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कैल्शियम का मिले पूरा डोज

एनिमिया के बाद कैल्शियम की कमी भारतीय स्त्रियों की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या है. हमारी हड्डियां, दांत और नाखून 99 प्रतिशत कैल्शियम से ही बने होते हैं. शेष एक प्रतिशत कैल्शियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है. यह रक्त में पाया जाता है और प्रत्येक कोशिका के बीच एक्स्ट्रा सेल्यूलर फ्लूड में […]

एनिमिया के बाद कैल्शियम की कमी भारतीय स्त्रियों की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या है. हमारी हड्डियां, दांत और नाखून 99 प्रतिशत कैल्शियम से ही बने होते हैं. शेष एक प्रतिशत कैल्शियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है. यह रक्त में पाया जाता है और प्रत्येक कोशिका के बीच एक्स्ट्रा सेल्यूलर फ्लूड में भी मौजूद होता है. दिल की धड़कन, हॉर्मोनल सिस्टम, मांसपेशियों के संचालन, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और खून के थक्के जमाने के लिए भी शरीर को कैल्शियम की जरूरत होती है.

कैल्शियम का मिले पूरा डोज

एनिमिया के बाद कैल्शियम की कमी भारतीय स्त्रियों की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या है. हमारी हड्डियां, दांत और नाखून 99 प्रतिशत कैल्शियम से ही बने होते हैं. शेष एक प्रतिशत कैल्शियम भी हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी होता है. यह रक्त में पाया जाता है और प्रत्येक कोशिका के बीच एक्स्ट्रा सेल्यूलर फ्लूड में भी मौजूद होता है. दिल की धड़कन, हॉर्मोनल सिस्टम, मांसपेशियों के संचालन, मस्तिष्क की कार्यप्रणाली और खून के थक्के जमाने के लिए भी शरीर को कैल्शियम की जरूरत होती है.

कमी का प्रभाव

विटामिन डी की कमी से कैल्शियम तथा फॉस्फोरस आंतों में शोषित नहीं हो पाते हैं, जिससे अस्थियों तथा दांतों पर कैल्शियम नहीं जम पाता है. इससे वे कमजोर हो जाते हैं. विटामिन डी की कमी से फेफड़ों की कार्यक्षमता घटती है व फेफड़े सिकुड़ जाते हैं. इसकी कमी से चार रोग होते हैं- रिकेट्स, पेशीय मरोड़, अॅास्टोमेल्शिया या अस्थि विकृति. महिलाओं के मासिक धर्म में गड़बड़ी होती है.

मेनोपॉज के बाद खतरा

स्त्रियों में मेनोपॉज के बाद बोन डेंसिटी को बनाये रखने के लिए जरूरी हॉर्मोन एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आती है. मेनोपॉज के दौरान शारीरिक और मानसिक स्तर पर बदलाव आने के साथ हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर पड़ने लगती हैं. साथ ही नयी हड्डियों के निर्माण की दर भी कम होने लगती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है. यही वजह है कि 35 की उम्र के बाद से महिलाओं को नियमित कैल्शियम और विटामिन डी के सेवन की सलाह दी जाती है.

क्या हैं लक्षण

नाखून कमजोर होना

जरा-सी चोट पर नाखून फट जाते हों त्न भूरे और रुखे हों, बहुत धीमी रफ्तार से बढ़ते हों टूट कर उल्टी दिशा में मुड़ जाते हों त्न हड्डियों में टेढ़ापन त्न शरीर के विभिन्न अंगों में ऐंठन या कंपन त्न जोड़ों का दर्द त्न मांसपेशियों में निष्क्रियता त्न जरा-सा टकराने पर हड्डियों का टूटना.

प्रस्तुति : विनीता झा, दिल्ली

डॉ टी श्रृंगारी

वरिष्ठ ऑथ्रेस्कोपिक सर्जन

पारस हॉस्पिटल, गुड़गांव

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