अयोध्या धाम से बेतिया का नाता है सदियों पुराना, आज भी विराजे हैं 'हमारे राम'

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 03 Jan 2024 10:48 PM

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अयोध्या धाम से बेतिया का न सिर्फ 400 वर्षों का पुराना नाता है, बल्कि यह पावन अवध नगरी अपने बेतिया से आज तक आध्यात्मिक रूप से जुड़ा है. इसका उदाहरण अयोध्या धाम के नया घाट के समीप बेतिया राज के भव्य और विशाल श्रीराम मंदिर के रूप में मौजूद है.

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गणेश, बेतिया. अब जब लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम का मंदिर बना है और पूरा देश राममय हो चला है. चहुंओर उत्सव सा माहौल है, लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि अयोध्या धाम से बेतिया का न सिर्फ 400 वर्षों का पुराना नाता है, बल्कि यह पावन अवध नगरी अपने बेतिया से आज तक आध्यात्मिक रूप से जुड़ा है. इसका उदाहरण अयोध्या धाम के नया घाट के समीप बेतिया राज के भव्य और विशाल श्रीराम मंदिर के रूप में मौजूद है.

मुख्य बातें

  • – सन 1600 में ही बेतिया महाराज ने अयोध्या में बनवाई थी भव्य राम मंदिर, होता है पूजन अर्चन

  • – बेतिया राज की प्रसिद्ध नागर शैली में बना है राम मंदिर, विराजमान मूर्तियां भी यही के कारीगरी की

  • – देख रेख के अभाव में जीर्ण शीर्ण हो गया है मंदिर, तारणहार का इंतजार

मंदिर अब जीर्ण शीर्ण अवस्था में

मौजूद तथ्यों की माने तो अयोध्या में मौजूद इस राम मंदिर का निर्माण बेतिया राज के महाराज ने 1600 ईसवीं में करायी थी. बेतियाराज की प्रसिद्ध नागर शैली में बनी यह मंदिर हुबहू बेतिया के कालीबाग, दुर्गाबाग, सागर पोखरा समेत अन्य मंदिरों की तर्ज पर स्थापित है. मंदिर के शीर्ष पर ही बेतिया मंदिर का उल्लेख है. विराजमान मूर्तियां भी यहीं के कारीगर की है. हालांकि देखरेख के अभाव में यह मंदिर अब जीर्ण शीर्ण अवस्था में पहुंच गयी है, लेकिन मंदिर में विराजे हमारे राम और मां सीता का पूजन अर्चन आज भी पूरे मनोयोग से होता है.

महंत लक्ष्मण दास का नाम है दर्ज

इस मंदिर के प्रांगण में प्रवेश करते ही यह अनुभूति होती है कि इसका जुड़ाव बेतिया से है. राम दरबार की झांकी वाला यह मंदिर काफी प्राचीन है और ऐसा माना जा रहा है कि 1600 ईसवी में जिस समय बेतिया में मंदिरों का निर्माण हो रहा था, लगभग उसी समय अयोध्या में भी इस मंदिर का निर्माण हुआ होगा. प्रवेश द्वार पर बेतिया मंदिर के साथ-साथ महंत लक्ष्मण दास का नाम भी लिखा है, लेकिन महंत जी के देहावासन के बाद इसे देखने वाला कोई नहीं है.

तारणहार की बांट जोह रहा बेतिया मंदिर

एक और जहां रामलाल की प्राण प्रतिष्ठा हो रही है और पूरी अयोध्या दुल्हन की तरह सजी है. वहीं बेतिया मंदिर आज भी तारणहार की बांट जोह रहा है. धार्मिक कार्यों में रूचि रखने वाले वाले बेतिया के प्रशांत सौरभ बताते हैं कि जब-जब अयोध्या में कुछ अप्रत्याशित घटना हुई बेतिया के लोगों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. निधि समर्पण अभियान के दौरान भी बेतिया ने पूरा सहयोग किया. आज भी अयोध्या से आई अभिमंत्रित अक्षत को घर-घर तक पहुंचाया जा रहा है. अयोध्या और बेतिया का संबंध एक बार फिर से हरा भरा हो रहा है.

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बेतिया राज के 56 मंदिरों का मिलता है उल्लेख

बेतिया के महाराज ने अपने जीवन काल में बहुत सारे धार्मिक स्थलों व मंदिरों की स्थापना करायी थी. फिलहाल बेतियाराज के 56 मंदिरों का उल्लेख मिलता है. इसमें से एक मंदिर प्रयागराज में भी स्थापित है. फिलहाल सभी मंदिरों में पूजन-अर्चन होती है. बेतियाराज के मंदिर जहां भी हैं, एक विशेष सौंदर्य उनके भीतर विद्यमान है. इन मंदिरों का प्रांगण पर्याप्त लंबा चौड़ा है. नागर शैली में ये सभी मंदिर बने हैं.

संपत्तियों को लेकर हो रही है सर्वे

बेतिया राज के व्यवस्थापक सह एडीएम पश्चिम चंपारण अखिलेश कुमार ने कहा कि बेतिया राज की परसंपित्तियों का सर्वेक्षण करने का निर्देश सरकार की ओर से जारी किया गया है. सभी अंचलाधिकारियों को इसका निर्देश दिया जा चुका है. उत्तर प्रदेश के अयोध्या में बेतिया मंदिर की जानकारी मिली है. सर्वेक्षण टीम इसका पता लगाएगी और आवश्यक कार्य कराये जाएंगे.

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