पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने मंत्रियों को डिजिटल वर्ल्ड से शिक्षित करने का कटाक्ष किए जाने के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी ने आज आरोप लगाया कि नीतीश ने पाकिस्तान के कराची के अखबार डॉन में 20 से 31 अक्तूबर के बीच गूगल पर एड दिये जाने के पीछे मंशा बिहार विधानसभा चुनाव में मतदाताओं को रिझाने की थी.
यहां आज पत्रकारों को संबोधित करते हुए रूडी ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार की जनसंपर्क एजेंसी और मीडिया प्रबंधक के जरिए पाकिस्तान में कराची से प्रकाशित डॉन अखबार में विज्ञापन छपवाकर नीतीश ने बिहार की जनता से एक बडा छलावा किया है. पूरी तरह से स्पष्ट है कि अल्पसंख्यकों के मतों को रिझाने के लिए वे किसी स्तर तक गिर सकते हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि गूगल के वेबसाइट पर जा कर कोई भी साधारण आदमी जो इंटरनेट का ज्ञान रखता है. प्रमाणिकता के साथ कह सकता है कि नीतीश कुमार ने करोड़ों खर्च कर 20 अक्तूबर से 31 अक्तूबर तक 24 घंटे विज्ञापन दिये. रुड़ी ने कहा कि उन तीन विज्ञापन में छात्रों को स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड और 04 लाख का सब्सिडाइज्ड ऋण, विकसित बिहार के लिए नीतीश का निश्चय विकास की गारंटी तथा झांसे में न आयेंगे नीतीश को जीतोंगे शामिल थे.
उन्होंने आरोप लगाया कि इस विज्ञापन के लिए गूगल को करोड़ों रुपये दिए गए और चुनाव आयोग से भी इस खर्च को छिपा करके रखा गया. रुड़ी ने कहा कि उक्त अखबार को आमतौर पर किस तबके के और कौन लोग पढते हैं यह सर्वविदित है. उन्होंने आरोप लगाया कि गत 31 अक्तूबर की शाम 5 बजे जब इस विषय का एक ट्वीट भेजा गया तो ठीक उसके एक घंटे के भीतर 15 दिनों से प्रकाशित किए जा रहे उक्त विज्ञापन अफरा-तफरी में ब्लाक कर दिये गये. यदि मंशा साफ थी तो तो अचानक उसे क्यों हटा लिया गया.
रूडी ने कहा कि नीतीश पर हार के डर से इस स्तर पर उतर जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसके लिए उन्हें प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए.