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झारखंड का एक गांव, जहां 199 एकड़ में नहीं जलता चिराग, ढूंढे नहीं मिलेगा एक मकान, वजह जान चौंक जायेंगे आप

Updated at : 18 Jan 2022 11:36 AM (IST)
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झारखंड का एक गांव, जहां 199 एकड़ में नहीं जलता चिराग, ढूंढे नहीं मिलेगा एक मकान, वजह जान चौंक जायेंगे आप

Jharkhand News: देवघर के मोहनपुर प्रखंड की कटवन पंचायत स्थित मठेया गांव में कोई आबादी नहीं है. लोग केवल जमीन को खेती के उपयोग में लाते हैं. अंधविश्वास ये है कि यहां मकान की नींव डालने पर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है.

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Jharkhand News: झारखंड में कई जगह एक-एक इंच की जमीन के लिए लोग एक दूसरे की जान ले लेते हैं. देवघर में जमीन विवाद को लेकर अक्सर बड़ी घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन देवघर से मात्र 15 किलोमीटर की दूरी पर एक ऐसा गांव है जहां 199 एकड़ पैतृक जमीन रहने के बाद भी पूरे गांव में एक मकान तक नहीं है. कोई इस जमीन पर मकान की नींव तक नहीं खोदना चाहता हैं. मोहनपुर प्रखंड की कटवन पंचायत स्थित मठेया गांव में कोई आबादी नहीं है. लोग केवल जमीन को खेती के उपयोग में लाते हैं. अंधविश्वास ये है कि यहां मकान की नींव डालने पर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है.

देवघर के मठेया गांव में कुल 199 एकड़ जमीन वीरान पड़ी है. इस गांव की जमीन के मालिक पड़ोस में कटवन गांव में अपने पैतृक जमीन पर रहते हैं, लेकिन रोड के उस पार मात्र 15 फीट की दूरी पर पड़ने वाले मठेया गांव में कोई गाय का खटाल तक बनाने को तैयार नहीं है. इसके पीछे एक अंधविश्वास है. गांव वालों के अनुसार मठेया गांव में उनके पूर्वजों से ही कोई मकान नहीं बनाता हैं. कहा जाता है कि अगर यहां मकान की नींव भी डालते हैं तो उनके घर में किसी की मृत्यु हो जाती है. मृत्यु के इस भय और अंधविश्वास के कारण इस गांव में कोई झोपड़ी तक बनाने को तैयार नहीं है. हालांकि घर बनाने के बाद उनके पूर्वज में किसकी मृत्यु हुई है यह भी गांव वालों को पता नहीं है, लेकिन वर्षों से चलती आ रहे इस अंधविश्वास और भय के कारण लोग इससे बाहर नहीं निकल पाये.

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इस गांव के कई जमीन मालिकों को सरकार से प्रधानमंत्री आवास भी स्वीकृत हुआ है, लेकिन वे लोग कम ज़मीन होने के बाद भी प्रधानमंत्री आवास गांव में ही बना रहे हैं. मठेया में पर्याप्त जमीन होने के बावजूद घनी आबादी में ही रहने को तैयार हैं, लेकिन मात्र 15 फीट की दूरी पर पड़ने वाले मठेया गांव में घर नहीं बनाना चाहते हैं. हालांकि इस गांव में 199 एकड़ जमीन पर सालोंभर खेती जरूर करते हैं. बड़े तालाब में सिंचाई की सुविधा होने की वजह से सालोंभर धान, गेहूं और सब्जी की खेती होती है. शाम होने से पहले सभी किसान खेतों को खाली कर वापस अपने बगल के गांव कटवन लौट जाते हैं. कोई यहां रात में नहीं रुकता है.

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कटवन पंचायत के पंचायत प्रधान हिमांशु शेखर यादव ने कहा कि मठेया में अब तक किसी के द्वारा मकान नहीं बनाना केवल और केवल इसके पीछे अंधविश्वास है. इस अंधविश्वास को खत्म करने के लिए पंचायत जल्द पहल करने जा रही है. इस गांव के जिन जमीन मालिकों को प्रधानमंत्री आवास दिया गया है, उनके आवास का निर्माण मठेया गांव में ही शुरू कराया जाएगा. अन्य लोगों को भी अपने-अपने निजी आवास यहां बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा. जल्द ही इस गांव में ग्राम सभा की बैठक कर अंधविश्वास को हमेशा के लिए खत्म करने का फैसला लिया जाएगा. गांव में चिराग जलेगा और आबादी बसेगी.

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रिपोर्ट: अमरनाथ पोद्दार

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