जलवायु संकट से बच्चों पर बढ़ता खतरा, बाढ़ और गर्मी के बीच दुनिया के सामने नई चुनौती

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बाढ़ से बच्चों को खतरा (साकेंतिक तस्वीर)

जलवायु संकट केवल मौसम तक सीमित नहीं है, यह बच्चों के भविष्य पर भी भारी पड़ रहा है. नेपाल की बाढ़ और अत्यधिक गर्मी ने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण को गंभीर रूप से प्रभावित किया है. जानिए यह वैश्विक संकट कैसे बच्चों को विस्थापित कर रहा है और उन पर क्या असर डाल रहा है.

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जलवायु संकट का असर सिर्फ मौसम और पर्यावरण तक सीमित नहीं है. बाढ़, अत्यधिक गर्मी, सूखा और तूफान बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, पोषण को भी प्रभावित कर रहे हैं. नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ इसका ताजा उदाहरण है, जहां हजारों बच्चों को तत्काल सहायता की जरूरत है. UNICEF के मुताबिक, नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं.

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जरूरी सेवाओं से वंचित कई लोग

नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में बाढ़ ने घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं और संचार नेटवर्क को भी नुकसान पहुंचाया है. UNICEF के अनुसार, कई समुदाय जरूरी सेवाओं से कट गए हैं. ऐसी स्थिति में बच्चों के लिए इलाज, साफ पानी, पौष्टिक भोजन और सुरक्षित आश्रय तक पहुंच सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है.

पढ़ाई पर सीधा असर

आपदा के बाद बच्चों की शिक्षा सबसे पहले प्रभावित होने वाली सेवाओं में शामिल है. नेपाल में बाढ़ ने 18 स्कूलों को पूरी तरह नष्ट और 20 अन्य को क्षतिग्रस्त किया है. इसका असर सिर्फ कुछ दिनों की पढ़ाई छूटने तक सीमित नहीं रहता. लंबे समय तक विस्थापन होने पर बच्चों के स्कूल छोड़ने और पढ़ाई में पिछड़ने का खतरा बढ़ जाता है.

यह समस्या सिर्फ नेपाल की नहीं है. UNICEF के अनुसार, 2024 में 85 देशों में कम से कम 24.2 करोड़ बच्चों की स्कूली पढ़ाई मौसम की घटनाओं से बाधित हुई.

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विस्थापन बच्चों के लिए ज्यादा बड़ा संकट

बाढ़ आने पर परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ता है, लेकिन बच्चों के लिए विस्थापन का मतलब घर और स्कूल छूटने के साथ-साथ सुरक्षा, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का संकट भी हो सकता है. UNICEF के मुताबिक, 2016 से 2021 के बीच मौसम संबंधी आपदाओं के कारण 43.1 करोड़ बच्चों के विस्थापन दर्ज किए गए है. इनमें करीब 95% विस्थापन बाढ़ और तूफानों से जुड़े थे.

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गर्मी भी बढ़ा रही जोखिम

जलवायु संकट का दूसरा बड़ा खतरा अत्यधिक गर्मी है. UNICEF की 2026 रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के एक अरब से ज्यादा बच्चे कम से कम तीन जलवायु खतरों के संपर्क में हैं. अत्यधिक गर्मी बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है, जो शरीर का तापमान नियंत्रित करने, बच्चों में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसे स्वास्थ्य खतरा को बढ़ाती है.

यही वजह है कि आपदा राहत की योजना में बच्चों को सिर्फ “परिवार के सदस्य” मानकर सामान्य राहत देना पर्याप्त नहीं है. सुरक्षित स्कूल, बच्चों के लिए अलग स्वास्थ्य और पोषण सेवाएं, साफ पानी, सुरक्षित आश्रय, मानसिक और भावनात्मक सहायता और परिवार से बिछड़े बच्चों की पहचान जैसी व्यवस्थाएं राहत अभियान का अलग हिस्सा होनी चाहिए.


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