अमेरिका में ब्याज दरों पर ब्रेक, लेकिन महंगाई की चिंता बरकरार, फेड ने नहीं बदली दरें

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केविन वॉर्श (Photo: Bloomberg)

अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है. जानिए महंगाई, पेट्रोल की बढ़ती कीमतों, शेयर बाजार और सोने पर इस फैसले का क्या असर पड़ा.

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अमेरिका के केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व (Fed) ने अपनी नई मौद्रिक नीति बैठक में ब्याज दरों को फिलहाल 350-375 बेसिस प्वाइंट के दायरे में ही बनाए रखने का फैसला किया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका-ईरान तनाव के चलते फ्यूल की कीमतें बढ़ रही हैं और महंगाई का दबाव फिर से बढ़ता दिख रहा है. फेड का कहना है कि महंगाई अभी भी उसके 2% के लक्ष्य से ऊपर है और कीमतों को काबू में रखना उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है.

फेड ने ब्याज दरें क्यों नहीं बढ़ाईं?

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, फेड के नए चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता में यह दूसरी मौद्रिक नीति बैठक थी. बैठक के बाद जारी बयान में कहा गया कि ऊर्जा जैसे कुछ सेक्टरों में सप्लाई से जुड़े झटकों की वजह से कीमतें बढ़ी हैं, इसलिए महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है. हालांकि, सभी सदस्य इस फैसले से सहमत नहीं थे. 12 सदस्यों में से बेथ एम. हैमैक, नील काशकारी और लॉरी के. लोगन ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ाने के पक्ष में वोट दिया.

आगे ब्याज दरों को लेकर क्या संकेत मिले?

केविन वार्श ने कहा कि फेड किसी एक आंकड़े के आधार पर फैसला नहीं ले रहा है. उनके मुताबिक हाल के वर्षों में कई बड़े आर्थिक झटके देखने को मिले हैं, जिनमें शामिल है—

  • कोविड-19 के बाद सप्लाई चेन की दिक्कतें
  • सैन्य संघर्ष
  • ऊर्जा सप्लाई में रुकावट
  • टैरिफ में बढ़ोतरी
  • AI से जुड़े निवेश में तेज उछाल

उन्होंने कहा कि फेड का फोकस किसी एक डेटा पर नहीं बल्कि पूरे ट्रेंड पर है. इस बार भी फेड ने भविष्य की नीति को लेकर कोई स्पष्ट संकेत (Forward Guidance) नहीं दिया. इससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अगर महंगाई का दबाव बना रहा तो आने वाली बैठकों में अचानक ब्याज दर बढ़ाने का फैसला भी लिया जा सकता है.

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महंगाई की तस्वीर क्या कहती है?

जून के लिए जारी अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) रिपोर्ट में मासिक आधार पर महंगाई 0.4% घटी, जो अप्रैल 2020 के बाद पहली मासिक गिरावट थी. इससे पहले मई में CPI में 0.5% की बढ़ोतरी हुई थी. हालांकि सालाना आधार पर CPI अभी भी 3.5% पर है. यह मई के 4.2% से कम जरूर है, लेकिन फेड के 2% लक्ष्य से काफी ऊपर है. इसी बीच अमेरिका में पेट्रोल भी महंगा हुआ है.

बाजार और राजनीति पर क्या असर पड़ा?

ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली. नैस्डैक 0.9%, डाउ जोन्स 1.6% और एसएंडपी 500 0.7% नीचे कारोबार करते दिखे. वहीं सुरक्षित निवेश माने जाने वाले स्पॉट गोल्ड की कीमत 1.2% बढ़कर 4,076.41 डॉलर प्रति औंस पहुंच गई.

दूसरी ओर, व्हाइट हाउस लगातार ब्याज दरों में कटौती की मांग करता रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी फेड पर दबाव बनाते रहे हैं. हालांकि नए चेयरमैन केविन वार्श अब तक उनके निशाने पर नहीं आए हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में महंगाई और ऊर्जा कीमतों की दिशा ही तय करेगी कि फेड अगला कदम क्या उठाता है.

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सौम्या शाहदेव

लेखक के बारे में

By सौम्या शाहदेव

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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