Coronavirus: अंतिम संस्कार कराना है तो सैनिटाइजर ले जाना न भूलें, बोले पुजारी- ये बहुत जरूरी है

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Coronavirus: अंतिम संस्कार कराना है तो सैनिटाइजर ले जाना न भूलें, बोले पुजारी- ये बहुत जरूरी है

Coronavirus: कोविड-19 के संक्रमण के बीच त्रिपुरा के बट्टाला के सबसे बड़े श्मशान गृह में अंतिम संस्कार कराने वाले पुजारी सुबीर चक्रबर्ती एक शव के बगल में बैठे हैं और अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं. वह संस्कार के लिए सभी जरूरी सामान, जूट की डंडियां, घी, तुलसी के पत्ते, सफेद सूती कपड़ा, अगरबत्ती, मिट्टी के बर्तन और अन्य जरूरी सामग्री को देख रहे हैं. जरूरत का सभी सामान देखने के बाद वह एक बर्तन से सैनिटाइजर निकालते हैं, अपने हाथों पर मलते हैं और शोक में डूबे परिवार को बताते हैं कि अब वह तैयार हैं.

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Coronavirus: कोरोना वायरस का खौफ पूरी दुनिया में साफ नजर आ रहा है. लोग साफ-सफाई को पूरा ध्‍यान रख रहे हैं ताकि इस खतरनाक वायरस से दूर रहा जा सके. इसी बीच एक ऐसी खबर आ रह है जिसने सबका ध्‍यान अपनी ओर खींच लिया है. दरअसल, कोविड-19 के संक्रमण के बीच त्रिपुरा के बट्टाला के सबसे बड़े श्मशान गृह में अंतिम संस्कार कराने वाले पुजारी सुबीर चक्रबर्ती एक शव के बगल में बैठे हैं और अंतिम संस्कार की तैयारी कर रहे हैं. वह संस्कार के लिए सभी जरूरी सामान, जूट की डंडियां, घी, तुलसी के पत्ते, सफेद सूती कपड़ा, अगरबत्ती, मिट्टी के बर्तन और अन्य जरूरी सामग्री को देख रहे हैं. जरूरत का सभी सामान देखने के बाद वह एक बर्तन से सैनिटाइजर निकालते हैं, अपने हाथों पर मलते हैं और शोक में डूबे परिवार को बताते हैं कि अब वह तैयार हैं.

कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच सैनिटाइजर 46 वर्षीय पुजारी के जरूरी सामान का हिस्सा हो गया है. चक्रबर्ती ने कहा कि छह से आठ शव श्मशान गृह में रोजाना लाए जाते हैं. इनमें ऐसे भी शव होते हैं जो पोस्टमार्टम के बाद यहां आते हैं. अंतिम संस्कार में सफाई, प्रार्थना करना, शवों की आंखों पर तुलसी की पत्तियां रखना शामिल है. हमें सतर्क रहना होगा इसलिए सैनिटाइजर जरूरी है. हालांकि बाजार में सैनिटाइजर की कमी को देखते हुए चक्रबर्ती अपना सैनिटाइजर खुद बना रहे हैं.

आगे उन्होंने कहा कि स्थानीय बाजार में सैनिटाइजर की अनुपलब्धता को देखते हुए मैंने इसके विकल्प की तलाश शुरू की. इंटरनेट पर देखते हुए मैंने इसे घर में बनाने की विधि सीख ली. बट्टाला महा श्मशान घाट में पुजारी ने बताया कि केमिस्ट के पास से अल्कोहल खरीदा और एक दुकान से एलोवेरा खरीद कर इन दोनों को 70:30 के अनुपात में सैनिटाइजर बनाने के लिए मिला दिया. मैं जहां भी जाता हूं घर में बने हुए इस सैनिटाइजर को साथ ले जाता हूं. चक्रबर्ती के अलावा इस श्मशान घाट में दो पुजारी हैं और दोनों भी इसी सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर रहे हैं.

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने हाल ही में यह स्वीकार किया था कि बाजार में सैनिटाइजर और मास्क की कमी है। उन्होंने लोगों को हमेशा गमछा रखने की सलाह दी थी ताकि मास्क के अभाव में लोग इससे अपना चेहरा ढक सकें. चक्रबर्ती ने कहा कि इस संकट के समय में लोगों से कहा जाना चाहिए कि वह बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार में न आएं. यहां के एक अन्य पुजारी ने बताया कि श्मशान का संचालन करने वाले अगरतला नगर निगम से अपील की गयी है कि वह लोगों से अपील करें कि अंतिम संस्कार में ज्यादा से ज्यादा सिर्फ सात लोग ही हिस्सा लें. हालांकि इस संबंध में नगर निगम का विचार नहीं लिया जा सका. ये अलग बात है कि अपील के बाद भी श्मशान घाट में बड़ी संख्या में लोगों को अपने रिश्तेदारों और मित्रों के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेते हुए देखा गया.

त्रिपुरा राज्य बिजली निगम के अधिकारी गौतम चक्रबर्ती के पिता का निधन मंगलवार को हो गया था. उन्होंने कहा कि हमने अपने संबंधियों को अपने पिता की मौत के बारे में जानकारी दी थी लेकिन उन्हें अंतिम संस्कार में आने से मना किया था लेकिन हमारे आग्रह के बाद भी 13 लोग आये. वहीं देशव्यापी बंद की वजह से अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान की आपूर्ति भी प्रभावित है.

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अमिताभ कुमार

लेखक के बारे में

By अमिताभ कुमार

अमिताभ कुमार प्रभात खबर डिजिटल में Sr. Content writer हैं. पिछले 15 साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं.

अमिताभ 1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है.

प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है. 📩 संपर्क : [email protected]

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