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19 साल की इस आम लड़की ने बनाई ”रेप प्रूफ पैंटी”

उत्तर प्रदेश के बेहद आम परिवार की एक लड़की ने ऐसी कोशिश है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि दुनिया भर की लड़कियां बलात्कार से बच सकती हैं. सीनू ने एक ऐसी पैंटी तैयार की है जिसमें एक क़िस्म का लॉक लगा होगा, जो महिलाओं को बलात्कार से बचा सकता है. सीनू इसे ‘रेप प्रूफ पैंटी’ […]

उत्तर प्रदेश के बेहद आम परिवार की एक लड़की ने ऐसी कोशिश है, जिससे उन्हें उम्मीद है कि दुनिया भर की लड़कियां बलात्कार से बच सकती हैं.

सीनू ने एक ऐसी पैंटी तैयार की है जिसमें एक क़िस्म का लॉक लगा होगा, जो महिलाओं को बलात्कार से बचा सकता है. सीनू इसे ‘रेप प्रूफ पैंटी’ कहती हैं.

यह पैंटी बनाने के लिए ‘ब्लेड प्रूफ’ कपड़े का इस्तेमाल किया गया है. इसमें एक स्मार्ट लॉक, एक जीपीआरएस और एक रिकॉर्डर भी लगाया गया है.

19 साल की सीनू कुमारी उत्तर प्रदेश के फर्रुख़ाबाद ज़िले के एक निम्न-मध्यमवर्गीय परिवार से हैं. उनके पिता किसान हैं.

सीनू का कहना है कि इसके लिए उन्हें केंद्रीय बाल एवं विकास मंत्री मेनका गांधी से प्रशंसा मिली है. अब वह इसे पेटेंट कराने की कोशिश कर रही हैं.

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क्या हैं ख़ूबियां?

बीबीसी से बातचीत में सीनू ने कहा कि इस पैंटी को आसानी से न ही काटा जा सकता है और न जलाया जा सकता है. साथ ही, इसमें एक स्मार्ट लॉक लगा होगा, जो केवल पासवर्ड से ही खुलेगा.

सीनू बताती हैं कि इसमें एक बटन लगा है जिसे दबाने से तुरंत इमरजेंसी या 100 नंबर डायल हो जाएगा, इसमें लगे जीपीआरएस की मदद से पुलिस को आपकी लोकेशन मिल जाएगी और रिकॉर्डिंग सिस्टम से आस-पास जो भी घट रहा है, उसकी आवाज रिकॉर्ड भी हो जाएगी.

क्या पुलिस के अलावा कोई चाहे तो परिवार में किसी का नंबर सेट कर सकता है?

इस पर वह कहती हैं, ‘यह सेंटिग पर निर्भर करता है कि इमरजेंसी के हालात में पहला कॉल किसे जाएगा, क्योंकि 100 और 1090 नंबर हमेशा सुरक्षा के लिए मौजूद होते हैं और पुलिस स्टेशन भी सब जगह मौजूद हैं इसलिए ये नंबर सेट किए गए हैं.’

सीनू का कहना है कि इसे बनाने में लगभग चार हज़ार रुपये का खर्च आया. इसमें उन्हें परिवार का पूरा साथ मिला.

थोड़ी मदद हो तो बेहतर

सीनू का कहना है कि ख़ुद रिसर्च करके उन्होंने यह पैंटी तैयार की है. इसके अलावा वह कुछ और प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही हैं.

सीनू का कहना है कि उन्होंने इसमें सस्ते मैटेरियल का इस्तेमाल किया है. अगर इसमें कपड़ा और लॉक बेहतर गुणवत्ता का लगाया जाए तो यह और बेहतर काम करेगा, लेकिन तब ख़र्च थोड़ा बढ़ सकता है.

सीनू की इच्छा है कि कोई कंपनी या सरकार उनकी ढंग से मदद करे तो वह इसे और बेहतर बना सकती हैं. वह कहती हैं, "फिलहाल यह एक मॉडल है और मेरी पहली शुरुआत है."

सीनू बताती हैं कि वह अपने पैतृक घर से दूर अपने छोटे भाई-बहन के साथ रहती है.

उन्होंने कहा, "रोज टीवी पर महिलाओं से छेड़छाड़ और बलात्कार की ख़बरें मुझे झकझोर देती हैं. बाहर जाने में हर समय एक डर लगा रहता है."

सांसद का सहयोग

सीनू के मुताबिक, फर्रूख़ाबाद से भाजपा सांसद मुकेश राजपूत ने केंद्रीय मंत्रालय को आधिकारिक तौर पर इस संबंध में एक चिट्ठी लिखी.

उनका कहना है कि मेनका गांधी ने इस कोशिश के लिए उनकी सराहना की है. इस पैंटी पर पेटेंट के लिए सीनू ने अपना आवेदन एनआईएफ़ (नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन) इलाहाबाद भेज दिया है.

वह कहती हैं कि बाज़ार में आने से पहले इसमें सुधार की जरूरत है और इसे महिलाओं को हमेशा पहनने की ज़रूरत नहीं है.

उनके मुताबिक, ‘इसे तभी पहना जाए जब आप अकेले कहीं जा रही हों. जैसे बुलेट प्रूफ जैकेट हमेशा नहीं पहनते, वैसे ही इसे भी हमेशा पहनने की जरूरत नहीं.’

क्या कहते हैं आंकड़े?

देश में बलात्कार के ताज़ा आंकड़ों पर नजर डालें तो राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक, हर रोज़ 79 महिलाओं का बलात्कार होता है.

मध्य प्रदेश में हालात सबसे ख़राब हैं. 2016 के आंकड़ों के अनुसार, देश में 28,947 महिलाओं के साथ रेप की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें सबसे ज़्यादा 4882 मामले मध्य प्रदेश में सामने आए.

उत्तर प्रदेश में 4816 और महाराष्ट्र में 4189 बलात्कार की घटनाएं हुईं.

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