BRICS Delhi Declaration: UNSC में भारत की बड़ी भूमिका के पक्ष में चीन-रूस, फिर दोहराया समर्थन

Updated:
विज्ञापन

ब्रिक्स समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, फोटो- एएनआई

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

BRICS Delhi Declaration: BRICS के दिल्ली घोषणापत्र में भारत के लिए एक अहम संदेश सामने आया है. चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र और UNSC में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन दोहराया है. साथ ही ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सुधारों के जरिए ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर जोर दिया.

विज्ञापन

BRICS Delhi Declaration: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान अपनाए गए दिल्ली घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में बड़े सुधारों की जरूरत पर जोर दिया गया है. सबसे अहम बात यह रही कि चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका की आकांक्षा का समर्थन दोहराया. घोषणापत्र में कहा गया कि वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़नी चाहिए और ग्लोबल साउथ की आवाज को ज्यादा मजबूत बनाया जाना चाहिए.

विज्ञापन

UNSC में भारत की बड़ी भूमिका के समर्थन में चीन और रूस

ब्रिक्स ने साफ किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जरूरी है, ताकि यह ज्यादा लोकतांत्रिक, प्रतिनिधित्व वाला, प्रभावी और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के मुताबिक बन सके. घोषणापत्र में ब्रिक्स देशों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार से ग्लोबल साउथ की आवाज और मजबूत होगी. समूह ने विकासशील देशों को वैश्विक फैसलों में ज्यादा भागीदारी देने की मांग की.

खास तौर पर अफ्रीका, एशिया, लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के देशों को वैश्विक संस्थाओं में ज्यादा और सार्थक प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई है. ब्रिक्स घोषणापत्र में एक ऐसी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की वकालत की गई, जो ज्यादा न्यायपूर्ण, समान, प्रभावी, प्रतिनिधित्व वाली और जवाबदेह हो. ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने पर भी जोर दिया.

हम एक अधिक न्यायपूर्ण, समान, चुस्त, प्रभावी, कुशल, उत्तरदायी, प्रतिनिधि, वैध, लोकतांत्रिक और जवाबदेह अंतरराष्ट्रीय और बहुपक्षीय प्रणाली को बढ़ावा देकर वैश्विक शासन में सुधार और उसे बेहतर बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हैं- ब्रिक्स घोषणापत्र

वरिष्ठ पदों पर विकासशील देशों की भागीदारी बढ़े

ब्रिक्स ने संयुक्त राष्ट्र सचिवालय और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भी विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की मांग की. घोषणापत्र के मुताबिक वरिष्ठ और फैसले लेने वाले पदों पर किसी एक देश या कुछ देशों के नागरिकों का दबदबा नहीं होना चाहिए. इन पदों पर चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और सभी को साथ लेकर चलने वाली होनी चाहिए.

महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की भी मांग

घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के नेतृत्व और बड़े पदों पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया गया. ब्रिक्स ने कहा कि अब तक संयुक्त राष्ट्र महासचिव के पद पर कोई महिला नहीं चुनी गई है. समूह ने खास तौर पर उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं से आने वाली महिलाओं को ज्यादा अवसर देने की बात कही.

अफ्रीकी देशों की मांग को भी मिला समर्थन

UNSC सुधारों के मुद्दे पर ब्रिक्स ने अफ्रीकी देशों की लंबे समय से चली आ रही मांगों को भी स्वीकार किया. घोषणापत्र में एजुलविनी सहमति और सिरते घोषणापत्र में दर्ज अफ्रीकी देशों की आकांक्षाओं का जिक्र किया गया है. इसका मकसद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफ्रीका समेत विकासशील क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व बढ़ाना है.

IMF और वर्ल्ड बैंक में भी सुधार चाहता है ब्रिक्स

दिल्ली घोषणापत्र में केवल संयुक्त राष्ट्र ही नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संस्थाओं में भी सुधार की मांग की गई. ब्रिक्स ने कहा कि IMF और World Bank जैसे ब्रेटन वुड्स संस्थानों की व्यवस्था में भी उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती ताकत दिखाई देनी चाहिए. समूह ने इन संस्थानों के नेतृत्व में विकासशील देशों की ज्यादा भागीदारी और क्षेत्रीय विविधता बढ़ाने पर जोर दिया.

WTO सुधार और विवाद निपटान व्यवस्था बहाल करने की मांग

ब्रिक्स ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में भी सुधार का समर्थन किया. समूह ने ऐसी वैश्विक व्यापार व्यवस्था की मांग की जो खुली, निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों पर आधारित हो. घोषणापत्र में WTO की दो-स्तरीय विवाद निपटान व्यवस्था को जल्द पूरी तरह बहाल करने और नए अपीलीय निकाय सदस्यों की नियुक्ति की मांग की गई.

एकतरफा टैरिफ और प्रतिबंधों पर जताई चिंता

ब्रिक्स देशों ने ऐसे एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ कदमों पर चिंता जताई, जो व्यापार को प्रभावित करते हैं और WTO के नियमों के खिलाफ हैं. समूह ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत लगाए जाने वाले प्रतिबंधों का भी विरोध किया. घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी के बिना लगाए गए एकतरफा दंडात्मक उपायों को खत्म करने की मांग की गई.

वैश्विक व्यवस्था में बड़ी भूमिका चाहता है ग्लोबल साउथ

दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य संदेश यह है कि बदलती दुनिया में विकासशील देशों को केवल वैश्विक फैसलों का पालन करने वाला नहीं, बल्कि उन्हें बनाने वाला भी होना चाहिए. ब्रिक्स ने कहा कि ग्लोबल साउथ की चिंताओं और प्राथमिकताओं को वैश्विक मंच पर मजबूत आवाज मिलनी चाहिए. इसके साथ ही अधिक न्यायपूर्ण, समावेशी और स्थिर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था तैयार करने की जरूरत है. (एजेंसी इनपुट)

Also Read: BRICS Summit 2026: पावर पिरामिड से पार्टनरशिप के प्लेटफॉर्म तक, PM मोदी ने रखा 20 साल का रोडमैप

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola