अखबार नहीं पढ़ने वाली जेन Z को कहां से मिलती हैं खबरें? जानें बदलता तरीका
Gen Z की सांकेतिक तस्वीर, PC - AI
Gen Z News Consumption: आज की युवा जेनरेशन अखबारों से दूर, सोशल मीडिया पर खबरें ढूंढती है. यूट्यूब और शॉर्ट वीडियो उनके लिए जानकारी का मुख्य स्रोत बन गए हैं. जानिए इस बदलाव के पीछे की वजहें और इसके प्रभाव.
Gen Z News Consumption: आज की जेनरेशन Z की सुबह शायद अखबार के साथ नहीं, बल्कि फोन की स्क्रीन से शुरू होती है. इंस्टाग्राम खोलते ही कोई बड़ी खबर सामने आ सकती है. यूट्यूब पर उसी घटना की पूरी जानकारी मिल जाती है और कुछ ही मिनट में वीडियो के जरिए किसी मुद्दे को आसान भाषा में समझा जा सकता है.
खबर जानने के इस बदलते तरीके को शोध भी दिखाता है. प्यू रिसर्च सेंटर के 2025 के एक अमेरिकी सर्वे के मुताबिक, 18 से 29 साल की उम्र के 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे सोशल मीडिया पर खबरें बताने वाले लोगों से नियमित रूप से समाचार लेते हैं. वहीं 30 से 49 साल की उम्र के 23 प्रतिशत लोगों ने ऐसा कहा. हालांकि यह आंकड़ा अमेरिका का है, इसलिए इसे सीधे भारत की जेनरेशन Z पर लागू नहीं किया जा सकता. भारत की तस्वीर देखने के लिए रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की 2026 की रिपोर्ट में उसके सर्वे का करीब 58 प्रतिशत आंकड़ा यूट्यूब से खबरें लेने वालों का है. इस सर्वे में मुख्य रूप से अंग्रेजी समझने वाले लोग शामिल थे, इसलिए इसे पूरे भारत की तस्वीर नहीं माना जा सकता.
अब खबर जानने के लिए खबर ढूंढनी नहीं पड़ती

पहले किसी खबर के लिए अखबार पढ़ना, टीवी देखना या समाचार वेबसाइट खोलना जरूरी होता था. सोशल मीडिया ने इस आदत को बदल दिया है.
प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार, 18 से 29 साल के उन लोगों में जो सोशल मीडिया पर खबर बताने वालों से नियमित रूप से समाचार लेते हैं, 77 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें ऐसी खबरें सोशल मीडिया चलाते समय अपने आप दिखाई देती हैं. केवल 23 प्रतिशत लोग ही इन खबरों को खास तौर पर ढूंढते हैं.
इसका मतलब है कि कई बार खबर देखने की शुरुआत किसी तय योजना से नहीं, बल्कि फोन पर सामने आई किसी पोस्ट या वीडियो से होती है.
खबर बताने वाले लोग क्यों पसंद आते हैं
सोशल मीडिया पर खबर बताने वाले लोग किसी घटना को अपने तरीके से समझाते हैं. वे सिर्फ यह नहीं बताते कि क्या हुआ, बल्कि उसके पीछे की वजह और उससे जुड़ी दूसरी जानकारी भी बताते हैं.
प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में खबर बताने वालों से समाचार लेने वाले लोगों में 54 प्रतिशत ने कहा कि इससे उन्हें मौजूदा घटनाओं और जरूरी मुद्दों को समझने में मदद मिलती है. इतने ही लोगों ने बड़ी खबर जल्दी मिलने को इसकी वजह बताया. वहीं 49 प्रतिशत ने इन लोगों की बात को असली और भरोसे के करीब महसूस करने की बात कही.
यानी यहां खबर के साथ उसे समझने का तरीका भी लोगों के लिए मायने रखता है.
छोटी वीडियो ने बदला खबर समझने का तरीका
खबर अब सिर्फ पढ़ने तक सीमित नहीं है. छोटी वीडियो में तस्वीरों और बोलकर समझाने के जरिए किसी घटना की जानकारी दी जाती है.
यह तरीका खास तौर पर उन लोगों के लिए आसान हो सकता है जो लंबे लेख पढ़ने के बजाय वीडियो के जरिए किसी विषय को समझना पसंद करते हैं.
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की 2025 की वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, 18 से 24 साल के 44 प्रतिशत लोगों ने सोशल मीडिया और वीडियो मंचों को अपना मुख्य खबर स्रोत बताया था. यह वैश्विक आंकड़ा है, इसलिए इसे भारत के युवाओं का सीधा आंकड़ा नहीं माना जा सकता.
भारत में यूट्यूब और दूसरे मंचों की भूमिका
रॉयटर्स इंस्टीट्यूट की 2025 की भारत रिपोर्ट के मुताबिक, उसके सर्वे में शामिल 55 प्रतिशत लोगों ने यूट्यूब से खबरें लेने की बात कही. वहीं व्हाट्सऐप के लिए यह आंकड़ा 46 प्रतिशत, इंस्टाग्राम के लिए 37 प्रतिशत और फेसबुक के लिए 36 प्रतिशत था.
2026 की रिपोर्ट में यूट्यूब से खबरें लेने वालों का आंकड़ा करीब 58 प्रतिशत बताया गया.
इन आंकड़ों से भारत में वीडियो और सोशल मीडिया की भूमिका का अंदाजा मिलता है, लेकिन इन्हें सिर्फ जेनरेशन Z का आंकड़ा नहीं कहा जा सकता. सर्वे में अंग्रेजी समझने वाले लोगों की हिस्सेदारी ज्यादा थी.
तेजी से मिलने वाली खबर में एक खतरा भी है
सोशल मीडिया पर खबर बहुत जल्दी सामने आ सकती है, लेकिन इसकी रफ्तार के साथ गलत जानकारी का खतरा भी रहता है.
पुरानी तस्वीर को नई घटना से जोड़कर दिखाया जा सकता है. अधूरी जानकारी को पूरी खबर की तरह पेश किया जा सकता है. किसी व्यक्ति या संस्था के बारे में गलत दावा भी फैल सकता है.
इसलिए किसी बड़ी या संवेदनशील खबर को देखने के बाद उसकी पुष्टि दूसरे भरोसेमंद समाचार स्रोत या संबंधित सरकारी विभाग से करना जरूरी है.
खबर से जुड़कर अपनी बात रखती है जेनरेशन Z
सोशल मीडिया ने खबर देखने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया देने का तरीका भी बदला है.
किसी पोस्ट के नीचे सवाल पूछे जा सकते हैं. लोग अपनी जानकारी साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे से किसी घटना पर बातचीत कर सकते हैं. इस वजह से खबर देखने वाला व्यक्ति सिर्फ पाठक या दर्शक नहीं रहता, बल्कि चर्चा का हिस्सा भी बन जाता है.
जेनरेशन Z के लिए खबर का मतलब बदल रहा है
जेनरेशन Z के लिए खबर तक पहुंचने का रास्ता अब एक जैसा नहीं है. कोई सोशल मीडिया पर सामने आई पोस्ट से शुरुआत करता है, कोई वीडियो देखकर किसी घटना को समझता है और जरूरत पड़ने पर दूसरी जगह से उसकी जानकारी की पुष्टि करता है.
यही बदलाव आज के खबर देखने के तरीके को पहले से अलग बनाता है. खबर अब सिर्फ एक जगह से मिलने वाली जानकारी नहीं है, बल्कि अलग-अलग माध्यमों से सामने आने वाली चीज बन गई है.
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