सड़क पर आगे वाली कार ने ब्रेक लगाया तो पहले ही मिल जाएगा अलर्ट, भारत में आ रही V2V टेक्नोलॉजी, जानें कब से लागू?
व्हीकल-टू-व्हीकल टेक्नोलॉजी (V2V)
देश में जल्द ही V2V (Vehicle-to-Vehicle) कम्युनिकेशन सिस्टम लागू होने जा रहा है. इसे ADAS का एडवांस वर्जन कहा जा सकता है, यह तकनीक कारों को आपस में जानकारी साझा करने में मदद करेगी जिससे वे संभावित खतरों के बारे में एक-दूसरे को पहले ही अलर्ट कर सकेंगी. इससे सड़क सुरक्षा में अभूतपूर्व सुधार की उम्मीद है.
सड़क पर आगे चल रही कार अगर अचानक ब्रेक लगा दे और आप टाइम पर रिएक्ट न कर पाएं, तो भविष्य में आपकी कार आपको खुद ही आपको अलर्ट कर देगी. इतना ही नहीं, आसपास चल रही दूसरी गाड़ियां अपनी स्पीड, लोकेशन, दिशा और ब्रेकिंग जैसी जानकारी एक-दूसरे के साथ शेयर कर सकेंगी. इससे ड्राइवर को ऐसे खतरे के बारे में भी चेतावनी मिल सकती है, जिसे वो नहीं देख पाता.
दरअसल, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने 3 अगस्त 2026 को Central Motor Vehicles Rules, 1989 में बदलाव का ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है. इसका उद्देश्य मोटर वाहनों में Vehicle-to-Vehicle यानी V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को चरणबद्ध तरीके से लागू करना है. सरकार ने इसके लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz फ्रीक्वेंसी बैंड पर आधारित C-V2X तकनीक और AIS-230 मानक को आधार बनाया है.
क्या है V2V टेक्नोलॉजी?
V2V का मतलब है Vehicle-to-Vehicle Communication यानी वाहनों का आपस में डिजिटल तरीके से जानकारी शेयर करना. इसमें सड़क पर एक-दूसरे के आसपास मौजूद V2V-सक्षम वाहन अपनी स्थिति से जुड़ी अहम जानकारी दूसरे वाहनों तक भेज सकते हैं.
MoRTH के अनुसार इसमें वाहन की स्पीड, पोजिशन, दिशा और एक्सेलेरेशन जैसी रियल-टाइम जानकारी शामिल हो सकती है. इसका फायदा यह है कि ड्राइवर को केवल अपनी कार के कैमरे, रडार या दूसरे सेंसर पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
भारत में प्रस्तावित AIS-230 मानक फैक्ट्री में लगाए जाने वाले On-Board Units के लिए तकनीकी, फंक्शनल, परफॉर्मेंस, पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी जरूरतें तय करता है. इसमें GNSS और पोजिशनिंग, रेडियो परफॉर्मेंस, रिसीवर सेंसिटिविटी, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कम्पैटिबिलिटी और साइबर सिक्योरिटी जैसी आवश्यकताएं भी शामिल हैं.
यानी आसान भाषा में समझें तो V2V में कार सिर्फ यह नहीं देखेगी कि उसके सामने क्या है, बल्कि आसपास की दूसरी V2V-सक्षम गाड़ियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर संभावित खतरे को पहले समझने की कोशिश करेगी.
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खतरों से एडवांस में मिलेगा अलर्ट
V2V का सबसे बड़ा फायदा उन परिस्थितियों में हो सकता है, जहां ड्राइवर को खतरा सीधे दिखाई नहीं देता. मान लीजिए हाईवे पर आपकी कार के आगे एक वाहन अचानक ब्रेक लगाता है. अगर बीच में कोई दूसरी कार या ट्रैफिक की वजह से आपको आगे की गाड़ी साफ दिखाई नहीं दे रही है, तब भी V2V सिस्टम आगे वाले वाहन की ब्रेकिंग की जानकारी आपकी कार तक पहुंचा सकता है.
इसके बाद कार ड्राइवर को Emergency Brake Alert दे सकती है. इसी तरह अगर सिस्टम को सामने मौजूद वाहन के साथ टक्कर का खतरा महसूस होता है तो Forward Collision Warning दी जा सकती है.
सरकार के प्रस्ताव में शुरुआती सुरक्षा उपयोग के मामलों में Emergency Brake Alert, Forward Collision Warning, Wrong-way Driving और Emergency Vehicle Alert को शामिल किया गया है.
उदाहरण के तौर पर अगर कोई वाहन गलत दिशा में आपकी तरफ आ रहा है, तो उसकी जानकारी आसपास के V2V-सक्षम वाहनों तक पहुंच सकती है. इसी तरह एंबुलेंस या दूसरे आपातकालीन वाहन के आने की जानकारी मिलने पर ड्राइवर को पहले से सतर्क किया जा सकता है.
ADAS से कितना अलग है V2V?
मौजूदा ADAS सिस्टम मुख्य रूप से कार के अपने कैमरा, रडार और अन्य सेंसर से आसपास की स्थिति को समझते हैं. V2V इसमें एक नया लेयर जोड़ता है, क्योंकि वाहन सीधे दूसरे वाहन से जानकारी प्राप्त कर सकता है.
यही वजह है कि V2V को ADAS का विकल्प नहीं, बल्कि उसका पूरक माना जा रहा है. खास बात यह है कि V2V ऐसे खतरे की जानकारी भी दे सकता है जो कार के सेंसर की सीधी लाइन ऑफ साइट में अभी मौजूद नहीं है.
