मैसेज का रिप्लाई लेट आते ही होने लगती है घबराहट? जानें क्या है टेक्स्टिंग एंग्जायटी

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What Is Texting Anxiety, AI Image

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क्या मैसेज का देर से रिप्लाई आते ही आप बेचैन हो जाते हैं? बार-बार फोन चेक करना, ओवरथिंकिंग और घबराहट टेक्स्टिंग एंग्जायटी के संकेत हो सकते हैं. जानिए इसके कारण, लक्षण और इस डिजिटल तनाव से बचने के आसान और असरदार तरीके.

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What Is Texting Anxiety: आज के समय में ज्यादातर लोग बातचीत के लिए मैसेज का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन कई बार किसी को मैसेज भेजने के बाद जब देर तक जवाब नहीं मिलता, तो मन में कई तरह के सवाल आने लगते हैं. बार-बार फोन चेक करना, नोटिफिकेशन का इंतजार करना या यह सोचना कि कहीं सामने वाला नाराज तो नहीं है, ऐसी स्थिति को टेक्स्टिंग एंग्जायटी कहा जाता है. यह कोई बीमारी नहीं है, लेकिन लगातार ऑनलाइन रहने की आदत और तुरंत जवाब मिलने की उम्मीद कई लोगों में तनाव बढ़ा सकती है.

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क्यों होती है टेक्स्टिंग एंग्जायटी?

मैसेज में सामने वाले के चेहरे के भाव या बोलने का तरीका दिखाई नहीं देता. ऐसे में कई बार लोग बात का गलत मतलब निकाल लेते हैं. इसके अलावा हर समय ऑनलाइन रहने और तुरंत रिप्लाई देने का दबाव भी मानसिक थकान बढ़ा सकता है. कुछ लोग बार-बार फोन देखने की आदत के कारण भी छोटी-सी देरी को लेकर परेशान हो जाते हैं. जिन लोगों को पहले से चिंता या सोशल एंग्जायटी की समस्या रहती है, उनमें यह स्थिति और ज्यादा देखने को मिल सकती है.

कैसे पहचानें इसके लक्षण?

अगर मैसेज भेजने के बाद आपका ध्यान बार-बार फोन पर जाता है, दिल की धड़कन तेज हो जाती है या बिना नोटिफिकेशन आए भी आप स्क्रीन देखते रहते हैं, तो यह टेक्स्टिंग एंग्जायटी का संकेत हो सकता है. कई लोग देर से रिप्लाई आने पर खुद को ही गलत मानने लगते हैं और जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं. इससे चिड़चिड़ापन और बेचैनी भी बढ़ सकती है.

ऐसे करें इस आदत पर कंट्रोल

अगर आपको भी ऐसी परेशानी होती है, तो दिन में कुछ समय के लिए फोन से दूरी बनाएं. जरूरी बातों के लिए केवल मैसेज पर निर्भर रहने के बजाय फोन कॉल या आमने-सामने बातचीत करें. खुद पर हर समय तुरंत जवाब देने का दबाव न बनाएं और यह भी समझें कि हर व्यक्ति हमेशा फोन देखने की स्थिति में नहीं होता. कई बार सामने वाला अपने काम में व्यस्त भी हो सकता है.

अगर यह आदत आपकी पढ़ाई, नौकरी या रिश्तों पर असर डालने लगे, तो किसी मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना अच्छा कदम हो सकता है. याद रखें, तकनीक हमारी सुविधा के लिए है, चिंता बढ़ाने के लिए नहीं.

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