पोलैंड बोला: आतंकी चाहे जहां छिपे हों, भारत को पीछा करने का हक, ऑपरेशन सिंदूर और 1971 की जंग में हमने साथ दिया

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पोलैंड के राजदूत पियोटर एंटोनी स्विताल्स्की (बाएं), ऑपरेशन सिंदूर के दौरान और बाद में पाकिस्तान की हालत (दाएं). फोटो- एक्स.

आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड ने भारत के साथ खुलकर खड़े होने का संदेश दिया है. पोलैंड के राजदूत ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत को उन्हें दुनिया में जहां भी तलाशना पड़े, उसका अधिकार है. पोलैंड खुद आतंकवाद का शिकार रहा है, इसलिए वह भारत की स्थिति को समझता है.

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आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड ने भारत के साथ खुलकर खड़े होने का संदेश दिया है. भारत में पोलैंड के राजदूत पियोटर एंटोनी स्विताल्स्की ने कहा कि आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए भारत को उन्हें दुनिया में जहां भी तलाशना पड़े, उसका अधिकार है. उन्होंने यह भी कहा कि पोलैंड खुद आतंकवाद का शिकार रहा है, इसलिए वह भारत की स्थिति को समझता है.

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‘आतंकवाद के मुद्दे पर हम भारत के साथ हैं’

नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान स्विताल्स्की ने आतंकवाद के सवाल पर पोलैंड का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा, 'आतंकवाद के सवाल पर हम आपके साथ हैं, क्योंकि हम खुद आतंकवाद के शिकार रहे हैं.' भारत में हुए गंभीर आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में अप्रैल 2025 में हुए आतंकवादी हमले को भी याद किया.

उन्होंने कहा, 'हम तुलना नहीं कर सकते, क्योंकि पिछले वर्षों में भारतीय लोगों पर हुए आतंकवादी हमले, जिनमें 2025 में कश्मीर में हुआ हमला भी शामिल है, बेहद भयावह थे. हालांकि, पोलैंड में इस तरह का कुछ भी नहीं हुआ.' उन्होंने आगे कहा, 'हम आतंकवादियों का जहां भी वे जाएं, पीछा करने के आपके अधिकार का समर्थन करते हैं, क्योंकि इस मुद्दे पर हमारी नीति बिल्कुल स्पष्ट है और हमने इसे खुले तौर पर कहा है.'

कश्मीर से जुड़ा अपना अनुभव भी बताया

पोलिश राजदूत ने आतंकवाद के मुद्दे को अपने व्यक्तिगत अनुभव से भी जोड़ा. उन्होंने बताया कि 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से ठीक पहले वह जम्मू-कश्मीर में थे. उन्होंने कहा, 'मैंने पिछले साल ईस्टर कश्मीर में बिताया था और आतंकवादी हमले से एक रात पहले श्रीनगर से निकल गया था. मुझे अगले दिन वहां जाना था. इसलिए यह मेरे लिए बहुत व्यक्तिगत है.'

पाकिस्तान का नाम लेकर पोलैंड को घसीटने पर हैरानी

स्विताल्स्की ने उन बयानों पर भी आश्चर्य जताया, जिनमें पाकिस्तान के संदर्भ में पोलैंड को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, 'जब मैं पोलैंड पर हमला करने के लिए पाकिस्तानी फैक्टर का इस्तेमाल करने वाले कुछ बयान सुनता हूं तो मुझे वास्तव में बहुत हैरानी होती है. मुझे कभी-कभी इसके पीछे किसी तरह का विदेशी एजेंडा नजर आता है.'

पाकिस्तान के साथ पोलैंड के संबंधों पर उन्होंने कहा कि वारसॉ के इस्लामाबाद के साथ राजनयिक संबंध हैं और कुछ आर्थिक हित भी हैं. हालांकि, पश्चिमी यूरोप के कई अन्य देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में पोलैंड से कहीं अधिक सक्रिय हैं.


किस बात पर भारत-पोलैंड में हुई थी अनबन

अक्टूबर 2025 में पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोरस्की पाकिस्तान के दौरे पर गए थे. इस दौरान जारी भारत-पाकिस्तान के संदर्भ वाले संयुक्त बयान में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा भी शामिल किया गया था. बयान के मुताबिक, पोलिश पक्ष ने यूक्रेन में जारी युद्ध की स्थिति से पाकिस्तान को अवगत कराया, जबकि पाकिस्तानी पक्ष ने जम्मू-कश्मीर विवाद पर अपना रुख सामने रखा. दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का सम्मान करते हुए सभी विवादों और संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान खोजने की जरूरत पर जोर दिया था. इस बयान पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

इसके करीब तीन महीने बाद, 19 जनवरी 2026 को रादोस्लाव सिकोरस्की भारत के दौरे पर पहुंचे. नई दिल्ली में उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की. दोनों नेताओं के बीच बातचीत में भारत ने पाकिस्तान के साथ पोलैंड के बढ़ते संपर्क को लेकर अपनी चिंताएं रखीं. उन्होंने क्षेत्र में आतंकवाद का मुद्दे के साथ-साथ रूसी तेल के आयात को लेकर भारत को निशाना बनाए जाने को भी चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने की नीति बताया था. 

