Delhi Building Collapse : मलबे के नीचे से आई छात्रों की आवाज, ‘हेल्प... हम फंसे हैं’

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दिल्ली में इमारत गिरी (Photo: PTI)

Delhi Building Collapse : दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार (6 सितंबर) को पांच मंजिला पीजी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई. हादसे के बाद कई छात्र मलबे में फंस गए और अंदर से मदद के लिए फोन करने लगे.

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Delhi Building Collapse : हादसे के बाद 30 से 50 छात्रों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, मलबे के नीचे दबे कुछ छात्र फोन कर मदद मांगने लगे. घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बचाव दल राहत कार्य में जुट गए. बचाव दल मलबे को हटाकर उसमें फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं. अब तक कई लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है.

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मौके पर पहुंचे बीजेपी विधायक अनिल शर्मा ने बताया कि इमारत गिरने के बाद अभी भी कई लोग मलबे के अंदर फंसे हुए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार, उन्होंने बताया कि मलबे में फंसे लोगों के फोन भी आ रहे हैं. बचाव दल लगातार उनके संपर्क में हैं और अंदर फंसे लोगों से बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी लोग सुरक्षित हों, यही दुआ है.

मलबे के अंदर से फोन कॉल आई : प्रोफेसर रजनी अब्बी

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की निदेशक प्रोफेसर रजनी अब्बी ने कहा कि अभी यह साफ नहीं है कि मलबे के अंदर कितने छात्र फंसे हैं. किसी के पास छात्रों की सही संख्या की जानकारी नहीं है. उन्होंने बताया कि सभी कॉलेजों को अपने यहां रहने वाले छात्रों की जानकारी जुटाने को कहा गया है. साथ ही, छात्रों को वापस कॉलेज बुलाया जा रहा है. रजनी अब्बी ने बताया कि मलबे के अंदर से फोन और वीडियो कॉल भी आई है. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी चिंता यही है कि अंदर फंसे सभी छात्र सुरक्षित बाहर निकलें.


दोपहर करीब 1 बजे अचानक पूरी इमारत ढह गई

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि इस पुरानी इमारत में पीजी चलता था. हाल ही में उसके बेसमेंट में काम कराया जा रहा था. बारिश के दौरान बेसमेंट में पानी भर गया और दोपहर करीब 1 बजे अचानक पूरी इमारत ढह गई. प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक, एक कमरे में आमतौर पर कम से कम दो छात्र रहते थे, इसलिए उनका अनुमान है कि इमारत में 30 से 40 छात्र हो सकते थे.


उन्होंने बताया कि इमारत में पीलर भी नहीं थे, क्योंकि इसे सत्य निकेतन कॉलोनी बसने के शुरुआती दौर में बनाया गया था. हालांकि, बेसमेंट में खुदाई हो रही थी या नहीं, यह वह पक्के तौर पर नहीं कह सकते, लेकिन वहां काम चल रहा था, इसकी पुष्टि है.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, स्थानीय जांच में पता चला कि यह करीब 40 से 50 साल पुरानी इमारत थी. इसमें बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं और इसे पीजी के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था. हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था.


हादसे में एक की मौत

50 साल पुरानी इमारत पांच मंजिला थी. इमारत में लड़कों का हॉस्टल चल रहा था. पुलिस के मुताबिक, अब तक छह लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है, जिनमें एक को अस्पताल ले जाने पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि पांच लोगों को जिंदा बचा लिया गया. स्थानीय लोगों का दावा है कि अभी भी करीब 40 से 50 लोग मलबे में फंसे हो सकते हैं. इमारत में बेसमेंट के अलावा पांच मंजिलें थीं.

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