कश्मीर में पर्यटकों के लौटने की ज़मीनी हक़ीक़त

Updated at : 31 Oct 2019 1:31 PM (IST)
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कश्मीर में पर्यटकों के लौटने की ज़मीनी हक़ीक़त

<figure> <img alt="गुलमर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/4A4F/production/_109432091_gettyimages-1155891050.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>भारत प्रशासित कश्मीर के विश्वप्रसिद्ध गुलमर्ग टूरिस्ट रिज़ॉर्ट में अब इक्का-दुक्का पर्यटक दिखने लगे हैं.</p><p>बाज़ार आंशिक रूप से बंद है लेकिन पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में पहले की तरह पर्यटकों का आगमन शुरू होगा और उनका व्यवसाय चल […]

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<figure> <img alt="गुलमर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/4A4F/production/_109432091_gettyimages-1155891050.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><p>भारत प्रशासित कश्मीर के विश्वप्रसिद्ध गुलमर्ग टूरिस्ट रिज़ॉर्ट में अब इक्का-दुक्का पर्यटक दिखने लगे हैं.</p><p>बाज़ार आंशिक रूप से बंद है लेकिन पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में पहले की तरह पर्यटकों का आगमन शुरू होगा और उनका व्यवसाय चल पड़ेगा.</p><p>कुछ सैलानी ज़रूर पहुंचे हैं लेकिन इतने नहीं कि गुलमर्ग रिज़ॉर्ट की सड़क की वीरानी दूर हो सके.</p><p>चंद टूरिस्ट ज़रूर आते हैं और कुछ समय बिताकर लौट जाते हैं. </p><p>कोलकाता से आईं कोइनी घोष बीते गुरुवार को ही अपने परिजनों के साथ यहां पहुंची थीं. घोष परिवार ने छह महीने पहले कश्मीर यात्रा की योजना बना ली थी.</p><p>वो कहती हैं कि कश्मीर के बारे में सुनी बुरी बातें यहां पहुंचने पर ग़लत साबित हुईं.</p><p>उन्होंने कहा, &quot;सुना था कि यहां लोगों को सीधे गोली मार दी जाती है और टॉर्चर किया जाता है. लेकिन यहां सब कुछ अलग है. कश्मीर के लोग हमें प्यार करते हैं. वे मददगार हैं. हम पहलगाम में थे और स्थानीय लोगों के स्वागत को देखकर ताज्जुब हुआ. ये वाक़ई बहुत गर्मजोशी वाला था. उन्होंने हर वक़्त हमें सुझाव दिए और हमारी मदद की. स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते ढाई महीने में यहां पहुंचने वाले हम पहले पर्यटक हैं. हमारी यात्रा का पहला पड़ाव पहलगाम ही था. वहां कोई भी पर्यटक नहीं था.&quot;</p><p>कश्मीर पहुंचने पर कोइनी घोष का इंटरनेट से संपर्क टूट गया और अपने जन्मदिन पर वह दोस्तों-रिश्तेदारों की बधाइयां नहीं ले सकीं. वो कहती हैं, &quot;इसके बावजूद बिना इंटरनेट के कुछ दिन गुज़ारना बढ़िया रहा.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49994897?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कश्मीर अब सैलानियों के लिए कितना तैयार </a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49220346?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">जम्मू-कश्मीर में क्या है ताज़ा हाल तस्वीरों में देखिए</a></li> </ul><figure> <img alt="गुलमर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/BF7F/production/_109432094_gettyimages-1155889272.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>कश्मीर के बारे में धारणा बदल गई</h1><p>कोलकाता से आए एक अन्य पर्यटक सौरव घोष गुलमर्ग की सुंदरता और यहां हॉर्स राइडिंग से उत्साहित दिखे.</p><p>उन्होंने कहा कि कश्मीरियों को लेकर उनकी राय भी बदली है. उनके मुताबिक, &quot;कश्मीर को लेकर हमारे अंदर एक नकारात्मक अहसास था. हम सोचते थे कि वे हमारे दुश्मन हैं. लेकिन ये सच नहीं है. कश्मीरी प्यारे लोग हैं. यहां के लोगों के व्यवहार को देखकर मेरे दिल को संतोष हुआ.&quot;</p><p>हालांकि इंटरनेट न होने से उन्हें कुछ मुश्किलें ज़रूर हुईं. उन्होंने कहा, &quot;यहां केवल पोस्ट पेड मोबाइल काम करते हैं. हम अपने रिश्तेदारों से बात नहीं कर पा रहे हैं. हमने कुछ अच्छी तस्वीरें ली हैं जो हम उन्हें नहीं भेज सके. कोलकाता में रिश्तेदारों ने तस्वीरें भेजने को कहा था लेकिन हम ऐसा नहीं कर पा रहे.