पाक सुप्रीम कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा सरकार को दिए हिंदू मंदिर की मरम्मत के आदेश

Published at :17 Apr 2015 3:36 PM (IST)
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पाक सुप्रीम कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा सरकार को दिए हिंदू मंदिर की मरम्मत के आदेश

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा सरकार को आदेश दिए हैं कि वह वर्ष 1997 में ‘‘क्षतिग्रस्त’’ और एक धार्मिक नेता द्वारा कब्जा किए गए हिंदू मंदिर का पुनर्निर्माण कराए. पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के संरक्षक सांसद डॉ रमेश कुमार वंकवानी ने हिंदू मंदिरों को लगातार पहुंचाए जा रहे नुकसान के मामले में अदालत से […]

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इस्लामाबाद: पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट ने खैबर पख्तूनख्वा सरकार को आदेश दिए हैं कि वह वर्ष 1997 में ‘‘क्षतिग्रस्त’’ और एक धार्मिक नेता द्वारा कब्जा किए गए हिंदू मंदिर का पुनर्निर्माण कराए. पाकिस्तान हिंदू काउंसिल के संरक्षक सांसद डॉ रमेश कुमार वंकवानी ने हिंदू मंदिरों को लगातार पहुंचाए जा रहे नुकसान के मामले में अदालत से हस्तक्षेप करने के लिए कहा था. इन मामलों में श्री परमहंस जी महाराज की खैबर पख्तूनख्वा के कराक जिले के टेरी गांव स्थित समाधि पर एक धार्मिक नेता द्वारा कब्जा कर लिया जाना भी शामिल है.

वंकवानी ने कहा कि प्रांतीय प्रमुख सचिव, पुलिस महानिरीक्षक और स्थानीय आयुक्त ने उन्हें बताया कि जिस नामी हिंदू व्यक्ति के नाम पर यह मंदिर बनाया गया था, उसने इस्लाम कबूल लिया था.डॉन न्यूज की खबर के अनुसार, अतिरिक्त महा अधिवक्ता वकार अहमद ने प्रमुख न्यायाधीश नसीर-उल-मुल्क की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की दो न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि इस मामले को शांति से निपटाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं.

अदालत ने दलीलें सुनने के बाद कल प्रांतीय सरकार को आदेश दिया कि वह कराक मंदिर का पुर्ननिर्माण और संरक्षण करे.रिपोर्ट में कहा गया कि वर्ष 1919 में टेरी गांव में जिस स्थान पर श्री परमहंस जी महाराज का निधन हुआ और जहां उनका अंतिम संस्कार किया गया, वहां एक हिंदू मंदिर बनाया गया था. उनके अनुयायी वर्ष 1997 तक वहां उन्हें श्रद्धांजलि देने आते थे. वर्ष 1997 में कुछ मुस्लिम चरमपंथियों ने इस मंदिर को क्षतिग्रस्त कर दिया.

इसमें कहा गया कि श्री परमहंस जी के अनुयायियों ने कथित तौर पर एक स्थानीय धार्मिक नेता द्वारा कब्जाए गए इस स्थान पर मंदिर बनाने की कोशिश की लेकिन उसने इन्हें यह निर्माण करने नहीं दिया.

तब सिंध के हिंदू बुजुर्गों ने मामले में हस्तक्षेप किया और उस धार्मिक नेता से वर्ष 1997 में बातचीत की और इस जमीन की कीमत के रुप में 3,75,000 रुपए का भुगतान भी किया. पैसा लेने के बाद भी वह व्यक्ति इस संपत्ति को खाली करने से मुकर गया.

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