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जल्द आएगी स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की सस्ती जेनरिक दवा, दिल्ली हाईकोर्ट ने किया रास्ता साफ

Updated at : 26 Mar 2025 5:56 PM (IST)
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Generic Drug

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Generic Drug: दिल्ली हाईकोर्ट ने नैटको फार्मा को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) की सस्ती जेनेरिक दवा लॉन्च करने की अनुमति दी. रोश की याचिका खारिज, जिससे मरीजों को सालाना 3,000 रुपये में सुलभ इलाज मिलेगा.यह फैसला महंगी दवाओं पर निर्भर मरीजों के लिए राहत लेकर आया है.

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Generic Drug: स्पाइन मस्कुलर एट्रोफी नामक बीमारी से ग्रस्त मरीजों और उनके परिजनों के लिए एक अच्छी खबर है. वह यह है कि इस बीमारी के इलाज के लिए जल्द ही सस्ती जेनरिक दवा बाजार में आने वाली है. अंग्रेजी की वेबसाइट द टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार 25 मार्च 2025 को स्विस फार्मा कंपनी एफ हाफमैन-ला रोश (F Hoffmann-La Roche) की ओर से दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय कंपनी नैटको फार्मा (Natco Pharma) को स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) के इलाज के लिए अपनी पेटेंटेड दवा रिस्डिप्लाम (Risdiplam) के जेनेरिक संस्करण की बिक्री को रोकने का अनुरोध किया था.​

मरीजों को मिलेगी आर्थिक राहत

अंग्रेजी की वेबसाइट बिजनेस स्टैंडर्ड ने खबर दी है कि दिल्ली हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद नैटको फार्मा अब इस दुर्लभ आनुवंशिक विकार स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी के लिए एक सुलभ और किफायती जेनेरिक दवा बाजार में ला सकेगी. फिलहाल, स्विस कंपनी रोश की रिस्डिप्लाम दवा की कीमत सालाना कीमत 22 लाख से 72 लाख रुपये के बीच है. विश्लेषकों का अनुमान है कि नैटको का जेनेरिक दवा की कीमत सालाना करीब 3,000 रुपये हो सकती है, जिससे मरीजों को भारी आर्थिक राहत मिलेगी.​

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स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए अदालत का फैसला अहम

बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि स्विस कंपनी रोश ने नैटको फार्मा के खिलाफ पेटेंट उल्लंघन का मामला दर्ज किया था, जिसमें उन्होंने नैटको को अपनी जेनेरिक दवा लॉन्च करने से रोकने की मांग की थी. हालांकि, अदालत ने रोश की इस याचिका को खारिज करते हुए नैटको को अपने जेनेरिक दवा के साथ आगे बढ़ने की अनुमति दी.​ अदालत का यह फैसला भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे दुर्लभ बीमारियों के लिए महंगी दवाओं के सस्ते विकल्प उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम स्पाइन मस्कुलर एट्रोफी से पीड़ित मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएगा, जो अब तक महंगी दवाओं के कारण उचित इलाज से वंचित थे.​

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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