पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी मुद्दे पर कांग्रेस ने की संसदीय समिति से जांच कराने की मांग

Published at :26 Feb 2015 1:59 PM (IST)
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पेट्रोलियम मंत्रालय में जासूसी मुद्दे पर कांग्रेस ने की संसदीय समिति से जांच कराने की मांग

नयी दिल्ली : पेट्रोलियम सहित विभिन्न मंत्रालयों से गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और सूचनाएं लीक किए जाने के मुद्दे को आज राज्यसभा में उठाते हुए कांग्रेस ने संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की और एक संसदीय समिति गठित कर एक माह के भीतर इस पूरे मामले की जांच कराने का सुझाव दिया. उच्च सदन […]

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नयी दिल्ली : पेट्रोलियम सहित विभिन्न मंत्रालयों से गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और सूचनाएं लीक किए जाने के मुद्दे को आज राज्यसभा में उठाते हुए कांग्रेस ने संबंधित मंत्रियों के इस्तीफे की मांग की और एक संसदीय समिति गठित कर एक माह के भीतर इस पूरे मामले की जांच कराने का सुझाव दिया.

उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान कांग्रेस के प्रमोद तिवारी ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि हाल ही में पेट्रोलियम, कंपनी कार्य, पर्यावरण तथा रक्षा मंत्रालय से गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और सूचनाएं लीक किए जाने का मामला सामने आया. यह बेहद गंभीर मामला है.

तिवारी ने कहा कि जब पूरे देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे रक्षा मंत्रालय में भी गोपनीय दस्तावेजों की चोरी हो तो सुरक्षा को ले कर संदेह पैदा होता है. उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार की नीतियों का मसौदा पूंजीपति बनाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि यह सरकार पूंजीपतियों ने ही बनाई है और यह पूंजीपतियों के लिए ही काम कर रही है.

उन्होंने कहा कि इस मामले में एक संसदीय समिति गठित कर उससे एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट देने को कहा जाना चाहिए. तिवारी ने कहा कि जो मंत्री अपने विभागों को ढंग से नहीं चला पा रहे हैं और जिनके मंत्रलयों में यह सब कुछ हो रहा है, उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिए.

भाजपा के विजय गोयल ने कहा कि पता नहीं, पेट्रोलियम मंत्रालय में गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और जासूसी का सिलसिला कब से चल रहा था. उन्होंने कहा कि राजग सरकार आने के बाद इस मामले में कार्रवाई हुई है. गोयल ने आरोप लगाया कि संप्रग के दस साल के शासनकाल में यह सब काम चल रहा था.

उन्होंने कहा कि इस सरकार ने मंत्रालयों के ईमानदार अधिकारियों से सलाह मशविरा कर जब कार्रवाई की तो यह सब बातें सामने आईं. उन्होंने कहा कि यदि कोई जांच समिति बनी तो संप्रग सरकार के शासनकाल में हुए कारनामे भी सामने आएंगे. गौरतलब है कि पेट्रोलियम सहित विभिन्न मंत्रालयों से गोपनीय दस्तावेजों की चोरी और जासूसी के मामले में अभी तक विभिन्न कंपनी समूहों से जुडे और सरकारी कर्मचारियों सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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