6 हफ्ते बाद 100 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल,जानिए आपके शहर में 1 लीटर पेट्रोल-डीजल की क्या है कीमत

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Today Petrol Diesel Rate : कच्चे तेल की कीमत छह हफ्ते बाद 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. अमेरिका-ईरान तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ी चिंता से तेल बाजार में तेजी आई है. जानिए इसका पेट्रोल-डीजल की कीमत पर क्या असर पड़ सकता है.

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ब्रेंट क्रूड की कीमत छह हफ्ते बाद एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है.पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब कच्चे तेल के बाजार पर भी दिखने लगा है. इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई प्रभावित होने की चिंता ने भी बाजार में हलचल बढ़ा दी है. अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक इसी तरह बढ़ती रही, तो भारत में पेट्रोल-डीजल और महंगाई पर इसका असर पड़ सकता है.

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9 सितंबर को क्यों महंगा हुआ कच्चा तेल?

  • 9 सितंबर को ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई. जुलाई के बाद यह पहली बार है जब कच्चे तेल ने की कीमत 100 डॉलर को पार किया है.
  • तेल की कीमत में इस तेजी की बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव बताया जा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 8 सितंबर को अमेरिकी सेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों को निशाना बनाया.
  • इसके बाद ईरान की तरफ से भी जहाजों और अमेरिकी ठिकानों पर हमले की खबरें आईं. इस पूरे घटनाक्रम से बाजार में यह डर बढ़ गया कि आने वाले दिनों में तेल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है.

क्या आपके शहर में भी बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

  • ऐसा जरूरी नहीं है. 9 सितंबर को कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद दिल्ली समेत बड़े शहरों में 10 सितंबर को पेट्रोल और डीजल के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ.
  • दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर था. वहीं, कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर रहा.
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  • दरअसल, पेट्रोल और डीजल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल के भाव से तय नहीं होती. इसमें रुपये और डॉलर की कीमत, तेल को रिफाइन करने का खर्च, ढुलाई, डीलर का कमीशन और केंद्र व राज्य सरकारों के टैक्स भी शामिल होते हैं.

तेल कंपनियों पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?

  • कच्चा तेल महंगा होने से तेल बेचने वाली कंपनियों पर भी दबाव बढ़ रहा है.
  • रिपोर्ट के मुताबिक, अगर कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहती है, तो कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये और डीजल पर करीब 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान उठाना पड़ रहा है.
  • ऐसे में अगर कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर बनी रहती है, तो पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने का दबाव बढ़ सकता है.

हालांकि, अभी यह कहना मुश्किल है कि पेट्रोल या डीजल की कीमत में प्रति लीटर कितनी बढ़ोतरी होगी.

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