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दक्षिण कोरिया में नरेंद्र मोदी ने कहा, एशिया के दो चेहरे नहीं होने चाहिए

Updated at : 19 May 2015 11:25 AM (IST)
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दक्षिण कोरिया में नरेंद्र मोदी ने कहा, एशिया के दो चेहरे नहीं होने चाहिए

सोल : अपसी प्रतिद्वन्द्विता के कारण एशिया के पिछडने की चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि क्षेत्र के लोगों को मिलकर आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना चाहिए और इसमें भारत अपनी जिम्मेदारी निभायेगा. दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एशियाई नेतृत्व मंच को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘अगर एशिया […]

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सोल : अपसी प्रतिद्वन्द्विता के कारण एशिया के पिछडने की चेतावनी देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि क्षेत्र के लोगों को मिलकर आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटना चाहिए और इसमें भारत अपनी जिम्मेदारी निभायेगा. दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में एशियाई नेतृत्व मंच को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘अगर एशिया को एक होकर आगे बढना है तब एशिया को केवल अपने या क्षेत्रीय धडे के बारे में नहीं सोचना चाहिए. एशिया में प्रतिद्वन्द्विता हमें पीछे ले जायेगी। एशिया में एकजुटता दुनिया को आकार प्रदान करेगी.’’ प्रधानमंत्री ने समृद्धि और समावेशी विकास के लिए क्षेत्रीय देशों के बीच सामूहिक प्रयासों की पुरजोर वकालत की.

मोदी ने कहा कि आतंकवाद, देशों के बीच आपराध, प्राकृतिक आपदा और बीमारी जैसी साझा चुनौतियों के खिलाफ लडाई क्षेत्र के देशों का साझा कार्य है. उन्होंने कहा, ‘‘ एशिया के दो चेहरे नहीं होने चाहिए जहां एक ओर उम्मीद एवं समृद्धि हो और दूसरी ओर जरुरत और निराशा हो.’’ चीन और मंगोलिया के बाद दक्षिण कोरिया की यात्र पर आए मोदी ने कहा, ‘‘ यह ऐसे देशों का महाद्वीप नहीं होना चाहिए जहां कुछ राष्ट्र आगे बढे रहे हो और अन्य नीचे जा रहे हो. यह ऐसा नहीं होना चाहिए जहां कुछ क्षेत्रों में स्थिरता हो और अन्य टूटी संस्थाएं हो.’’ अशांत क्षेत्रों और दूसरे हिस्सों पर उसके पडने वाले प्रभाव का एक तरह से जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ आज पश्चिम एशिया में जो हो रहा है, उसका पूर्वी एशिया पर गहरा प्रभाव पड रहा है.’’

मोदी ने कहा, ‘‘ और महासागरों में क्या होता है, वह एशियाई भूमि को प्रभावित करेगा। हमें एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए.’’ प्रधानमंत्री ने आज जिस मंच को संबोधित किया उसमें दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क गुन-हे और संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून ने भी हिस्सा लिया. मोदी ने कहा कि भारत एशिया के चौराहे पर स्थित है और वह एक दूसरे से जुडे एशिया के निर्माण में अपनी जिम्मेदारी निभायेगा. उन्होंने कहा, ‘‘गतिशील लेकिन अनिश्चितताओं से भरे एशिया को अपना रास्ता खुद बनाने की पहल करनी चाहिए। लेकिन एशिया को अपनी बढती ताकत के साथ दुनिया की बडी जिम्मेदारी भी उठानी होगी.’’ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए भारत के दावे की पुरजोर वकालत की पृष्ठभूमि में मोदी ने कहा, ‘‘ एशियाइयों के रुप में हमें संयुक्त राष्ट्र और उसकी सुरक्षा परिषद समेत वैश्विक संस्थाओं के प्रशासन में सुधार के बारे में काम करना चाहिए.’’

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता के बारे में कभी कोई संदेह नहीं था. उन्होंने कहा, ‘‘पिछले वर्ष के दौरान हम वादों को वास्तविकता और उम्मीदों को विश्वास में बदल रहे हैं.’’ उन्होंने कहा कि भारत की विकास प्रतिवर्ष 7.5 प्रतिशत की दर पर लौट आयी है और इसके और बेहतर होने की संभावना है. मोदी ने कहा, ‘‘ दुनिया एक स्वर में कह रही है कि भारत हमारे क्षेत्र और दुनिया की उम्मीदों का नया प्रकाशपुंज है.’’ उन्होंने कहा कि भारत का विकास एशिया की सफलता की कहानी होगी और एशिया के बारे में हमारे सपनों को और भी बडी वास्तविकता बनायेगी.

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