यूनाइटेड और ओरिएंटल बैंक का PNB में हो गया विलय, SBI के बाद बना देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक

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यूनाइटेड और ओरिएंटल बैंक का PNB में हो गया विलय, SBI के बाद बना देश का दूसरा बड़ा सरकारी बैंक

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक में यूनाइटेड और ओरिएंटल बैंक का विलय हो गया है.

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नयी दिल्ली : देश के सार्वजनिक क्षेत्र के पंजाब नेशनल बैंक में यूनाइटेड और ओरिएंटल बैंक का विलय हो गया है. पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) ने बुधवार को कहा कि यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया (यूबीआई) और ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (ओबीसी) की सभी शाखाओं ने उसकी शाखाओं के रूप में काम करना शुरू कर दिया है. यूबीआई और ओबीसी का पीएनबी में विलय एक अप्रैल से प्रभावी हो गया है.

गौरतलब है कि विलय के बाद जो बैंक सामने आया है, यह शाखाओं तथा कारोबार दोनों लिहाज से भारतीय स्टेट बैंक के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक है. पीएनबी ने एक बयान में कहा कि इस विलय से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तथा अगली पीढ़ी के बैंक का रास्ता प्रशस्त हुआ है. अब जमाकर्ताओं समेत सभी ग्राहकों को पीएनबी का ग्राहक माना जाएगा. बयान में बताया गया कि अब पीएनबी की देश भर में 11 हजार से अधिक शाखाएं, 13 हजार से अधिक एटीएम, एक लाख कर्मचारी और 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होगा.

पीएनबी के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी एसएस मल्लकार्जुन राव ने कहा कि भौगोलिक रूप से उपस्थिति में विस्तार से हमें अधिक दक्ष और प्रभावी तरीके से ग्राहकों की सेवा करने में मदद मिलेगी. बैंक ने विलय के बाद ग्राहकों की मदद के लिए सभी शाखाओं तथा कार्यालयों में बैंक साथी की नियुक्ति की है. बैंक ने अपना नया लोगो भी पेश किया है.

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कुमार विश्वत सेन

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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