बचाव ही है डेंगू का सफल इलाज

By Prabhat Khabar Digital Desk
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डॉ एसके मुंद्रा

एचओडी एवं सीनियर कंसल्टेंट ‘इंटरनल मेडिसिन’, सरोज सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, नयी दिल्ली

अमेरिकन इंस्टीट्यूटट ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज के वैज्ञानिकों के अनुसार, मलेरिया और डेंगू बुखार जैसे संक्रामक रोगों का वातावरण के कई कारकों और हाल के दिनों में जलवायु परिवर्तन के बीच गहरा रिश्ता है.

शोध के नतीजों से पता यह चला है कि जैसे-जैसे तापमान में वृद्धि होती है, वैसे ही उन जानवरों की संख्या, जो इन बीमारियों को इंसानों में संक्रमित करते हैं, बढ़ जाती है और अंतत: ये विशाल रेंज में फैल जाते हैं. जैसे ही ऐसी घटना होती है, ये बीमारियां उन क्षेत्रों में भी फैल जाती हैं, जहां इनका खतरा नहीं होता है.

मौसम परिवर्तन के कारण मच्छरों के काटने से होनीवाली बीमारियां, जैसे-मलेरिया, डेंगू व चिकनगुनिया आदि के मामलों में भारत भी पीछे नहीं रहा. भारत में बढ़ते तापमान, बारिश की प्रकृति में परिवर्तन, जैसे कभी हल्की, तो कभी भारी, मौसम-बेमौसम बरसात और आर्द्रता के कारण ये संक्रामक बीमारियां फैलती जा रही हैं.

अध्ययनों के मुताबिक, जहां एक ओर बारिश की तीव्रता मच्छरों के प्रजनन में सहायक होती है, वहीं दूसरी ओर आर्द्रता के साथ बढ़ते तापमान इसके पनपने में मददगार साबित होते हैं. इस तरह ये व्यस्क मच्छर का स्वरूप ले लेते हैं और फिर बीमारियां फैलाने की इनकी क्षमता कई गुना बढ़ जाती है.

कारण और प्रभाव

डेंगू संक्रामक बीमारी है, जो चार में से किसी एक प्रकार के डेंगू वायरस के सीरोटाइप के कारण होती है. यह मादा एडिस एजिप्टि मच्छर के काटने से फैलती है. आरंभिक लक्षण हैं- अचानक तेज बुखार, शरीर में रैशेज, तेज सिर दर्द, पीठ दर्द, आंख हिलाने में दर्द, मसूड़ों व नाक से खून बहना आदि.

जोड़ों में जबरदस्त दर्द होने के कारण डेंगू का एक नाम 'ब्रेक कोन फीवर' भी है. मिचली, उल्टी, भूख न लगना भी सामान्य लक्षण हैं. बुखार तो दस दिनों में ठीक हो जाता है, पर पूरी तरह ठीक होने में एक महीना लग सकता है. बड़े बच्चे व व्यस्कों को छोटे बच्चों के मुकाबले अधिक सताता है. कुछ मामलों में यह हेमोरेजिक फीवर का रूप लेता है. बच्चों, व्यस्कों में होनेवाला डेंगू हेमोरेजिक पांच फीसदी मामलों में जानलेवा होता है.

सामुदायिक जागरूकता भी जरूरी

शहरीकरण के बढ़ते प्रचलन और बदलती जीवनशैली के कारण हाल के वर्षों में ग्रामीण इलाकों व उपशहरी इलाकों में डेंगू के मामलों में वृद्धि हुई है. डेंगू के इलाज के लिए अभी तक कोई विशेष दवा ईजाद नहीं की जा सकी है. सिर्फ लक्षणों के आधार पर दवाइयां दी जाती हैं. इसलिए कुछ बातों पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है -

क्या करें, क्या न करें

घर के अंदर की सफाई के साथ आस-पास भी सफाई रखें. नमीयुक्त जगहों, जैसे-बेसिन, रसोईघर की नाली व बेसिन को साफ रखें.

डेंगू बुखार का अंदेशा होने पर जैसे तेज सिरदर्द व मांसपेशियों में दर्द होने पर पैरासिटमोल लें व तुरंत डॉक्टर से दिखाएं.

फूल के गमलों का पानी सप्ताह में एक बार जरूर बदलें. बर्तनों में पानी को ढक कर रखें. कूलर, फ्रिज साफ रखें.

