बिहार में शराबबंदी की कमान दिव्या शक्ति के हाथ में, IPS के बाद ऐसे बनीं IAS, देखें UPSC रैंक
IAS दिव्या शक्ति (Image: Instagram)
Success Story Divya Shakti IAS: बिहार में यंग आईएएस दिव्या शक्ति को अब नई जिम्मेदारी मिली है. यूपीएससी सिविल सर्विस की परीक्षा दो बार क्रैक करने वाली दिव्या शक्ति की जर्नी शानदार रही है. आइए उनकी जर्नी को करीब से जानते हैं.
IAS दिव्या शक्ति, जो बिहार के कैमूर जिले में जिला परिषद की उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के पद पर थीं, उनका ट्रांसफर हो गया है. अब उन्हें सामान्य प्रशासन विभाग में योगदान देना होगा.
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इसके बाद IAS दिव्या शक्ति को आयुक्त, उत्पाद, मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग, बिहार, पटना के पद पर नियुक्त किया गया है. बिहार में शराबबंदी को मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग (Prohibition, Excise and Registration Department) द्वारा कंट्रोल और लागू किया जाता है. एक जिला परिषद उप विकास आयुक्त के रूप में, उन्होंने स्थानीय विकास परियोजनाओं की देखरेख की, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास और सामाजिक कल्याण कार्यक्रम शामिल थे.
आयुक्त, उत्पाद के रूप में, वह राज्य में उत्पाद शुल्क कानूनों के प्रवर्तन और शराब की बिक्री व वितरण के विनियमन के लिए जिम्मेदार हैं, जो बिहार के शराबबंदी कानूनों को लागू करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
IAS दिव्या शक्ति एक प्रेरणादायक सफर
दिव्या शक्ति 2022 बैच की IAS अधिकारी हैं. प्रशासनिक सेवा में आने से पहले उन्होंने निजी क्षेत्र में काम किया. पहली कोशिश में उन्हें IPS सेवा मिली, लेकिन लक्ष्य IAS बनना था.
पहली कोशिश में मिली 79वीं रैंक
दिव्या शक्ति ने UPSC की तैयारी शुरू करने से पहले परीक्षा की प्रकृति को समझा. उन्होंने टॉपर्स के अनुभव सुने और अखबार को तैयारी का अहम हिस्सा बनाया. पहली कोशिश में उन्होंने 79वीं रैंक हासिल की. उस साल सामान्य वर्ग की सीटें 72 रह गई थीं. इस रैंक के बावजूद, यह संभव है कि उस वर्ष जनरल कैटेगरी के लिए केवल 72 सीटें उपलब्ध होने या कट-ऑफ के कारण उन्हें IPS मिला, जबकि उनका लक्ष्य IAS बनना था.
दूसरी कोशिश में AIR 58
IPS मिलने के बाद भी दिव्या शक्ति ने प्रयास जारी रखा. उन्हें IAS की भूमिका अधिक पसंद थी. इसलिए उन्होंने दोबारा UPSC परीक्षा दी. दूसरी कोशिश में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 58 हासिल की और IAS बनने का सपना पूरा किया. उन्होंने कमजोरियों पर काम किया.
पढ़ाई के साथ दुनिया से जुड़ना
दिव्या शक्ति मानती हैं कि UPSC की तैयारी का मतलब सिर्फ किताबें पढ़ना नहीं है. इसके साथ ही सामान्य जागरूकता और आसपास की घटनाओं को समझना भी जरूरी है. अखबार पढ़ते समय तथ्यों को रटने के बजाय यह समझें कि संविधान, राजनीति और प्रशासन असल जीवन में कैसे काम करते हैं.
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प्रिलिम्स और मेन्स की तैयारी
UPSC प्रिलिम्स के लिए मॉक टेस्ट दिए और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, जिससे ताकत और कमजोरियों का पता चला. मेन्स के लिए सिलेबस पूरा करने, पिछले सालों के प्रश्नपत्रों को समझने और उत्तर लेखन का अभ्यास किया. जानकारी होना काफी नहीं, उसे उत्तर पुस्तिका में सही से प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है.
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इंटरव्यू में शांत रहना जरूरी
दिव्या शक्ति के अनुसार UPSC इंटरव्यू में सिर्फ जानकारी नहीं, बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तित्व भी परखा जाता है. आत्मविश्वास, परिपक्वता, जागरूकता और शांत व्यवहार महत्वपूर्ण हैं. कठिन सवालों पर भी संयम बनाए रखना जरूरी है.
लगातार मेहनत सफलता की कुंजी
दिव्या शक्ति UPSC को मैराथन मानती हैं, स्प्रिंट नहीं. असफलता मिलने पर घबराएं नहीं, बल्कि अपनी रणनीति की समीक्षा करें. अक्सर मेहनत दिशाहीन हो सकती है. अपनी कमियों को पहचानना और परीक्षा की मांग को समझना जरूरी है. दूसरों से तुलना के बजाय अपनी तैयारी पर भरोसा रखें और धैर्य रखें.
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