अभिजीत भट्टाचार्य का इंस्टा पोस्ट: 1947-1977 के शिक्षा मंत्रियों की सूची शेयर कर लिखा- '1947 से शुरू हुआ जिहाद'

अभिजीत भट्टाचार्या
गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने इंस्टाग्राम पर 1947 से 1977 तक भारत के शिक्षा मंत्रियों की एक सूची शेयर की. गायक ने पोस्ट में लिखा कि "1947 से जिहाद की शुरुआत हुई." पोस्ट में बाबर, हुमायूं और अकबर को महान बताए जाने और भारतीय शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं.
Abhijeet Bhattacharya Instagram Post : बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर किया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है. पोस्ट में 1947 से 1977 तक भारत के शिक्षा मंत्रियों की तस्वीरों के साथ उनकी कार्यकाल अवधि दिखाई गई है. इसके साथ उन्होंने कैप्शन में लिखा, "Jih#d began from 1947... #vandematram #jayshreeram #harharmahadev."
पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि "बाबर, हुमायूं और अकबर को महान क्यों बताया गया?" साथ ही दावा किया गया है कि भारतीय इतिहास और शिक्षा व्यवस्था में कई तथ्यों को जानबूझकर छिपाया गया. पोस्ट में लोगों से "जागो, सोचो और सच्चाई को पहचानो" जैसी अपील भी की गई है.
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पोस्ट में 1947 से 1977 तक किन-किन शिक्षा मंत्रियों का जिक्र?
अभिजीत भट्टाचार्य द्वारा शेयर की गई तस्वीर में 1947 से 1977 तक भारत के शिक्षा मंत्रियों की यह सूची दी गई है:
- मौलाना अबुल कलाम आजाद – 1947 से 1952
- हुमायूं कबीर – 1952 से 1958
- मो. करीम छागला – 1958 से 1962
- फखरुद्दीन अली अहमद – 1962 से 1968
- नूरुल हसन – 1968 से 1969
- मो. करीम छागला – 1969 से 1971
- फखरुद्दीन अली अहमद – 1971 से 1972
- नूरुल हसन – 1972 से 1974
- सैयद नसीरुद्दीन – 1974 से 1975
- प्रो. सैयद नूरुल हसन – 1975 से 1977
हालांकि, यह ध्यान देने वाली बात है कि पोस्ट में दी गई सूची और कार्यकाल को लेकर अलग-अलग ऐतिहासिक स्रोतों में अंतर देखने को मिलता है. किसी भी दावे की पुष्टि आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड या विश्वसनीय ऐतिहासिक दस्तावेजों से की जानी चाहिए. हम अगर शिक्षा मंत्रियों के कार्यकाल की सूची विकिपीडिया पर देखेंगे तो रिकॉर्ड काफी अलग नजर आएगा.
पोस्ट में क्या-क्या दावे किए गए?
पोस्ट में लिखा गया है कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था के जरिए इतिहास को एक खास नजरिए से पढ़ाया गया. इसमें दावा किया गया है कि बाबर, हुमायूं और अकबर को महान बताया गया, जबकि भारतीय परंपरा और इतिहास से जुड़े कई पहलुओं को नजरअंदाज किया गया. पोस्ट में "पाठ्यपुस्तकों में शिक्षा का राजनीतिकरण", "इतिहास छिपाने" और "नई पीढ़ी को उनकी जड़ों से दूर करने" जैसे आरोप भी लगाए गए हैं.
हालांकि, ये सभी दावे पोस्ट में किए गए आरोप हैं. इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और इन पर अलग-अलग इतिहासकारों और विशेषज्ञों की राय भी अलग-अलग रही है.
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
अभिजीत भट्टाचार्य का यह पोस्ट काफी चर्चा में है. फिलहाल अभिजीत भट्टाचार्य की ओर से इस पोस्ट को लेकर कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है.
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लेखक के बारे में
By आलोक पाठक
आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।
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