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ऑपरेशन सिंदूर में पोलिश ड्रोन की चर्चा

राजदूत ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के दौरान पोलैंड में बने ड्रोन के इस्तेमाल की खबरों पर भी बात की. उन्होंने कहा, 'राष्ट्रपति ने उन रिपोर्टों का जिक्र किया था कि ऑपरेशन सिंदूर के शुरुआती दिनों और घंटों में पाकिस्तानी बुनियादी ढांचे के खिलाफ पोलिश ड्रोन इस्तेमाल किए गए थे. भारतीय और पाकिस्तानी स्रोतों से ऐसी रिपोर्टें आई थीं. उन्होंने कुछ पोलिश ड्रोन मार गिराए थे.'

स्विताल्स्की ने संभावना जताई कि इन ड्रोन का इस्तेमाल डिकॉय या प्रशिक्षण प्लेटफॉर्म के तौर पर किया गया होगा. साथ ही उन्होंने भारत और पाकिस्तान, दोनों के साथ पोलैंड के पुराने सैन्य संबंधों की जटिलता का भी उल्लेख किया.

पाकिस्तान की एयरफोर्स बनाने में पोलिश पायलटों की भूमिका

उन्होंने कहा, 'यह निर्विवाद है कि भारत के विभाजन के बाद पोलिश पायलटों ने पाकिस्तान की वायुसेना का निर्माण किया. उनके पास नौकरी नहीं थी और पाकिस्तान ने उन्हें नियुक्त किया.'

हालांकि, उन्होंने भारत के साथ पोलैंड के पुराने सैन्य सहयोग को भी रेखांकित किया. खास तौर पर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ने उस दौरान पोलिश टैंकों का इस्तेमाल किया था. यह एक मशहूर कहानी है.

बांग्लादेश की आजादी को जल्दी मान्यता देने वाले देशों में पोलैंड

स्विताल्स्की ने बताया कि पोलैंड उन शुरुआती देशों में शामिल था, जिन्होंने बांग्लादेश की स्वतंत्रता को मान्यता दी थी. उन्होंने कहा, 'पोलैंड दुनिया का तीसरा देश था जिसने बांग्लादेश की स्वतंत्रता को मान्यता दी. इसलिए साफ है कि हम आपके साथ थे.'

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अनन्त नारायण शुक्ल

लेखक के बारे में

By अनन्त नारायण शुक्ल

अनन्त नारायण शुक्ल प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट क्रिएटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में करीब दो वर्षों का अनुभव है. अनन्त राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मामलों, वैश्विक भू-राजनीति (ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स), रक्षा नीति, कूटनीति और विश्व राजनीति से जुड़े विषयों पर खबरें करते हैं. वे दुनिया भर में घट रही महत्वपूर्ण घटनाओं को गहरी रिसर्च और तथ्यमात्मक विश्लेषण के साथ पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं.

अनन्त मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, वैश्विक सुरक्षा, रक्षा रणनीतियों, विदेश नीति, भारत के पड़ोसी देशों से जुड़े घटनाक्रम और विश्व स्तर पर भारत की भूमिका जैसे विषयों को कवर करते हैं. इजरायल-ईरान संघर्ष, अमेरिका की विदेश नीति, परमाणु सुरक्षा, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात, नेपाल-चीन सीमा से जुड़े मुद्दे और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम पर उनकी विशेष पकड़ है. इसके अलावा वे अंतरराष्ट्रीय आपदाओं, विदेशों में बसे भारतीयों और वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव से जुड़ी खबरों पर भी नियमित रूप से लिखते हैं.

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अनन्त को राष्ट्रीय राजनीति की भी समझ है. उन्होंने झारखंड विधान सभा 2024, दिल्ली विधान सभा चुनाव 2025 चुनाव और देश के अन्य चुनावों को कवर किया है. चुनाव के काउंटिंग डे को कवर करने का भी उनके पास काफी अनुभव है.

अनन्त कभी-कभी नेशनल डेस्क भी संभालते हैं, जिसमें देश भर में जनता से जुड़े जरूरी सामाजिक मुद्दे, न्यायिक खबरों और अपराध की खबरों को भी कवर करते हैं. इसके अलावा उन्हें रोचक जानकारियों को क्यूरेट करने का भी शौक है. इसमें लाइफस्टाइल, ऐतिहासिक और पुरातात्विक जानकारी के साथ ही दुनिया भर के साम्राज्यों के बारे में खबरें करते हैं.

उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के रहने वाले अनन्त ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की है. उन्होंने 2024 में अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्रभात खबर में खेल पत्रकार के रूप में की थी, जहां उन्होंने करीब एक वर्ष तक क्रिकेट और अन्य खेलों से जुड़ी खबरों को कवर किया. बाद में अपनी रुचि और विशेषज्ञता के चलते उन्होंने अंतरराष्ट्रीय डेस्क का रुख किया और आज वैश्विक राजनीति व भू-राजनीति के प्रमुख विषयों पर लेखन कर रहे हैं.

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