उत्तर भारत में बढ़ा गॉल ब्लैडर कैंसर का खतरा
Author Prabhat khabar digital desk
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एम्स, दिल्ली द्वारा तैयार एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली समेत उत्तर भारत में गॉल ब्लैडर कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं. इसमें 2012 के आंकड़े के आधार पर बताया गया कि पुरुषों को प्रभावित करनेवाले कैंसरों में इसका स्थान नौवां और महिलाओं के लिए तीसरा स्थान हो गया है. जबकि दिल्ली […]
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एम्स, दिल्ली द्वारा तैयार एक ताजा रिपोर्ट कहती है कि दिल्ली समेत उत्तर भारत में गॉल ब्लैडर कैंसर के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं. इसमें 2012 के आंकड़े के आधार पर बताया गया कि पुरुषों को प्रभावित करनेवाले कैंसरों में इसका स्थान नौवां और महिलाओं के लिए तीसरा स्थान हो गया है.
जबकि दिल्ली में पुरुषों को प्रभावित करने वाले सभी कैंसरों के बीच गॉल ब्लैडर कैंसर (जीबीसी) का स्थान 1998 में 24वां था, वहीं महिलाओं को प्रभावित करने वाले कैंसरों के बीच स्थान पांचवां था. सरकार के आबादी आधारित कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम के तहत दिल्ली में जीबीसी केसों के 25 साल के डेटा का विश्लेषण किया गया है. जीबीसी घातक कैंसरों में से एक है. कई मामले में इसका पता देर से चलता है, जब सर्जरी नहीं की जा सकती है और एक साल के अंदर 95 फीसदी मरीजों की मौत हो जाती है
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