IIT के हॉस्टल में दोस्तों के साथ टेक्नोलॉजी से करते थे एक्सपेरिमेंट, बने Twitter के CEO, अब AI पर दांव लगा रहे पराग अग्रवाल

Updated:
विज्ञापन

पराग अग्रवाल (फोटो: एआई/चैटजीपीटी)

प्रभात खबर की इस खास सीरीज ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ में आज हम जानेंगे पराग अग्रवाल के बारे में. ये वही भारतीय टेक्नोलॉजिस्ट हैं, जिन्होंने IIT Bombay और Stanford से पढ़ाई के बाद Twitter में इंजीनियर के तौर पर शुरुआत की और कंपनी के CEO तक पहुंचे. अब वह Parallel के जरिए AI की दुनिया में नई पारी खेल रहे हैं.

विज्ञापन

आज जब AI की दुनिया तेजी से बदल रही है, उसी दौड़ में एक भारतीय टेक्नोलॉजिस्ट फिर से अपना नाम बना रहा है. यह नाम है पराग अग्रवाल. कभी Twitter जैसे दुनिया के बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कमान संभाल चुके पराग अब AI एजेंट्स के लिए इंटरनेट का नया इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुटे हैं.

विज्ञापन

लेकिन उनकी कहानी सिर्फ Twitter CEO बनने तक सीमित नहीं है. इसकी शुरुआत राजस्थान के अजमेर से होती है, जहां पराग का जन्म हुआ. इसके बाद मुंबई में पढ़ाई, IIT Bombay में Computer Science, Stanford में PhD और फिर X (पहले Twitter) में इंजीनियर से CEO तक का सफर.

‘टेक टाइकून्स’ सीरीज की इस कड़ी में आइए जानते हैं पराग अग्रवाल के उस सफर की कहानी, जिसमें कम बोलने वाले एक इंजीनियर ने धीरे-धीरे दुनिया की सबसे चर्चित टेक कंपनियों में से एक की कमान संभाली और फिर CEO की कुर्सी छोड़कर दोबारा शून्य से शुरुआत की.

अजमेर में हुआ जन्म, मुंबई में हुई पढ़ाई

पराग अग्रवाल का जन्म 21 मई 1984 को राजस्थान के अजमेर में हुआ था. उनके पिता Department of Atomic Energy से जुड़े थे, जबकि उनकी मां अर्थशास्त्र की शिक्षिका रही हैं. परिवार बाद में मुंबई चला गया, जहां पराग की पढ़ाई हुई. उनकी शुरुआती पढ़ाई Atomic Energy Central School No. 4, मुंबई से हुई. इसके बाद उन्होंने Atomic Energy Junior College से 11वीं और 12वीं की पढ़ाई की. उनके कॉलेज के प्रिंसिपल के मुताबिक, पराग शुरू से ही IIT में जाने का लक्ष्य रखते थे और पढ़ाई के साथ Electronics से जुड़े vocational education में भी दिलचस्पी लेते थे.

IIT Bombay में सिर्फ पढ़ाई नहीं, टेक के साथ एक्सपेरिमेंट भी

IIT Bombay पहुंचने के बाद पराग ने Computer Science को अपना करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ाया. लेकिन उनके कॉलेज के दिनों की एक दिलचस्प बात खुद IIT Bombay के एलुमनाई प्रोफाइल में दर्ज है. पराग ने अपनी स्पेशल मेमोरीज में बताया कि उन्होंने दोस्तों के साथ हॉस्टल के इंट्रानेट पर शेयर्ड स्टोरेज और स्ट्रीमिंग सर्विसेज बनाने पर काम किया था. यानी उस समय भी वह टेक्नोलॉजी को सिर्फ पढ़ नहीं रहे थे, बल्कि उसके साथ एक्सपेरिमेंट कर रहे थे.

IIT Bombay के एलुमनाई प्रोफाइल पर उनका सक्सेस मंत्र भी दर्ज है:

“The whole can be much greater than the sum of parts.”

यह सोच उनके आगे के करियर में भी दिखाई देती है, जहां उन्होंने अकेले चमकने के बजाय बड़ी टेक्निकल टीमें और प्रोडक्ट्स के साथ काम किया. यहीं से उनके सफर की पहली खास बात सामने आती है, वह सिर्फ अच्छे नंबर लाने वाले छात्र नहीं थे. उनके शिक्षकों के मुताबिक, स्कूल-कॉलेज के प्रोजेक्ट्स में वह इनोवेशन दिखाते थे और समस्याओं के सीधे और सटीक जवाब देने के लिए जाने जाते थे.

Image

Twitter से पहले Microsoft, Yahoo और AT&T में किया रिसर्च

Twitter पर पहुंचने से पहले पराग ने Microsoft Research, Yahoo! और AT&T Labs के साथ काम किया. उनका शुरुआती करियर मुख्य रूप से रिसर्च और बड़े पैमाने के डेटा से जुड़ी समस्याओं के इर्द-गिर्द रहा. इसके बाद अक्टूबर 2011 में उन्होंने Twitter जॉइन किया. उस समय कंपनी आज के मुकाबले काफी छोटी थी. CEO बनने के बाद अपने कर्मचारियों को लिखे संदेश में पराग ने खुद याद किया था कि जब उन्होंने Twitter जॉइन किया, तब कंपनी में 1,000 से भी कम कर्मचारी थे. उन्होंने यह भी लिखा कि उन्होंने कंपनी के उतार-चढ़ाव, मुश्किलों, जीत और गलतियों को करीब से देखा था.