&quot;</p><p>वो कहते हैं, &quot;दूसरी सबसे बड़ी समस्या ये है कि यहां बाज़ार बंद हैं. केवल सुबह और शाम को दुकानें खुलती हैं. जब हम श्रीनगर पहुंचे तो वहां दुकानें बंद थीं और हम कुछ भी ख़रीदारी नहीं कर पाए.&quot;</p><h1>पर्यटकों के लिए हटाई जा चुकी है चेतावनी</h1><p>सरकार ने 10 अक्तूबर 2019 को पर्यटकों के लिए यात्रा संबंधी चेतावनी हटा दी थी.</p><p>अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने से पहले सरकार ने सभी पर्यटकों और अमरनाथ यात्रियों के लिए तत्काल कश्मीर छोड़ने की सलाह जारी की थी. </p><p>इसके साथ ही भारत सरकार ने कश्मीर में हज़ारों की संख्या में अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजे जिससे यहां आम लोगों में बेचैनी बढ़ गई थी. </p><p>बीते पांच अगस्त को सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया जिसके बाद यहां हालात तनावपूर्ण हो गए.</p><p>कुछ समय तक कश्मीर में संचार माध्यम ठप रहे. अब टेलीफोन सेवाएं बहाल हो गई हैं लेकिन इंटरनेट अब भी बंद है. हालांकि कुछ जगहों पर पत्रकारों के लिए इंटरनेट का सरकारी इंतज़ाम किया गया है. साथ ही स्कूल कॉलेजों की पढ़ाई और कारोबार अब भी प्रभावित हैं. </p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/entertainment-49303282?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कश्मीर में रुकी बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/india-49690347?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">कश्मीर अब विकास के हाईवे पर या मुश्किलों की पगडंडी पर चलेगा? </a></li> </ul><figure> <img alt="गुलमर्ग" src="https://c.files.bbci.co.uk/10D9F/production/_109432096_gettyimages-1155889614.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>संचार लाइनें खुलीं</h1><p>कुछ दिन पहले ही लैंड लाइन और पोस्ट पेड मोबाइल सेवाएं बहाल कर दी गईं. लेकिन इंटरनेट और प्री-पेड मोबाइल सेवाएं अभी भी बंद हैं. </p><p>भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को रद्द करने के साथ ही राज्य का विभाजन कर दिया और उनकी जगह जम्मू कश्मीर को केंद्र शासित राज्य और लद्दाख क्षेत्र को अलग केंद्र शासित राज्य बना दिया.</p><p>इससे पहले ये तीनों इलाक़े एक राज्य हुआ करते थे. इनमें से कश्मीर मुस्लिम बहुल और लद्दाख बौद्ध बहुल इलाक़ा है.</p><p>सरकार के इस क़दम से राज्य का पर्यटन व्यवसाय सबसे अधिक प्रभावित हुआ. </p><p>ये व्यवसाय कश्मीर की अर्थव्यवस्था में 15 से 20 प्रतिशत का योगदान करता है. </p><p>एक स्थानीय कारोबारी अब्दुल मजीद ने छह दिन पहले ही फिर से अपना धंधा शुरू किया है. लेकिन पर्यटकों के न आने से आजीविका के लिए उन्हें ख़ासा संघर्ष करना पड़ रहा है. </p><p>वो कहते हैं, &quot;एक दिन में हम 50 से 100 रुपये ही कमा पा रहे हैं. पर्यटक नहीं आ रहे. गुलमर्ग में भी चंद पर्यटक ही दिख रहे हैं. औसतन हर दिन यहां 20 से 50 पर्यटक आ रहे हैं और घर चलाने के लिए यह पर्याप्त नहीं है. हमें घोड़ों को खिलाना पड़ता है. अब सर्दियां शुरू हो गई हैं और क़रीब 50 हज़ार रुपये इनके रखरखाव पर ही खर्च हो जाएगा. 5 अगस्त से पहले हम रोज़ाना 700 से 1000 रुपये कमा लेते थे. सरकार ने जब एडवाइज़री हटाई तो कुछ ही सही, पर्यटक आने शुरू हुए हैं.&quot;</p> <ul> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/international-41223615?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">’हर कश्मीरी का चेहरा मुस्कुराता देखना चाहता हूं'</a></li> <li><a href="https://www.bbc.com/hindi/entertainment-41540816?xtor=AL-73-%5Bpartner%5D-%5Bprabhatkhabar.com%5D-%5Blink%5D-%5Bhindi%5D-%5Bbizdev%5D-%5Bisapi%5D">’कश्मीर गया तब जहन्नुम होने का यकीन आया'</a></li> </ul><figure> <img alt="कश्मीर" src="https://c.files.bbci.co.uk/139D7/production/_109434308_497eab73-52f6-4ce7-8969-88dd626ae9a3.