प्यार और रिश्ता दोनों सीरियस, फिर भी शादी अभी नहीं, आखिर क्यों बदल रही है कपल्स की सोच?

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कपल्स की सांकेतिक तस्वीर, PC - AI

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Why Couples Delay Marriage: आज के कई कपल्स शादी से पहले करियर, आर्थिक स्थिति और रिश्ते को लेकर पूरी तरह तैयार होना चाहते हैं. यही वजह है कि वे शादी का फैसला कुछ समय के लिए आगे बढ़ा रहे हैं.

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Why Couples Delay Marriage: "हमारा रिश्ता सीरियस है, शादी भी करनी है, लेकिन अभी नहीं." आज के समय में कई कपल्स की सोच कुछ ऐसी ही है. पार्टनर के साथ कई साल से रिलेशनशिप में हैं, एक-दूसरे के साथ फ्यूचर भी देखते हैं, लेकिन शादी को लेकर जल्दबाजी नहीं करना चाहते. कुछ लोग पहले अपना करियर और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी मजबूत करना चाहते हैं, तो कुछ शादी से पहले यह समझना चाहते हैं कि वे रोजमर्रा की जिंदगी में भी एक-दूसरे के साथ उतने ही कम्फर्टेबल हैं या नहीं. यही वजह है कि आज रिलेशनशिप और मैरिज को कई लोग दो अलग फैसलों की तरह देखने लगे हैं. प्यार और कमिटमेंट अपनी जगह है, जबकि शादी कब करनी है, यह फैसला अब लोग अपनी सिचुएशन और जरूरत के हिसाब से लेना चाहते हैं.

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शादी करनी है, लेकिन पहले खुद को तैयार करना चाहते हैं

पहले सीरियस रिलेशनशिप को शादी की तरफ बढ़ने वाला रिश्ता माना जाता था. अब कई यंग कपल्स के लिए ऐसा जरूरी नहीं है. उनका मानना है कि शादी सिर्फ प्यार के आधार पर नहीं, बल्कि इमोशनल और फाइनेंशियल रेडीनेस के बाद होनी चाहिए. करियर भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. खासकर वे कपल्स जो अपने करियर की शुरुआत में हैं, उनके लिए शादी के बाद आने वाली जिम्मेदारियों के बारे में पहले से सोचना स्वाभाविक है. ऐसे में रिलेशनशिप को खत्म किए बिना शादी को कुछ साल आगे बढ़ाना उन्हें बेहतर ऑप्शन लगता है.

प्यार के साथ अब फ्यूचर और करियर भी दिखता है

रांची की अराध्या अनंत अपने रिलेशनशिप के बारे में कहती हैं कि प्यार हर उम्र और हर स्टेज पर एक जैसा महसूस नहीं होता. पहली बार प्यार होता है तो सामने वाला ही पूरी दुनिया लगता है. उस समय हम रिश्ते को लेकर काफी इममैच्योर होते हैं और हमें लगता है कि यही इंसान हमारे लिए सबकुछ है. लेकिन समय के साथ जब दोबारा प्यार होता है, तो सोच भी बदल चुकी होती है.

अराध्या मानती हैं कि यह जरूरी नहीं कि प्यार सिर्फ एक बार ही हो. पहली मोहब्बत के बाद अगर किसी को दोबारा प्यार होता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि पहला प्यार झूठा था. कई बार दूसरी बार हम रिश्ते को ज्यादा मैच्योर तरीके से समझते हैं. इस बार सिर्फ इमोशंस नहीं, बल्कि फ्यूचर भी नजर आता है. वह कहती हैं कि अब उनकी सोच में यह भी शामिल है कि रिलेशनशिप में दोनों लोग अपने करियर को लेकर आगे बढ़ें. सिर्फ एक पार्टनर अपने प्यार के लिए अपना करियर छोड़ दे या उसका सैक्रिफाइस करे, ऐसा जरूरी नहीं होना चाहिए. दोनों अपनी-अपनी जॉब में सेटल हों, फाइनेंशियली स्ट्रॉन्ग बनें और फिर शादी का फैसला लें. उनके लिए प्यार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं, बल्कि एक-दूसरे के फ्यूचर और करियर को समझते हुए आगे बढ़ने का नाम भी है.

