Navratri 2022 7th Day Live Updates: मां कालरात्रि की उपासना से सभी प्रकार की सिद्धि होगी प्राप्त
Navratri Maa Kalratri Puja: अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है. माना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने वाले भक्तों को भूत, प्रेत या बुरी शक्ति का भय नहीं सताता. आइए पढ़ते हैं मां कालरात्रि की पूजा विधि और मंत्र के बारे में…
‘दुर्गा सप्तशती’ में कहा गया है-
विद्या: समस्तास्तव देवि भेदा:,
स्त्रिया: समस्ता: सकला जगत्सु।
त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्,
का ते स्तुति: स्तव्यपरा परोक्ति:।।
अर्थात- ‘हे देवी! समस्त संसार की सब विद्याएं तुमसे ही निकली हैं. जगत की समस्त स्त्रियां तुम्हारा ही स्वरूप हैं…’ अतः स्त्री का हर रूप में सम्मान करें.
हर रूप में करें स्त्री का सम्मान
एक लड़क�� के जन्म से लेकर एक स्त्री, एक मां बनने तक के सफर में वह अन्य कई रिश्तों से गुजरती है. इनमें से उसके हरेक रूप से उससे जुड़े हर रिश्ते की कुछ उम्मीदें होती हैं, जिन्हें पूरा करने का वह भरसक प्रयास करती है. इसके बदले में वह बस इतनी ही अपेक्षा रखती है कि उसके अस्तित्व की रक्षा हो. उसे भले ‘देवी’ का दर्जा न दें, किंतु उसके अस्तित्व का सम्मान करें.
कालरात्रि को पेठे की दें बलि
देवी कालरात्रि की पूजा-पाठ के दौरान पेठा का भोग लगाना चाहिए. सप्तमी तिथि को देवी कालरात्रि के लिए पेठे की बलि देने से देवी कालरात्रि अति प्रसन्न होती है. मान्यता है कि इससे बल और विजय की प्राप्ति होती. साथ ही आप अगर किसी कानूनी मामलों में फंसे हुए हैं तो उसमें भी विजय प्राप्त होगा.
इस मंत्र का 108 बार करें जाप
मंत्र
ऊं ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै ऊं कालरात्रि दैव्ये नम: .
ॐ कालरात्र्यै नम:
ॐ फट् शत्रून साघय घातय ॐ
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं दुर्गति नाशिन्यै महामायायै स्वाहा।
सप्तमी नवरात्रि पर कालरात्रि को ऐसे करें खुश
सप्तमी नवरात्रि पर मां को खुश करने के लिए गुड़ या गुड़ से बने व्यंजनों का भोग लगाना शुभ होता है. अगर आपको भी किसी चीज का भय बना रहता है तो आज मां कालरात्रि का ध्यान करके उनके इस मंत्र का जप अवश्य ही करना चाहिए.
मां कालरात्रि का वाहन गधा है
मां दुर्गा के सातवें स्वरूप की अराधना की जाती है. इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है. ये दुष्टों का संहार करती हैं. इनका रूप देखने में अत्यंत भयंकर है लेकिन ये अपने भक्तों को हमेशा शुभ फल प्रदान करती हैं, इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है. मां कालरात्रि का वाहन गधा है और इनकी चार भुजाएं हैं, जिनमें से ऊपर का दाहिना हाथ वरद मुद्रा में और नीचे का हाथ अभयमुद्रा में रहता है. जबकि बायीं ओर के ऊपर वाले हाथ में लोहे का कांटा और निचले हाथ में खड़ग है.
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By Anita Tanvi
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