Aadhaar में बदलनी है डेट ऑफ बर्थ? दूसरी बार अपडेट के लिए जान लें UIDAI का नियम
आधार कार्ड में जन्मतिथि (DOB) अपडेट
आधार कार्ड में जन्म तिथि (Date Of Birth) बदलने की सोच रहे हैं? जानें दूसरी बार DoB अपडेट के UIDAI नियम, जरूरी दस्तावेज और गलत जानकारी देने पर होने वाली कार्रवाई क्या है.
आधार कार्ड में दर्ज जन्म तिथि (Date of Birth) गलत है तो उसे ठीक कराया जा सकता है. लेकिन अगर एक बार सुधार कराने के बाद दोबारा डेट ऑफ बर्थ बदलने की जरूरत पड़ती है, तो मामला सामान्य अपडेट जैसा नहीं रहता. UIDAI के मुताबिक, डेट ऑफ बर्थ बदलने की कोई तय संख्या सीमा नहीं है, लेकिन दूसरी या उसके बाद की रिक्वेस्ट को अपवाद वाला मामला माना जाता है और इसमें ज्यादा सख्त जांच होती है.
UIDAI ने 24 दिसंबर 2025 को जारी अपने SOP (Standard Operating Procedure) में ऐसे मामलों के लिए नियम बताए हैं. इसका मतलब है कि सिर्फ कोई दूसरा पहचान पत्र देकर अलग जन्म तिथि दर्ज कराने की मांग करना पर्याप्त नहीं होगा.
क्या आधार में दूसरी बार जन्म तिथि बदल सकते हैं?
हां, दूसरी बार भी डेट ऑफ बर्थ अपडेट कराने का मौका मिल सकता है. हालांकि, इसके लिए मामला खास परिस्थितियों में होना चाहिए और जरूरी दस्तावेज भी पहले के रिकॉर्ड के हिसाब से देने होंगे. अगर पहली बार जन्म तिथि के लिए बर्थ सर्टिफिकेट के अलावा कोई दस्तावेज दिया गया था, तो बाद में सुधार के लिए आम तौर पर बर्थ सर्टिफिकेट की जरूरत पड़ सकती है.
वहीं, अगर पहले ही बर्थ सर्टिफिकेट जमा किया गया था और उसमें गलती है, तो सुधारा हुआ बर्थ सर्टिफिकेट देना होगा. इसमें वही Birth Registration Number (BRN) और वही रजिस्ट्रार होना चाहिए. इसके साथ एफिडेविट भी देना होगा.
बर्थ सर्टिफिकेट इतना जरूरी क्यों है?
UIDAI के नियमों के अनुसार, जन्म तिथि का कानूनी प्रमाण बर्थ सर्टिफिकेट है. इसलिए एक बार बर्थ सर्टिफिकेट के आधार पर डेट ऑफ बर्थ दर्ज होने के बाद सामान्य स्थिति में दोबारा बदलाव की जरूरत नहीं होनी चाहिए. अगर पहले डेट ऑफ बर्थ किसी दूसरे दस्तावेज, जैसे मार्कशीट या पासपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई थी, तो परिस्थितियों के अनुसार उसी दस्तावेज का सुधरा हुआ संस्करण या बर्थ सर्टिफिकेट मांगा जा सकता है.
गलती आधार ऑपरेटर से हुई तो क्या होगा?
अगर आपने सही दस्तावेज दिया था, लेकिन आधार में डेट ऑफ बर्थ गलत दर्ज हो गई, तो इसे ऑपरेटर की गलती माना जा सकता है. ऐसे मामले में पहले जमा किए गए जन्म तिथि के प्रमाण की जांच की जाएगी. अगर वह दस्तावेज अब मान्य सूची में नहीं है या आपके पास उपलब्ध नहीं है, तो UIDAI कुछ परिस्थितियों में सेल्फ डिक्लेरेशन के जरिए सुधार की अनुमति दे सकता है.
गलत दस्तावेज दिया था तो क्या कार्रवाई होगी?
अगर किसी व्यक्ति ने पहले जानबूझकर गलत या फर्जी दस्तावेज देकर आधार में गलत जन्म तिथि दर्ज कराई थी, तो UIDAI उसे सुधार का एक आखिरी मौका दे सकता है. हालांकि, मामला सामने आने पर आधार डीएक्टिवेट भी किया जा सकता है. आधार दोबारा एक्टिव कराने के लिए असली और ऑनलाइन वेरिफाई होने वाला जन्म तिथि प्रमाण और जरूरी एफिडेविट देना होगा. मामले की गंभीरता के आधार पर FIR समेत कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
इसके अलावा, अगर किसी ने 0-5 साल या 5-18 साल वाली उम्र कैटेगरी में आधार बनवाया था और बाद में बदली गई जन्म तिथि से पता चलता है कि उस समय उम्र तय सीमा से ज्यादा थी, तो UIDAI इसे संभावित फर्जी एनरोलमेंट मानकर जांच कर सकता है. ऐसी स्थिति में रिक्वेस्ट खारिज होने के साथ आधार डीएक्टिवेट और कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है.
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