Nepal Floods: तबाही के बाद भारत से बड़ी मदद चाहता है नेपाल, विदेशी सहायता ठुकराने पर दी सफाई

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बाढ़ के बाद त्रिशूली नदी के किनारे मौजूद, गाढ़े कीचड़ और मलबे से घिरी क्षतिग्रस्त इमारतें, फोटो- एएनआई

Nepal Floods: भीषण बाढ़ से सड़क-पुल और बुनियादी ढांचा तबाह होने के बाद नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज के लिए मदद मांगी है. साथ ही काठमांडू ने साफ किया है कि उसने विदेशी सहायता ठुकराई नहीं, बल्कि शुरुआती बचाव अभियान में अपने सुरक्षा बलों को प्राथमिकता दी थी.

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Nepal Floods: नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं. सैकड़ों लोगों की मौत और बड़े पैमाने पर सड़क-पुल तबाह होने के बीच नेपाल सरकार ने साफ किया है कि उसने विदेशी सहायता लेने से इनकार नहीं किया है. सरकार का कहना है कि शुरुआती बचाव अभियान में स्थानीय सुरक्षा बलों को प्राथमिकता दी गई, क्योंकि वे दुर्गम इलाकों और स्थानीय परिस्थितियों को बेहतर तरीके से जानते हैं. इस बीच नेपाल ने भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज के निर्माण में मदद मांगी है.

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विदेशी मदद से इनकार नहीं किया: नेपाल

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि सरकार ने मित्र देशों या अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहायता को अस्वीकार नहीं किया है. उन्होंने बताया कि राहत और बचाव अभियान की रणनीति तत्काल जरूरत, देश की उपलब्ध क्षमता और नेपाल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तय की गई है.

नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें स्थानीय इलाकों से अच्छी तरह परिचित हैं. इसी वजह से शुरुआती चरण में इन सुरक्षा बलों की अधिकतम तैनाती को प्राथमिकता दी गई- नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल

बाहरी टीमों की तैनाती को लेकर बताई वजह

विदेश मंत्री ने कहा कि दुर्गम और अपरिचित इलाकों में बाहरी बचाव टीमों को सीधे उतारने से समन्वय और तकनीकी प्रबंधन मुश्किल हो सकता है. ऐसी परिस्थितियों में खतरा भी बढ़ सकता है. इसी कारण सरकार ने पहले अपनी राष्ट्रीय क्षमता का ज्यादा इस्तेमाल करने का फैसला किया. हालांकि नेपाल ने स्पष्ट किया कि जहां विशेष तकनीकी विशेषज्ञता की जरूरत होगी, वहां अंतरराष्ट्रीय मदद लेने में कोई हिचक नहीं होगी.

भारत और चीन से मांगे 42 बेली ब्रिज

बाढ़ ने नेपाल के सड़क संपर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया है. 36 से ज्यादा पुल बहने की जानकारी सामने आई है. इसके बाद नेपाल सरकार ने भारत और चीन से 42 बेली पुल बनाने में सहायता मांगी है. बेली ब्रिज को कम समय में तैयार किया जा सकता है और इन्हें लगाने के लिए भारी मशीनरी की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम होती है. सरकार की कोशिश है कि बाढ़ से कटे इलाकों को जल्द से जल्द सड़क नेटवर्क से दोबारा जोड़ा जा सके.

बाढ़ से सैकड़ों लोगों की मौत

रसुवा और मध्य नेपाल के दूसरे इलाकों में बुधवार को आई अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार देश में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 626 हो गई है. बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ में कई बस्तियां प्रभावित हुई हैं. सड़कें, पुल और जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान पहुंचा है. राहत और बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है.

राहत सामग्री की भी तत्काल जरूरत

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों, निजी क्षेत्र, नागरिक संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं से राहत सामग्री उपलब्ध कराने की अपील की है. प्राधिकरण के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में भोजन, अस्थायी आश्रय और साफ-सफाई से जुड़े सामान की तत्काल जरूरत है. इच्छुक संस्थाओं से राहत और बचाव कार्यों के लिए खाद्य और गैर-खाद्य सामग्री देने को कहा गया है.

भारत ने भेजी राहत सामग्री

भारत पहले ही नेपाल में राहत और पुनर्वास कार्यों में मदद के लिए राहत सामग्री की दो खेप भेज चुका है. बाढ़ के बाद भारत समेत कई देशों ने नेपाल को बचाव और राहत अभियान में सहायता देने की पेशकश की है. नेपाल सरकार का कहना है कि जरूरत के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय मदद ली जाएगी और विशेष तकनीकी सहायता की आवश्यकता वाले इलाकों में मित्र देशों के साथ समन्वय किया जाएगा.

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