Engineer से CTO और फिर CEO तक पहुंचने का सफर

Twitter में पराग ने अलग-अलग टीमों के साथ काम किया और कंपनी के कई जरूरी कामों को संभाला. उन्होंने Twitter के ड्स सिस्टम को बेहतर बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. साथ ही, लोगों को उनकी पसंद के हिसाब से पोस्ट दिखाने वाले Home Timeline को भी बेहतर किया. इससे Twitter पर यूजर्स की संख्या बढ़ाने में मदद मिली.

2017 में पराग को Twitter का चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) बनाया गया. उन्होंने कंपनी में मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कामों को भी आगे बढ़ाया. इसके बाद नवंबर 2021 में Twitter के तत्कालीन CEO जैक डोर्सी ने अपने पद से हटने का फैसला किया. इसके बाद कंपनी के बोर्ड ने पराग अग्रवाल को नया CEO चुना. इस तरह करीब 10 साल पहले Twitter में एक इंजीनियर के तौर पर काम शुरू करने वाले पराग उसी कंपनी के सबसे बड़े पद तक पहुंच गए.

Jack Dorsey ने क्यों चुना था पराग को?

पराग के CEO बनने के बाद Jack Dorsey ने उनकी तकनीकी समझ और कंपनी के भीतर उनके लंबे अनुभव को इसकी बड़ी वजह बताया था. Dorsey के मुताबिक, पराग ने Twitter में पिछले 10 सालों में कई महत्वपूर्ण फैसलों में भूमिका निभाई थी और कंपनी को भीतर से बहुत अच्छी तरह समझते थे.

पराग ने CEO बनने के बाद खुद भी Dorsey के प्रति आभार जताया था. उन्होंने लिखा था कि वह उनके मेंटरशिप और फ्रेंडशिप के लिए आभारी हैं.

Twitter के बाद फिर से शून्य से शुरुआत

Elon Musk के Twitter खरीद लेने के बाद पराग कंपनी से बाहर हो गए. लेकिन इसके बाद उन्होंने किसी दूसरी बड़ी कंपनी में नौकरी करने के बजाय खुद कुछ बनाने का फैसला किया. 2023 में जब वह First Round के पार्टनर मीटिंग में पहुंचे, तब उनके पास तैयार प्रोडक्ट या कोड नहीं था. First Round के मुताबिक, उनके पास सिर्फ 10 स्लाइड का एक डेक था, जिसमें AI के लिए एक नए तरह के वेब का विचार रखा गया था. इसी विचार के आधार पर Parallel को समर्थन मिला.

Parallel में क्या बना रहे हैं पराग?

आज पराग अग्रवाल पैरेलल के फाउंडर और सीईओ हैं. कंपनी AI एजेंट्स के लिए वेब सर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर रही है. आसान भाषा में समझें तो पराग का मानना है कि जिस तरह इंसान इंटरनेट पर सर्च, ब्राउज और इन्फॉर्मेशन कलेक्ट करते हैं, उसी तरह एआई एजेंट्स भी बड़े पैमाने पर वेब का इस्तेमाल करेंगे.

एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि Parallel ने इस सोच के साथ शुरुआत की कि आने वाले समय में AI एजेंट्स इंसानों की तुलना में 1,000 गुना या उससे भी ज्यादा वेब का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसलिए इंटरनेट के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को एआई के हिसाब से तैयार करना जरूरी होगा.

Image

आज फिर AI के मोर्चे पर खड़े हैं पराग

2026 में पराग अग्रवाल की कंपनी Parallel तेजी से आगे बढ़ रही है. कंपनी ने Google Cloud के साथ साझेदारी की है. इसके जरिए Parallel की AI से जुड़ी वेब सर्च तकनीक को Google के Gemini एंटरप्राइज एजेंट प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा गया है. एक समय पराग Twitter जैसी बड़ी कंपनी की तकनीक से जुड़े जरूरी फैसले लेते थे. आज वही पराग AI के लिए इंटरनेट को और बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं. उनकी कोशिश है कि भविष्य में AI एजेंट्स इंटरनेट पर जानकारी को इंसानों की तरह आसानी से खोज और इस्तेमाल कर सकें.

पराग की कहानी हमें यह भी सिखाती है कि सफलता सिर्फ बड़ी कंपनी का सीईओ बनने तक सीमित नहीं है. कई बार बड़ा मुकाम हासिल करने के बाद फिर से शुरुआत करना और आने वाले समय की नई तकनीक को पहचानना भी सफलता का हिस्सा होता है.

नोट: यह लेख प्रभात खबर की ‘टेक टायकून्स’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 8 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ.

ये भी पढ़ें: कभी पड़ोसियों के साथ शेयर करते थे एक फोन, आज Google के CEO हैं सुंदर पिचाई, जानिए कैसे पहुंचे चेन्नई से सिलिकॉन वैली तक

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola