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Explainer : इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान भारत में भी लगा था आपातकाल, जानें इमरजेंसी का पूरा A To Z

Updated at : 14 Jul 2022 1:30 PM (IST)
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Explainer : इंदिरा गांधी के कार्यकाल के दौरान भारत में भी लगा था आपातकाल, जानें इमरजेंसी का पूरा A To Z

1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी को प्रत्याशित जीत मिली. इसके चार साल बाद वर्ष 1975 में 1971 के आम चुनाव में धांधली के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद भारतीय राजनीति में गरमाहट पैदा हो गई. हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी पर छह साल तक कोई भी पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

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नई दिल्ली : श्रीलंका में महंगाई और आर्थिक संकट के बीच लोगों के भारी विरोध तथा उग्र प्रदर्शन के चलते राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे अपने पद से इस्तीफा देने के बाद देश छोड़कर मालदीव भाग गए. उनकी फरारी के बाद गुस्साई जनता ने उग्र प्रदर्शन करना शुरू कर दिया. आलम यह कि लोगों के उग्र प्रदर्शन को देखते हुए आपातकाल लगा दिया गया है. हालांकि, श्रीलंका में पहली दफा आपातकाल नहीं लगा है. इससे पहले भी वहां आपातकाल लगाए जा चुके हैं, लेकिन भारत में एक ही बार 25 जून 1975 को इंदिरा गांधी के कार्यकाल में आपातकाल लगाया गया था. आइए, जानते हैं कि भारत में कब और क्यों लगा था आपातकाल और क्या हैं इसके संवैधानिक प्रावधान.

भारत में कब लगा आपातकाल

आज से ठीक 47 साल पहले 25 जून 1975 को भारत में आपातकाल लागू करने की घोषणा की गई थी. यह आपातकाल पूरे देश में 21 महीने के लिए लगाया था. उस समय कांग्रेस की नेता इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थीं. मीडिया की रिपोर्ट्स और इतिहासकारों द्वारा बताया जाता है कि तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी के कहने पर संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू करने का ऐलान किया था. आजादी के बाद देश में लागू होने वाले आपातकालों में 25 जून 1975 वाले या इंदिरा गांधी वाले आपातकाल को विवादास्पद और अलोकतांत्रिक करार दिया गया. इसे लागू करने की घोषणा के बाद राजनीतिक तौर पर इंदिरा गांधी के घोर विरोधी और आपातकाल की मुखालफत करने वाले जयप्रकाश नारायण या जेपी ने इसे भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का काला अध्याय कहा था.

भारत में आपातकाल लगाने के तात्कालिक कारण क्या हैं?

भारत में वर्ष 1967 से 1971 के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संसद में बहुमत के बूते सत्ता और राजनीति का ध्रुवीकरण कर दिया था. बताया जाता है कि प्रधानमंत्री सचिवालय से ही सत्ता संचालित की जाती थी और उसी सचिवालय के अंदर सरकार की सारी शक्तियों को केंद्रित कर दिया गया था. कहा यह भी जाता है कि उस समय इंदिरा गांधी के प्रमुख सिपहसालार और प्रधान सचिव परमेश्वर नारायण हक्सर या पीएन हक्सर के हाथों में सत्ता की चाबी थी, क्योंकि इंदिरा गांधी पीएन हक्सर पर सबसे अधिक भरोसा करती थीं. इसके साथ ही, इंदिरा गांधी भारत की राजनीति और सत्ता पर वर्चस्व बनाए रखने के लिए कांग्रेस को ही दो भागों में विभाजित कर दिया. वर्ष 1971 के आम चुनाव में इंदिरा गांधी को गरीबी हटाओ के नारे पर प्रत्याशित जीत मिली. इसके चार साल के बाद वर्ष 1975 में 1971 के आम चुनाव में धांधली के आरोप में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले के बाद भारतीय राजनीति में गरमाहट पैदा हो गई. हाईकोर्ट ने इंदिरा गांधी पर छह साल तक कोई भी पद संभालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके बाद 25 जून 1975 को देश में आपातकाल लगा दिया गया.

भारत में आपातकाल का क्या है प्रावधान

आपातकाल के प्रावधान केंद्र सरकार को किसी भी असामान्य स्थिति से निपटने में सक्षम बनाते हैं. संविधान में आपातकालीन प्रावधान भारत सरकार अधिनियम 1935 से लिये गए हैं. हालांकि, आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों का निलंबन वीमर (जर्मन) संविधान से लिया गया है. आपातकालीन प्रावधानों का उद्देश्य देश की संप्रभुता, एकता, अखंडता एवं सुरक्षा, लोकतांत्रिक राजनीतिक व्यवस्था और संविधान की रक्षा करना है.

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भारत में कैसे लगता है आपातकाल

आम तौर पर भारत में तीन प्रकार के आपातकाल लगाए जाते हैं. इनमें गृहयुद्ध, बाहरी हमले और सशस्त्र विद्रोह की स्थिति राष्ट्रपति की ओर से राष्ट्रीय आपातकाल लगाया जाता है. भारत के राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर सकते हैं. ‘सशस्त्र विद्रोह’ शब्द को 44वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया है. इससे पहले इसे ‘आंतरिक अशांति’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था. दूसरा भारत या उसके क्षेत्र में वित्तीय स्थितिरता और साख पर खतरा नजर आने पर भारत के राष्ट्रपति अनुच्छेद 360 के आर्थिक आपातकाल का ऐलान कर सकते हैं. इसके अलावा, मौलिक अधिकारों पर भी आपातकाल लागू होता है. संविधान के अनुच्छेद 358 के अनुसार, जब राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की जाती है, तो अनुच्छेद 19 के तहत सभी छह मौलिक अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं. वहीं, अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान आदेश द्वारा मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए किसी भी अदालत में जाने के अधिकार को निलंबित करने की शक्ति प्राप्त है. हालांकि, राष्ट्रपति शासन और वित्तीय आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकार प्रभावित नहीं होते हैं.

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