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सरकार ने चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये का पैकेज किया मंजूर

Updated at : 26 Sep 2018 4:58 PM (IST)
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सरकार ने चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये का पैकेज किया मंजूर

नयी दिल्ली : सरकार ने बुधवार को चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी. इसके तहत गन्ना किसानों को उत्पादन सहायता में दोगुने की वृद्धि की गयी है, जबकि विपणन वर्ष 2018-19 के लिए 50 लाख टन के निर्यात के लिए मिलों को परिवहन सब्सिडी देना शामिल है. मंत्रिमंडल की […]

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नयी दिल्ली : सरकार ने बुधवार को चीनी उद्योग के लिए 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी. इसके तहत गन्ना किसानों को उत्पादन सहायता में दोगुने की वृद्धि की गयी है, जबकि विपणन वर्ष 2018-19 के लिए 50 लाख टन के निर्यात के लिए मिलों को परिवहन सब्सिडी देना शामिल है. मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की यहां हुई बैठक में इससे संबंधित खाद्य मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसमें चीनी मिलों को गन्ने के बकाये के भुगतान में सहयोग के लिए देश में इस समय चीनी के भंडार की समस्या के समाधान का प्रस्ताव है. मिलों पर गन्ना किसानों का 13,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है.

इसे भी पढ़ें : गन्ना किसानों के बकाये की वजह से सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क बढाकर 40 प्रतिशत करने को दी मंजूरी

सीसीईए ने चीनी क्षेत्र को मदद के लिए कुल 5,500 करोड़ रुपये के पैकेज को मंजूरी दी है. इसके तहत गन्ने की उत्पादन लागत को कम करने में मदद तथा देश से चीनी के निर्यात में सहायता शामिल है. एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि इससे चीनी उद्योग के पास नकदी की स्थिति सुधरेगी और उसे गन्ना किसानों का बकाया चुकाने में मदद मिलेगी. कुल पैकेज 5,538 करोड़ रुपये का है. इसमें 1,375 करोड़ रुपये का पैकेज मिलों को परिवहन सब्सिडी के रूप में मिलेगा. शेष राशि उत्पादन सहायता के रूप में सीधे गन्ना किसानों के खातों में डाली जायेगी.

इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव तथा अगले साल के मध्य में आम चुनाव के मद्देनजर केंद्र सरकार गन्ना किसानों के भुगतान का मुद्दा हल करना चाहती है. चीनी उद्योग को संकट से उबारने के लिए यह दूसरा सरकारी वित्तीय पैकेज है. इससे पहले जून में सरकार ने 8,500 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की थी. विपणन वर्ष 2017-18 (अक्टूबर-सितंबर) में 3.2 करोड़ टन के रिकॉर्ड उत्पादन की वजह से उद्योग के समक्ष चीनी के अधिक भंडार की समस्या हो गयी है. इस महीने के अंत तक चीनी का स्टॉक एक करोड़ टन था.

देश में अत्यधिक चीनी उत्पादन की स्थिति से निपटने की वृहद नीति के तहत मंत्रालय ने गन्ने के उत्पादन की लागत के असर को कम करने के लिए उत्पादकों को 2018-19 के विपणन वर्ष के लिए दी जाने वाली उत्पादन सहायता बढ़ाकर 13.88 रुपये प्रति क्विंटल करने का प्रस्ताव किया था. इस साल के लिए यह 5.50 रुपये प्रति क्विंटल है.

अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय चीनी की कीमतें कम चल रहीं हैं. इसकी वजह से मंत्रालय ने मिलों को 2018-19 के लिए न्यूनतम सांकेतिक निर्यात कोटा (एमआईईक्यू) के तहत 50 लाख टन चीनी निर्यात में मदद का प्रस्ताव किया है. इसके निर्यात की चीनी पर देश के अंदर परिवहन और पल्लेदारी तथा अन्य शुल्कों पर मिलों के खर्च की भरपाई की जायेगी.

मंत्रिमंडल ने बंदरगाह से 100 किलोमीटर में स्थित मिलों को 1,000 रुपये प्रति टन की सब्सिडी, जबकि तटीय राज्यों में बंदरगाह से 100 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित मिलों के लिए 2,500 रुपये प्रति टन तथा तटीय राज्यों के अलावा स्थित मिलों के लिए 3,000 रुपये प्रति टन की परिवहन सब्सिडी का प्रस्ताव किया है.

सरकार मिलों की तरफ से गन्ना उत्पादन सहायता किसानों के खातों में सीधे हस्तांतरित करेगी. यह कदम मिलों पर किसानों के बकाया 13,500 करोड़ रुपये के निपटान में मदद के लिए उठाया जा रहा है. सूत्रों ने इससे पहले बताया था कि सरकार को चीनी मिलों और गन्ना किसानों के लिए इन उपायों की वजह से करीब 4,500 करोड़ रुपये का बोझ उठाना पड़ेगा. इन कदमों से चीनी का निर्यात बढ़ाने तथा गन्ना के बकाये का निपटान करने में मदद मिलेगी, जो फिलहाल 13,567 करोड़ रुपये है.

उत्तर प्रदेश की चीनी मिलों पर गन्ना का बकाया सबसे अधिक 9,817 करोड़ रुपये है. देश का चीनी उत्पादन अगले विपणन वर्ष में बढ़कर 3.5 करोड़ टन पर पहुंचने का अनुमान है. 2017-18 में यह 3.2 करोड़ टन रहा है. चीनी की घरेलू मांग 2.6 करोड़ टन की है. सरकार ने पिछले एक साल के दौरान चीनी मिलों तथा गन्ना किसानों को संकट से निकालने के लिए कई उपाय किये हैं.

पहले सरकार ने चीनी पर आयात शुल्क दोगुना कर 100 फीसदी किया और बाद में इस पर निर्यात शुल्क समाप्त कर दिया. इसके अलावा, चीनी मिलों के लिए वैश्विक स्तर पर दाम कम होने के बावजूद 20 लाख टन चीनी के निर्यात को अनिवार्य किया गया है. जून में सरकार ने उद्योग के लिए 8,500 करोड़ रुपये का पैकेज घोषित किया था. इसमें 4,440 करोड़ रुपये मिलों को सस्ते कर्ज के रूप में एथेनॉल क्षमता के विकास के लिए दिये गये थे. इसमें 1,332 करोड़ रुपये की ब्याज सहायता है. सीसीईए ने गन्ने के रस से 100 फीसदी निकाले गये एथेनॉल का खरीद मूल्य बढ़ाकर 59.13 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. अभी इसकी मौजूदा दर 47.13 रुपये लीटर है.

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