जंक फूड से हेल्दी फूड तक का सफर, जानें CBSE की पहल से कितने जागरूक हुए स्टूडेंट्स?

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हेल्दी खाना खाते स्टूडेंट्स की AI जनरेटेड फोटो

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CBSE Health Initiative: CBSE के Sugar Board और Oil Board इनिशिएटिव का उद्देश्य छात्रों को ज्यादा चीनी और तेल वाले खाद्य पदार्थों के नुकसान के प्रति जागरूक करना है. जानिए स्कूलों में इस पहल के बाद बच्चों की खान-पान की आदतों में कितना बदलाव आया और स्कूल मैनेजमेंट व हेल्थ एक्सपर्ट्स की क्या राय है.

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CBSE Health Initiative: CBSE ने छात्रों में बढ़ते मोटापे (Obesity), डायबिटीज और खराब खान-पान की आदतों को देखते हुए 2025 में दो बड़े हेल्थ अवेयरनेस अभियान 'शुगर बोर्ड' और 'ऑयल बोर्ड' शुरू किए थे. इनका उद्देश्य छात्रों को रोजाना के खाने में मौजूद अधिक चीनी और तेल के नुकसान के बारे में जागरूक करना था. आइए जानते हैं, कुछ हेल्थ एक्सपर्ट्स और स्कूल मैनेजमेंट से कि बोर्ड के इस इनिशिएटिव के बाद स्टूडेंट्स के हेल्थ पर कितना फायदा हुआ है.

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About Sugar Board: क्या है शुगर बोर्ड?

शुगर बोर्ड, स्कूलों में लगाया गया एक विजुअल डिस्प्ले पैनल है, जिसका उद्देश्य बच्चों को दैनिक खान-पान में छिपी शुगर की मात्रा और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के प्रति जागरूक करना है.


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About Oil Board: क्या है ऑयल बोर्ड?

ऑयल बोर्ड, बच्चों में बढ़ते मोटापे और गलत खान-पान की आदतों को रोकने के लिए स्कूल कैंटीन और सार्वजनिक स्थानों पर लगाए जाने वाला एक डिजिटल या प्रिंटेड डिस्प्ले बोर्ड हैं. अपके खाने में तेल की मात्रा कितनी है, इसके बारे में जानकारी देता है.


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CBSE Board schools: बोर्ड अफिलिएटेड स्कूल ने किया निर्देश का पालन

CBSE अफिलिएटेड स्कूलों ने बोर्ड के निर्देश का पालन करना शुरू किया और अलग अलग माध्यम से उन्हें जागरूक करने में लग गए. कई स्कूल, जहां स्टूडेंट्स को खाना प्रोवाइड किया जाता है, वहां के कैंटिन मेन्यू में भी बदलाव किया गया. स्टूडेंट्स को पूड़ी और पराठा की जगह पोहा, उपमा और ढोकला जैसा नास्ता दिया जाने लगा.

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School Management Reaction: यह कहना है स्कूल मैनेजमेंट का

रांची के फेमस स्कूल की शिक्षिका मुक्ति शाहदेव ने बताया कि बोर्ड की इस पहल के बाद से देखा जा रहा है कि स्टूडेंट्स के साथ उनके पेरेंट्स भी काफी ज्यादा जागरूक हुए हैं. बच्चे खुद जंक फूड खाना कम कर हेल्दी खाना प्रेफर कर रहे हैं. बोर्ड के इस पहल के बाद से ऐसे तो काफी बदलाव आया है और धीरे धीरे और जागरूकता आ रही है.

Health Expert Advice: जानिए क्या कहा हेल्थ एक्सपर्ट ने?

डायटिशियन मौनिका दीक्षित ने कहा कि यह बोर्ड की काफी अच्छी पहल है और इसका इंप्लीमेंटेशन अच्छे से होना बहुत जरूरी है. हालांकि उन्होंने बताया कि बच्चों में मोटापा, शुगर, अस्थमा की समस्याएं बहुत ज्यादा कम नहीं हुई है. बाहरी और ज्यादा तला-छना खाना उनके सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है और वे कम उम्र में शुगर और डायबिटीज जैसी समस्याओं का शिकार हो रहे हैं.

Schools Initiatives: किन तरहों से जागरूक किया जा रहा स्टूडेंट्स को?

  • स्कूल असेंबली.
  • डाइटिशियन और डॉक्टरों के सेमिनार.
  • कैंटीन मेन्यू में बदलाव.
  • हेल्थ और न्यूट्रिशन वर्कशॉप.
  • नो जंक फूड डे, हेल्दी टिफिन डे और फ्रूट डे, स्कूल में ऐसे आयोजन.

Parents Role: सिर्फ स्कूल नहीं, पेरेंट्स की भी अहम भूमिका

स्कूलों में स्टूडेंट्स को हेल्थ को लेकर जागरूक करने के साथ पेरेंट्स का भी जागरूक होना बहुत जरूरी है. ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों की खान-पान की आदतें घर से शुरू होती है. इसलिए पेरेंट्स को भी बच्चों के टिफिन, घर के खाने और स्क्रीन टाइम पर ध्यान देना चाहिए.

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