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>चार साल में बदल गया कश्मीर</h1><p>मुंबई से आए एक अन्य पर्यटक सोआना ने चार महीने पहले अपना टिकट बुक कराया था लेकिन उनके मन में डर था और कश्मीरियों के भीतर ग़ुस्से का अहसास भी था.</p><p>वो कहती हैं कि जब चार साल पहले वो यहां आई थीं तो यहां का माहौल कुछ और ही था. </p><p>वो कहते हैं, &quot;आज कश्मीर बिल्कुल बदला बदला लग रहा है. चार साल पहले हम बेधड़क कहीं भी जा सकते थे. लेकिन जब से हम श्रीनगर पहुंचे हैं ये बिल्कुल बदल सा गया लगता है. स्थानीय कश्मीरी लोग डरे हुए हैं और ग़ुस्से में भी हैं. हम इस ग़ुस्से को महसूस कर सकते हैं. हालांकि स्थानीय लोग हमें सहज करने की कोशिश कर रहे हैं.&quot;</p><p>पश्चिम बंगाल के रहने वाले अब्दुल सत्तार छह महीने पहले कराई बुकिंग को रद्द कराने वाले थे लेकिन जब सरकार ने ट्रैवल एडवाइज़री वापस ली तो उन्होंने पत्नी के साथ यहां आने का फैसला किया. </p><p>वो कहते हैं, &quot;अभी तक सब कुछ ठीक है. हमें केवल एक ही समस्या है कि हम तीन दिन से दोपहर का भोजन नहीं ले पा रहे क्योंकि जहां भी गए होटल बंद पड़े थे. हम शाकाहारी हैं. शटडाउन की वजह से हमें समस्या आ रही है.&quot;</p><p>गुलमर्ग स्थित होटल वेलकम को पांच अगस्त के बाद से कोई कोई बुकिंग नहीं मिली है.</p><p>होटल मैनेजर शाहनवाज़ अहमत ने बताया, &quot;हमारे होटल में एक भी टूरिस्ट नहीं आया. आज गुलमर्ग में कुछ पर्यटक आए हैं. हमें उम्मीद है कि जल्द ही हालात सुधरेंगे. हम पर्यटकों का इंतज़ार कर रहे हैं, अगर वे आते हैं तो बहुत लोगों की आजीविका चलेगी. ये सच है कि सरकार के ताज़ा क़दम के बावजूद लोग अच्छी संख्या में नहीं आ रहे हैं.&quot;</p><p>मुंबई से आईं अशराता ने बीबीसी से कहा कि सड़कों पर उन्हें केवल सेना के जवान ही दिखे, &quot;मैं अपने दोस्तों को सलाह दूंगी कि वो फिलहाल कश्मीर न आएं, जब तक सब कुछ सामान्य नहीं हो जाता.&quot;</p><p>सरकार ने अभी एक हफ़्ते पहले ही गुलमर्ग तक गोंडोला राइड (केबल कार) को फिर से शुरू करने की इजाज़त दी है. </p><figure> <img alt="कश्मीर" src="https://c.files.bbci.co.uk/053F/production/_109434310_14ed3c11-8588-4c34-85d0-062bccfdd889.jpg" height="549" width="976" /> <footer>Getty Images</footer> </figure><h1>हालात सुधरने की उम्मीद</h1><p>एक अधिकारी ने बताया कि यहां आ रहे लोगों की संख्या कम है लेकिन अब वे धीरे धीरे आने शुरू हो गए हैं. </p><p>गुमर्ग गैंडोला के मैनेजिंग डायरेक्टर शमीम अहमद कहते हैं, &quot;जब ये खुला तो पहले दिन 10 पर्यटक आए. ये संख्या बहुत कम है लेकिन जल्द ही हालात सुधरेंगे. लेकिन दूसरी तरफ़ पर्यटन का मौसम भी ख़त्म हो गया है. दीपावली के मौसम में पर्यटक आते हैं. पांच अगस्त के पहले हमें दस से 15 लाख रुपये की आमदनी होती थी. अभी तक हमने फ़ेज-1 को शुरू किया है. जनवरी से अगस्त 2019 के बीच हमें 21 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी.&quot;</p><p>सरकार ने कहा है कि पर्यटन व्यवसाय को पटरी पर लाने के लिए वो कुछ उपाय करेगी. </p><p>टूरिज़्म कश्मीर के डायरेक्टर निसार अहमद वानी ने बीबीसी को बताया कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए उनका विभाग कई कार्यक्रम शुरू करेगा. </p><p>उन्होंने कहा, &quot;कश्मीर में अशांति के चलते सरकार ने अच्छी मंशा से सलाह जारी की थी. सरकार को अब लग रहा है कि कश्मीर में हालात सुधर रहे हैं और इसीलिए उसने यात्रा से संबंधित सलाह हटा लिया है. हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक पर्यटकों को आकर्षित किया जाए. हम इसके लिए हम अलग अलग राज्यों में रोड शो करेंगे जैसा पहले करते थे. हम ये विदेश में भी करेंगे. हालांकि अभी भी कश्मीर में कुछ अच्छे हालात नहीं हैं. लेकिन समय के साथ हालात बदलेंगे और पर्यटक आएंगे.&quot;</p><p>पर्यटन विभाग के एक अन्य शीर्ष अधिकारी ने कहा कि वो योजनाएं बनाने में लगे हुए हैं और आने वाले दिनों में वो पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद करते हैं. </p><p><strong>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप </strong><a 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