मुठभेड़ में मारे गये नक्सलियों के शव को परिजन को सौंपा

Updated at : 18 Apr 2019 6:53 AM (IST)
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मुठभेड़ में मारे गये नक्सलियों के शव को परिजन को सौंपा

सरौन : बीते 15 अप्रैल सोमवार सुबह भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के बुनियाथर जंगल में पुलिस और नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे गए तीनों नक्सलियों के शव को झारखंड पुलिस के द्वारा बुधवार को परिजनों को सुपूर्द कर दिया गया. मुठभेड़ में मारा गया तीनों की शिनाख्त चकाई थाना क्षेत्र के पोझा पंचायत के बेहरा निवासी […]

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सरौन : बीते 15 अप्रैल सोमवार सुबह भेलवाघाटी थाना क्षेत्र के बुनियाथर जंगल में पुलिस और नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे गए तीनों नक्सलियों के शव को झारखंड पुलिस के द्वारा बुधवार को परिजनों को सुपूर्द कर दिया गया.

मुठभेड़ में मारा गया तीनों की शिनाख्त चकाई थाना क्षेत्र के पोझा पंचायत के बेहरा निवासी मानिकचंद मुर्मू, बरखुटीया निवासी प्रभात हांसदा और सोनो चरकापत्थर थाना क्षेत्र के तेतरिया गांव निवासी विजय मरांडी उर्फ संजय के रूप में किया गया.
इस बाबत अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मृतक मानिकचंद का भाई चकाई भाग एक के जिला परिषद सदस्य रामलखन मुर्मू ने बताया कि शव को जिस तरह से सदर अस्पताल में रखा गया था. इसे अमानवीय व्यवहार ही कहा जा सकता है. शव को बिना बर्फ के रखा गया था, गर्मी काफी रहने के कारण शव सड़ गया था.
उन्होंने फर्जी मुठभेड़ कर पुलिस द्वारा भाई को मारने का आरोप लगाया हुए कहा कि मामले को लेकर वे मानवाधिकार आयोग का भी दरवाजा खटखटायेंगे. बेटे का शव लेने पहुंचे पुरन हांसदा ने बताया कि प्रभात घर से बोल कर निकला था कि वह आदिवासी आर्केट्रा देखने बरजोडीह गया था. किसके साथ गया था इस बारे में बताने में उन्होंने असमर्थता जाहिर की.
जांच में प्रभात का आधार कार्ड निकला फर्जी . शव को जिस वक्त परिजनों को सुपूर्द किया जा रहा था. उस समय खोरीमहुआ एसडीपीओ राजीव कुमार, नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो तथा भेलवाघाटी थाना प्रभारी एमजे खान एवं सीआरपीएफ के अजय कुमार कमांडेंट सदलबल उपस्थित थे. इस मौके पर गिरिडीह नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो ने क्यूआर बारकोड एप के माध्यम से परिजनों के द्वारा जो आधार कार्ड दिया गया था.
उसकी जांच की जिसमें प्रभात हांसदा का आधार कार्ड फर्जी निकला. प्रभात के आधार कार्ड में जन्म तिथि एक मई 2004 है जबकि नवमी क्लास के सर्टिफिकेट में 15 अक्टूबर 2005 लिखा हुआ है.
नगर थाना प्रभारी आदिकांत महतो ने बताया कि जब मृत मानिकचंद मुर्मू के भाई रामलखन मुर्मू से पूछा गया कि वह घर से किसके साथ आदिवासी आर्केष्ट्रा देखने निकला था तो उसका भी स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है. उसका मोबार्इल नंबर मांगा गया तो वो भी मृतक के भाई के द्वारा नहीं बताया गया. मानिकचंद किसके बाइक से वहां पहुंचा था. इस बारे में भी कुछ नहीं बताया.
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