दक्षा वैदकर
एक पहलवान जैसा हट्टा-कट्टा, लंबा-चौड़ा व्यक्ति सामान लेकर किसी शहर के स्टेशन पर उतरा. उसने एक टैक्सी वाले से कहा कि मुझे शिवजी के मंदिर जाना है, जो इस शहर में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. टैक्सी वाले ने कहा- 200 रुपये लगेंगे. उस पहलवान आदमी ने पहले तो उसे मनाया, लेकिन जब वह नहीं माना, तो अपनी बुद्धिमानी दिखाते हुए कहा- इतने पास में है मंदिर. मुझे उल्लू समझते हो? इतनी-सी दूर जाने के दो सौ रुपये कोई लेता है भला? आप टैक्सी वाले लोग तो लूट रहे हो आजकल. रहने दो, मैं अपना सामान खुद ही उठा कर चला जाऊंगा. इतना कह कर वह चल दिया. वह व्यक्ति काफी दूर तक सामान लेकर चलता रहा. वह बहुत थक भी गया था. कुछ देर बाद फिर से उसे वही टैक्सी वाला दिखा, अब उस आदमी ने फिर टैक्सी वाले से पूछा- भैया, अब तो मैंने आधा से ज्यादा दूरी तय कर ली है, तो अब आप कितना रुपये लेंगे?
टैक्सी वाले ने जवाब दिया- 400 रुपये. उस आदमी ने फिर कहा- पहले दो सौ रुपये, अब चार सौ रुपये, ऐसा क्यों? टैक्सी वाले ने जवाब दिया- महोदय, इतनी देर से आप शिव मंदिर की विपरीत दिशा में दौड़ लगा रहे हैं, जबकि शिव मंदिर तो दूसरी तरफ है. उस पहलवान व्यक्ति ने कुछ भी नहीं कहा और चुपचाप टैक्सी में बैठ गया.
इस पहलवान की तरह ही जिंदगी में कई बार हम किसी चीज को बिना गंभीरता से सोचे सीधे काम शुरू कर देते हैं और फिर अपनी मेहनत और समय को बरबाद कर उस काम को आधा ही करके छोड़ देते हैं. इसलिए बेहतर है कि किसी भी काम को हाथ में लेने से पहले हम पूरी तरह सोच विचार लें कि हम जो कर रहे हैं, वह हमारे लक्ष्य का हिस्सा है या नहीं? हमेशा एक बात याद रखें कि दिशा सही होने पर ही मेहनत पूरी रंग लाती है और यदि दिशा ही गलत हो, तो आप कितनी भी मेहनत कर लो, कोई लाभ नहीं मिल पायेगा. इसलिए दिशा तय करें और आगे बढ़ें. कामयाबी आपके हाथ जरूर थामेगी.
daksha.vaidkar@prabhatkhabar.in
बात पते की..
छात्र अकसर दोस्तों की देखा-देखी कोई भी सब्जेक्ट चुन लेते हैं और बाद में जब वह समझ नहीं आता, तो रोते हैं. इसलिए पहले सोचें.
कोई भी काम तुरंत शुरू न करें. पहले सोचें कि यह किस तरह होगा? कदम उठाने के पहले उसके सही-गलत की अच्छी तरह जांच करें.
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