13-14 साल के बच्चों के मन में क्यों आ रही जबरन सेक्स की सोच? साइकोलॉजिस्ट ने बताए चौंकाने वाले कारण
बच्चों में गलत सोच क्यों बढ़ रही है, सांकेतिक फोटो
13-14 साल के बच्चों से जुड़े यौन अपराध कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं. आखिर इतनी कम उम्र में बच्चों की सोच कैसे बदल रही है? इस पर मुंबई के वरिष्ठ साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी ने बच्चों की मानसिकता और इससे जुड़े अहम पहलुओं पर बात की है.
आज के समय में 13-14 साल या इससे भी कम उम्र के बच्चों के यौन अपराधों में शामिल होने की खबरें अक्सर सामने आ रही हैं. ऐसे मामले सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक सोच और परवरिश का भी बड़ा सवाल खड़ा करते हैं. आखिर इतनी छोटी उम्र में बच्चों के मन में जबरन सेक्स जैसी सोच आती कहां से है? क्या इसके पीछे सिर्फ मोबाइल और सोशल मीडिया हैं या परिवार और समाज की भी भूमिका है? इन्हीं सवालों के जवाब जानने के लिए हमने मुंबई के मशहूर साइकोलॉजिस्ट डॉ. हरीश शेट्टी से बात की. उन्होंने बताया कि बच्चों की सोच किन कारणों से बदल रही है और माता-पिता को किन बातों पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.
बच्चों में ऐसी सोच क्यों विकसित हो रही है?
डॉ. हरीश शेट्टी के मुताबिक किसी एक वजह को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. कई फैक्टर्स मिलकर बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करते हैं.
1. कम उम्र में पोर्न और सेक्सुअल कंटेंट का एक्सपोजर
आज मोबाइल और इंटरनेट के कारण बच्चे बहुत छोटी उम्र में ही पोर्न और सेक्सुअल कंटेंट देख रहे हैं. इससे उनके दिमाग में सेक्स को लेकर गलत और अवास्तविक धारणाएं बनने लगती हैं.
2. सेक्स को गलत नहीं समझते
एक्सपर्ट के अनुसार कई बच्चों को यह एहसास ही नहीं होता कि बिना सहमति किसी के साथ शारीरिक संबंध बनाना गंभीर अपराध है. उनके लिए यह व्यवहार धीरे-धीरे सामान्य लगने लगता है.
3. माता-पिता का कम सुपरविजन
पहले की तुलना में बच्चों पर निगरानी कम हुई है. वे ऑनलाइन क्या देख रहे हैं, किससे बात कर रहे हैं और किस तरह का कंटेंट देख रहे हैं, इस पर कई परिवारों में पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता.
4. परिवार में संवाद की कमी
डॉ. शेट्टी कहते हैं कि कई घरों में सेक्स, रिश्तों और शरीर से जुड़े विषयों पर खुलकर बात नहीं होती. ऐसे में बच्चे इंटरनेट या दोस्तों से अधूरी और गलत जानकारी लेते हैं.
5. बच्चों को लगता है कि माता-पिता बचा लेंगे
कुछ बच्चों में यह सोच भी देखने को मिलती है कि अगर कोई परेशानी हुई तो माता-पिता उन्हें बचा लेंगे. इससे उनके अंदर अपने व्यवहार के परिणामों को लेकर गंभीरता कम हो सकती है.
6. सोशल मीडिया और सेंशुअस कंटेंट का असर
लगातार सेंशुअल वीडियो, रील्स और अन्य डिजिटल कंटेंट देखने से बच्चों की सोच और व्यवहार प्रभावित हो सकते हैं, खासकर जब उनकी उम्र समझ विकसित होने की होती है.
एक्सपर्ट ने सुनाया स्कूल का एक मामला (Case Study)
डॉ. हरीश शेट्टी ने बातचीत के दौरान मुंबई के एक स्कूल का उदाहरण साझा किया. उनके अनुसार आठवीं कक्षा की 13 वर्षीय छात्रा के मामले में लड़की के माता-पिता ने लड़के पर रेप का आरोप लगाया था. हालांकि जांच के दौरान सामने आया कि दोनों बच्चों के बीच सहमति से शारीरिक संबंध बने थे.
डॉ. शेट्टी का कहना है कि ऐसे मामलों का उद्देश्य किसी व्यवहार को सही ठहराना नहीं है, बल्कि यह समझना है कि कम उम्र में बच्चे किस तरह बिना पर्याप्त समझ के जोखिम भरे फैसले ले रहे हैं. इसलिए परिवार और स्कूल दोनों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.
बच्चों को कैसे बचाएं?
डॉ. हरीश शेट्टी के अनुसार-
- बच्चों से नियमित और खुलकर बातचीत करें.
- उनकी ऑनलाइन गतिविधियों और सोशल मीडिया एक्सपोजर पर नजर रखें.
- बच्चों को शरीर, सहमति (Consent) और व्यक्तिगत सीमाओं के बारे में उम्र के अनुसार सही जानकारी दें.
- उनके दोस्तों और सामाजिक दायरे को जानें.
- व्यवहार में अचानक बदलाव दिखे तो मनोवैज्ञानिक या काउंसलर की मदद लेने में संकोच न करें.
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By पुष्पांजलि
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