कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने समान नागरिक संहिता पर उठाए सवाल, मौलिक अधिकार की जांच कराने की कही बात

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 May 2022 11:30 AM

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मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है, जो व्यक्ति के जीवन के लिए मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किए जाते हैं और जिनमें राज्य द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता.

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नई दिल्ली : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने सोमवार को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर मौलिक अधिकार का पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं. मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार क्या है, उसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह समान नागरिक संहिता पर प्रभाव डालेगा या नहीं, यह कोर्ट तय करेगा.

संविधान का निदेशात्मक सिद्धांत को पूरा करना जरूरी : खुर्शीद

समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मौलिक अधिकार क्या है, उसकी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह समान नागरिक संहिता पर प्रभाव डालेगा या नहीं, यह कोर्ट तय करेगा. उन्होंने कहा कि चाहे समान नागरिक संहिता हो या कुछ और, इसे भारतीय संविधान की आवश्यकताओं को पूरा करना चाहिए. भारतीय संविधान में निदेशात्मक सिद्धांत कहता है कि समान नागरिक संहिता होना चाहिए, लेकिन निदेशात्मक सिद्धांत ने नहीं कहा कि मौलिक अधिकार मायने नहीं रखते.


मौलिक अधिकार क्या है?

मौलिक अधिकार उन अधिकारों को कहा जाता है, जो व्यक्ति के जीवन के लिए मौलिक होने के कारण संविधान द्वारा नागरिकों को प्रदान किये जाते हैं और जिनमें राज्य द्वारा हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता. ये ऐसे अधिकार हैं, जो व्यक्ति के व्यक्तित्व के पूर्ण विकास के लिए आवश्यक हैं और जिनके बिना मनुष्य अपना पूर्ण विकास नहीं कर सकता. इन अधिकारों को मौलिक इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इन्हें देश के संविधान में स्थान दिया गया है और संविधान में संशोधन की प्रक्रिया के अतिरिक्त उनमें किसी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता.

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समान नागरिक संहिता क्या है?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में समान नागरिक संहिता की चर्चा की गई है. राज्य के नीति-निर्देशक तत्व से संबंधित इस अनुच्छेद में कहा गया है कि राज्य, भारत के सभी राज्यक्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता प्राप्त कराने का प्रयास करेगा. समान नागरिक संहिता में देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान कानून होता है, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो. समान नागरिक संहिता में शादी, तलाक तथा जमीन-जायदाद के बंटवारे आदि में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होता है. अभी देश में जो स्थिति है, उसमें सभी धर्मों के लिए अलग-अलग नियम हैं. संपत्ति, विवाह और तलाक के नियम हिंदुओं, मुस्लिमों और ईसाइयों के लिए अलग-अलग हैं.

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