Russia sanctions Bill: ट्रंप के नये कानून का किन देशों पर होगा असर, भारत-चीन पर कितना होगा असर?

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पीएम मोदी और शी जिनपिंग, फोटो ANI

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अमेरिका ने रूस और ईरान पर कड़े प्रतिबंधों वाले बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिससे रूस के तेल और गैस खरीदारों पर 100% तक टैरिफ का खतरा मंडरा रहा है। यह नया कानून भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों को कैसे प्रभावित करेगा, इसकी पूरी जानकारी पाएं।

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Russia sanctions Bill: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया है. नए कानून का एक अहम हिस्सा रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की राष्ट्रपति को शक्ति देता है. इसका सबसे बड़ा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो रूसी ऊर्जा के बड़े खरीदार हैं, खासकर चीन और भारत.

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रूस का सबसे बड़ा तेल खरीदार कौन?

रूसी कच्चे तेल की खरीद के मामले में चीन सबसे आगे है, जबकि भारत दूसरे नंबर पर है. Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, रूस के कुल कच्चे तेल निर्यात में चीन की हिस्सेदारी करीब 50 प्रतिशत रही. भारत करीब 37 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर रहा. तुर्किये करीब 5 प्रतिशत के साथ तीसरे नंबर पर रहा.

रूस से कच्चे तेल की आयात करने वाले प्रमुख देश

चीन - 50 प्रतिशत

भारत - 37 प्रतिशत

तुर्किये - 5 प्रतिशत

यूरोपीय संघ - 5 प्रतिशत

अब भारत और चीन पर क्या असर पड़ेगा?

नए अमेरिकी कानून के तहत राष्ट्रपति को ऐसे देशों के सामान पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार दिया गया है, जो रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के बड़े खरीदार हैं या रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं. हालांकि, कानून पर हस्ताक्षर होने का मतलब यह नहीं है कि भारत या चीन पर तत्काल 100 प्रतिशत टैरिफ लागू हो गया है. शुल्क लगाने का फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति के पास है.

30 दिन के भीतर लागू होगा कानून

यह कानून राष्ट्रपति ट्रंप के हस्ताक्षर के 30 दिन के भीतर लागू होगा. इसके तहत राष्ट्रपति को उन देशों से आयातित वस्तुओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाना होगा, जो कानून लागू होने से पहले के 12 महीनों के दौरान कुल मात्रा के हिसाब से रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े खरीदार रहे हों.

इस शर्त पर ट्रैरिफ में मिल सकती है राहत

किसी देश को गैस से संबंधित शुल्क से छूट मिल सकती है, बशर्ते संबंधित अवधि में उसने रूस से जितनी गैस खरीदी हो, वह रूस के कुल गैस निर्यात का 15 प्रतिशत से कम हो और उस देश ने रूसी गैस का आयात घटाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हों.

कानून में ईरान का भी जिक्र

नए कानून में रूस के अलावा ईरान से जुड़े मौजूदा प्रतिबंधों को भी आगे बढ़ाया गया है. इसके साथ ही रूस की ऊर्जा आय और प्रतिबंधों से बचने वाले नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है. कानून को ट्रंप के हस्ताक्षर के बाद लागू होने में 30 दिन का समय दिया गया है.

100% टैरिफ का मतलब क्या है?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है. 100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान संभावित अधिकतम शुल्क है, न कि भारत या चीन पर तत्काल लगाया गया 100 प्रतिशत शुल्क. कानून राष्ट्रपति को शुल्क लगाने का अधिकार देता है और इसके दायरे, दर तथा कुछ परिस्थितियों में छूट से जुड़े फैसले के लिए व्यापक विवेकाधिकार भी देता है.


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