगला निशाना बन सकता है. कर्मचारियों को घर से कार्यस्थल पर पहुंचने और वहां से घर वापस जाने के लिए यात्रा भत्ता दिया जाता है. लॉकडाउन की वजह से पिछले महीने की 25 तारीख से ही कर्मचारियों का दफ्तर जाना बंद है. ऐसे में जब वह दफ्तर पहुंचे ही नहीं, तो यात्रा भत्ता पर उनका दावा नहीं बनता है. इसलिए यदि अप्रैल महीने में इसका भुगतान नहीं भी किया जाता है, तो कर्मचारियों का कोई विरोध भी नहीं होना चाहिए.

बता दें कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में 4 फीसदी की बढ़ोतरी को रोके जाने से सरकार हर महीने औसतन 1,000 करोड़ रुपये बचा सकती है. सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ाने के लिए 14,595 करोड़ रुपये के अतिरिक्त लागत निर्धारित की थी. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश में जारी लॉकडाउन से देश की अर्थव्यवस्था को काफी गहरा नुकसान पहुंचा है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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