फॉर्ब्स इंडिया ने सेल्फ मेड वुमन की सूची में झारखंड की युवा कवयित्री जसिंता केरकेट्टा को किया शामिल
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 09 Dec 2022 7:16 AM
फाॅर्ब्स इंडिया की सूची में शामिल किये जाने के बाद जसिंता केरकेट्टा ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने इस सूची में शामिल किये जाने की सूचना दी है
फॉर्ब्स इंडिया ने भारत की सेल्फ मेड वुमन 2022 की सूची में झारखंड की युवा कवयित्री और स्वतंत्र पत्रकार जसिंता केरकेट्टा को टाॅप महिलाओं की सूची में शामिल किया है. जसिंता की कविताएं इन दिनों ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों में भी ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं.
फाॅर्ब्स इंडिया की सूची में शामिल किये जाने के बाद जसिंता केरकेट्टा ने सोशल मीडिया में एक पोस्ट लिखा है, जिसमें उन्होंने इस सूची में शामिल किये जाने की सूचना दी है. जसिंता ने प्रकृति के साथ अपने सान्निध्य को बताने के लिए अपने घर के आंगन में लगे सौ साल से भी अधिक के फुटकल पेड़ की चर्चा की है. यह जल-जंगल और जमीन के प्रति उनके प्रेम और आंदोलन दोनों का प्रतीक है. जसिंता ने लिखा है- फुटकल गाछ प्रकाशित है. गांव के लोग उसकी उम्र को लेकर कहते हैं कि वह हमारे पुरखों के पुरखो के समय से ऐसे ही खड़ा है. जल-जंगल-ज़मीन-ज़ुबान और ज़मीर की बात कहता है जिसे हम पीढ़ी दर पीढ़ी दोहराते हैं.
इस साल फोर्ब्स इंडिया की डब्ल्यू-पॉवर 2022 की सूची में ऐसी महिलाओं को शामिल किया गया है, जो रूढ़ियों को तोड़ रही हैं, संदेह को खारिज कर रही हैं और बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं. जसिंता केरकेट्टा के अलावा जो प्रमुख नाम इस सूची में हैं उनमें प्रमुख हैं निखत जरीन, कटरीना कैफ, अंजु श्रीवास्तव एवं अंजलि बंसल शामिल है.
फोर्ब्स इंडिया की टीम ने रिसर्च करके ऐसे नामों को इस सूची में जगह दी जिन्होंने अपनी पहचान खुद बनायी, जिन्हें विरासत में धन या पद नहीं मिला था. ऐसी महिलाएं जो दूसरों के लिए प्रेरणा बन सकें. इस सूची में 20 नामों को जगह दी गयी है.
जसिंता केरकेट्टा देश की जानी-पहचानी कवयित्री और स्वतंत्र पत्रकार हैं, जिन्होंने लगातार महिला अधिकारों की बात की. जिन्होंने आदिवासी समाज पर हो रहे अत्याचारों की बेबाकी से चर्चा की, साथ ही अपने समाज में व्याप्त अंधविश्वासों का भी खुल कर विरोध किया है.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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