क्या पुरानी कारों में भी V2V सिस्टम लगाया जा सकेगा
यह सवाल मौजूदा कार मालिकों के लिए सबसे अहम है. MoRTH के 3 अगस्त 2026 के ड्राफ्ट में V2V के लिए फैक्ट्री-इंस्टॉल्ड On-Board Units और AIS-230 मानक की बात कही गई है. प्रस्ताव के अनुसार 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद बनने वाले L, M और N कैटेगरी के ऐसे वाहनों पर AIS-230 अनुपालन लागू होगा, जिनमें V2V सिस्टम लगा है. वहीं 1 अक्टूबर 2028 या उसके बाद निर्मित इन कैटेगरी के वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है.
इसका मतलब यह है कि मौजूदा ड्राफ्ट का फोकस नई गाड़ियों में V2V को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने पर है. इसमें पुरानी कारों में V2V लगाने की कोई सामान्य अनिवार्यता नहीं बताई गई है.
भविष्य में अगर प्रमाणित रेट्रोफिट डिवाइस या आफ्टरमार्केट समाधान उपलब्ध होते हैं तो पुरानी कारों को इससे फायदा मिल सकता है, लेकिन मौजूदा सरकारी ड्राफ्ट के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर पुरानी कार में V2V आसानी से लगाया जा सकेगा.
इसके अलावा V2V की असली उपयोगिता के लिए सिर्फ आपकी कार में सिस्टम होना काफी नहीं होगा. आसपास चलने वाले दूसरे वाहनों में भी संगत V2V सिस्टम होना जरूरी होगा. यानी इसका फायदा धीरे-धीरे बढ़ेगा, जैसे-जैसे सड़कों पर V2V-सक्षम वाहनों की संख्या बढ़ेगी.
भारत के भीड़भाड़ वाले ट्रैफिक में V2V की सबसे बड़ी चुनौती क्या होगी
भारत में V2V की सबसे बड़ी चुनौती केवल टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि इकोसिस्टम तैयार करना होगी. दिल्ली, मुंबई, पटना, बेंगलुरु जैसे शहरों में एक ही सड़क पर कार, बाइक, ऑटो, बस, ट्रक और पैदल यात्री एक साथ चलते हैं.
ऐसे में V2V की उपयोगिता सबसे पहले उन वाहनों के बीच दिखाई देगी जो इस तकनीक से लैस होंगे. अगर सड़क पर मौजूद ज्यादातर वाहन अभी भी V2V सिस्टम से बाहर हैं, तो सिस्टम के पास शेयर करने के लिए सीमित जानकारी होगी.
दूसरी चुनौती साइबर सिक्योरिटी और कम्युनिकेशन की विश्वसनीयता है. सरकार के AIS-230 फ्रेमवर्क में साइबर सिक्योरिटी और कम्युनिकेशन सिक्योरिटी को भी प्रमुख आवश्यकताओं में शामिल किया गया है.
इसलिए V2V का सफल इस्तेमाल केवल कार कंपनियों पर निर्भर नहीं होगा. इसके लिए वाहन निर्माताओं, टेक्नोलॉजी कंपनियों, टेलीकॉम और सरकारी एजेंसियों के बीच एक समान और सुरक्षित सिस्टम की जरूरत होगी.
Bharat NCAP 2.0 और V2V से कार सेफ्टी का अगला दौर कितना बदलेगा
भारत में कार सेफ्टी का फोकस अब केवल दुर्घटना होने के बाद कार में बैठे लोगों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह रहा है. Bharat NCAP के मौजूदा ढांचे में Adult Occupant Protection, Child Occupant Protection और Safety Assist Technologies पर जोर है. वहीं Bharat NCAP 2.0 के प्रस्तावित ढांचे में सेफ्टी को और व्यापक बनाने की दिशा में बदलाव किए गए हैं.
प्रस्तावित Bharat NCAP 2.0 में सुरक्षा को पांच हिस्सों में देखने की बात सामने आई है- Safe Driving, Accident Avoidance, Crash Protection, Vulnerable Road User Protection और Post-Crash Safety. इसमें दुर्घटना से बचाव और सड़क पर पैदल यात्रियों जैसे Vulnerable Road Users की सुरक्षा को भी ज्यादा महत्व दिया गया है.
यहीं V2V की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है. Bharat NCAP 2.0 जहां कार की सुरक्षा क्षमता को टेस्ट करने पर ज्यादा जोर देता है, वहीं V2V जैसी तकनीक दुर्घटना होने से पहले संभावित खतरे की जानकारी देकर उसे टालने की कोशिश करती है.
यानी आने वाले समय में कार सेफ्टी का मतलब केवल मजबूत बॉडी, एयरबैग या क्रैश टेस्ट में बेहतर स्कोर नहीं होगा. कार कितनी जल्दी खतरे को पहचानती है और ड्राइवर को कितनी जल्दी चेतावनी देती है, यह भी सुरक्षा की दिशा में अहम हो सकता है.
कब से लागू होगा नया सिस्टम?
MoRTH के 3 अगस्त 2026 के ड्राफ्ट के मुताबिक 1 अक्टूबर 2027 से बने कुछ V2V-सक्षम वाहनों के लिए AIS-230 अनुपालन प्रस्तावित है. इसके बाद 1 अक्टूबर 2028 से L, M और N कैटेगरी के नए वाहनों में AIS-230 के अनुरूप V2V सिस्टम फिट करने का प्रस्ताव है. ड्राफ्ट पर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं, जिसके बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी.
इसका मतलब यह नहीं है कि 2028 से सड़क पर चलने वाली हर कार एक-दूसरे से बात करने लगेगी. इस तकनीक का असर धीरे-धीरे बढ़ेगा और यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कितने वाहन V2V से लैस होते हैं और पूरा कनेक्टेड ट्रैफिक सिस्टम कितनी तेजी से तैयार होता है.
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