बैरल व ड्रम में जमा हुए पानी को सप्ताह में एक बार बदल दें.

पानी की टंकी की साफ-सफाई करें. ढक्कन बंद रखें.

बेकार पड़ी चीजें जैसे-टायर, नारियल के छिलके, बोतल इत्यादि फेंक दें या नष्ट कर दें.

डेंगू के मच्छर दिन में ही काटते हैं, इसलिए नमीयुक्त जगहों पर न रहें. कीटनाशक प्रयोग करें.

घर या दफ्तरों में मच्छरों को पनपने न दिया जाये और मच्छरों के संपर्क में आने से खुद को बचाना चाहिए.

डेंगू के प्रभावी रोकथाम के लिए विभिन्न वर्गों के बीच आपसी तालमेल व सामुदायिक जागरूकता जरूरी है.

अगर किसी को डेंगू का अंदेशा हो, तो वह पैरासिटामोल की गोलियां ले सकता है, मगर एस्परिन लेने से बचना चाहिए.

ऐसे लोगों को आराम करना चाहिए. अधिक-से-अधिक तरल पदार्थ का सेवन करें तथा डॉक्टर से परामर्श लें.

सेल्फ केयर

जब तक बुखार कम न हो तब तक एक खुले व ठंडे कमरे में बिस्तर पर आराम करें. शरीर में दर्द व ज्वर को कम करने के लिए क्रोसिन (पैरासिटामोल) की गोली लें. ठंडे पानी की पट्टी करें. गुनगुने पानी से स्पॉन्ज या स्नान करें. डिहाइड्रेशन दूर करने के लिए अधिक तरह पदार्थ लें, जैसे- पानी, ओआरएस, सब्जियों, फलों का रस. बिना तेल का हल्का भोजन करें. कॉफी, चाय, साफ्ट ड्रिंक न पीएं. टीवी न देखें व ऐसा कोई काम न करें, जिससे दिमाग पर जोर पड़े.

घरेलू उपचार

डेंगू बुखार में अक्सर प्लेटलेट्स की संख्या कम होने लगती है. इससे पीड़ित मरीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है. डेंगू बुखार से ग्रसित व्यक्ति के यदि प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं, तो पपीते के पत्ते ब्लड प्लेटलेट्स काउंट में सुधार करने में मदद कर सकते हैं. इसके लिए आप एक कप पपीते का ताजा पत्ता लीजिए. इसे पीस कर जूस निकालें और मरीज को पिलाएं. इसमें शहद या फिर फलों का जूस मिला सकते हैं. इससे स्वाद बदल जाता है.

गिलोय, एलोवेरा और अनार का जूस भी प्लेटलेट्स काउंट बढ़ाने में सहायक हैं. हर चार घंटे या दिन में 3-4 बार इन चारों के 50-50 ग्राम जूस पीने से डेंगू में लाभ पहुंचता है.

डेंगू की स्थिति को जानिए

शरीर में एक मिलीलीटर खून में 30-40 हजार प्लेटलेट्स होते हैं. इतने प्लेटलेट रोज मरते हैं और बनते भी रहते हैं. डेंगू में शरीर का काम आंशिक रूप से बंद हो जाता है, जिसके कारण प्लेटलेट बनने की गति धीमी हो जाती है. ऐसे में डॉक्टर मरीज के शरीर में पानी की सप्लाई बनाये रखते हैं और ब्लड प्रेशर देखते हैं. लक्षणों के आधार पर दवाइयां देते हैं. कोशिश होती है कि शरीर में इम्यूनिटी बढ़े और मरीज जल्द ठीक हो जाये.

बिहार

बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार अक्तूबर, 2019 तक राज्य में 44 हजार लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, जबकि 23 लोगों की मौत हुई है.

पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पिछले हफ्ते जानकारी दी कि राज्य में डेंगू से पीड़ित मरीजों की संख्या 44852 हो चुकी है और 27 लोगों की जान गयी है.

झारखंड

आइडीएसपी, झारखंड के 11 नवंबर तक की रिपोर्ट के मुताबिक राज्यभर में डेंगू के संदिग्ध 2402 लोगों की जांच में 701 पॉजिटिव मिले, जबकि एक भी मौत की पुष्टि नहीं हुई है.

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