Research भी दिखाती है बदलती सोच

Pew Research Center की प्रकाशित ग्लोबल रिसर्च में 18 देशों के 23,022 एडल्ट्स को शामिल किया गया था. भारत में लोगों ने शादी की आइडियल एज औसतन 22.7 साल बताई. लेकिन सिर्फ 44 प्रतिशत भारतीयों ने कहा कि 30 साल की उम्र तक शादी, पहला बच्चा और अपना घर खरीद लेना आइडियल है. इससे यह संकेत मिलता है कि शादी को जीवन के बाकी बड़े माइलस्टोन के साथ एक तय उम्र तक पूरा करना हर व्यक्ति की सोच नहीं है. रिसर्च में यह भी पाया गया कि ज्यादा एजुकेशन वाले लोग कई देशों में शादी की थोड़ी ज्यादा उम्र को आइडियल मानते हैं.

Live-in भी इसी बदलती सोच का हिस्सा

शादी को थोड़ा आगे रखने की सोच के साथ लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर भी युवाओं के नजरिए में बदलाव आया है. Marriage & Family Review में अप्रैल 2026 में प्रकाशित एक सिस्टेमैटिक रिव्यू में भारत से जुड़ी 2000 से 2024 तक की 34 रिसर्च पब्लिकेशन्स को देखा गया. इसमें रिसर्चर्स ने पाया कि इंडिविजुअल फ्रीडम और अपनी आइडेंटिटी बनाए रखने की इच्छा लिव-इन रिलेशनशिप के सामने आने वाले प्रमुख कारणों में हैं. रिव्यू के मुताबिक कुछ युवा लिव-इन को शादी की जिम्मेदारियों से अलग तरह की पार्टनरशिप के रूप में देखते हैं. हालांकि भारत में इसे लेकर सोशल एक्सेप्टेंस अभी भी हर जगह एक जैसी नहीं है.

इसका मतलब शादी से दूरी नहीं है

शादी को टालना और शादी ही नहीं करना, दोनों अलग बातें हैं. कई कपल्स शादी करना चाहते हैं, लेकिन इसके लिए सही समय का इंतजार करते हैं. वे पहले अपना करियर मजबूत करना, आर्थिक स्थिति बेहतर करना और एक-दूसरे को और अच्छी तरह समझना चाहते हैं. इसके बाद ही शादी का फैसला लेना उन्हें बेहतर लगता है. इसलिए "अभी शादी नहीं करनी" को हमेशा रिश्ते में कमिटमेंट की कमी समझना सही नहीं होगा. कई बार यह फैसला जल्दबाजी से बचने और भविष्य को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होने की कोशिश भी हो सकता है. यानी प्यार और रिश्ते को लेकर गंभीर रहते हुए भी कपल्स शादी के फैसले को अपनी सुविधा और परिस्थितियों के हिसाब से आगे बढ़ा रहे हैं.

आज के रिश्तों में बदल रहा है शादी का मतलब

आज का कपल सिर्फ यह नहीं सोच रहा कि शादी करनी है या नहीं. वह यह भी सोच रहा है कि शादी कब करनी है, किन हालात में करनी है और क्या दोनों इसके लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसलिए रिलेशनशिप में होने के बावजूद शादी को कुछ साल आगे रखना अब कई लोगों के लिए कोई असामान्य बात नहीं है. बदलती लाइफस्टाइल, करियर की प्राथमिकताएं और अपनी पसंद ने शादी के सही समय को लेकर सोच को पहले से ज्यादा व्यक्तिगत बना दिया है.

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