GPS बंद होने के बाद भी Google को कैसे पता चलता है आपकी लोकेशन? जानें किन-किन तरीकों से करता है ट्रैक
Google Location Tracking
अगर आपको भी लगता GPS बंद करने से आपकी लोकेशन पूरी तरह छुप जाती है तो ऐसा नहीं है. GPS बंद होने के बाद भी Google आपकी जगह का अंदाजा लगा सकता है. आइए आपको बताते हैं किन तरीकों से गूगल आपके लोकेशन को ट्रैक करता है और इससे आप कैसे बच सकते हैं.
Google: आज हम ईमेल, मैप्स, क्लाउड स्टोरेज, स्मार्ट होम डिवाइस, वेब सर्च और यहं तक कि अब एआई टूल्स, लगभग हर चीज के लिए गूगल पर ही डिपेंड रहते हैं. क्योंकि गूगल कई तरह के गैजेट्स जैसे फोन, टीवी, स्पीकर और लैपटॉप में पहले से जुड़ा होता है. ये डिवाइस हमेशा इंटरनेट से कनेक्ट रहते हैं और अपनी थोड़ी-बहुत जानकारी शेयर करते रहते हैं. इन्हीं जानकारियों में से एक होती है आपकी लोकेशन. अगर आप अपनी प्राइवेसी के लिए फोन का GPS बंद भी कर दें, तब भी गूगल किसी न किसी तरीके से आपका लोकेशन अनुमान लगा लेता है. आइए आपको बताते हैं आखिर ये कैसे होता है.
GPS बंद करने से कई ऐप्स ठीक से नहीं चलते, लेकिन आपको बता दें कि इससे आपकी लोकेशन पूरी तरह छिपती भी नहीं है. आपका फोन आसपास मौजूद अलग-अलग नेटवर्क्स से जुड़ता रहता है और हर बार Google को आपकी लोकेशन का थोड़ा-बहुत अंदाजा मिल ही जाता है.
किन-किन तरीकों से Google को पता चलती है आपकी लोकेशन?
WiFi और Bluetooth
Google को सबसे बड़ा सुराग वाई-फाई और ब्लूटूथ से मिलता है. भले ही आप इनका यूज ना भी कर रहे हों, आपका फोन आसपास मौजूद वाई-फाई राउटर और ब्लूटूथ बीकन को पहचान लेता है. गूगल के पास इन सबका एक बड़ा डेटाबेस होता है, जिससे वो यह अंदाज लगा लेता है कि आप किस जगह के आसपास हैं.
मोबाइल टावर
एक और तरीका मोबाइल टावर का होता है. आपका फोन नेटवर्क चालू रखने के लिए लगातार नजदीकी टावरों को सिग्नल भेजता रहता है. इन सिग्नलों के आने-जाने में लगने वाले समय को मापकर गूगल अंदाजा लगा लेता है कि आप हर टावर से कितनी दूरी पर हैं, और इस तरह आपके लोकेशन को काफी हद तक सही-सही पकड़ लेता है.
IP एड्रेस
आपका IP एड्रेस भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है. इंटरनेट से जुड़ी हर डिवाइस को एक IP एड्रेस मिलता है. यह आमतौर पर आपके शहर या आसपास के इलाके की जानकारी देता है. यह हमेशा बिल्कुल सटीक नहीं होता, लेकिन जब इसे बाकी संकेतों के साथ मिलाया जाता है तो लोकेशन का अंदाजा ज्यादा सही मिल जाता है.
Google को लोकेशन ट्रैक करने से कैसे रोकें?
सबसे पहले अपने Google अकाउंट में जाकर Location History बंद कर दें. इससे Google आपके घूमने-फिरने की लोकेशन को समय के साथ सेव नहीं कर पाएगा. एंड्रॉयड फोन पर आप Google Location Accuracy भी बंद कर सकते हैं. इससे Google वाई-फाई, ब्लूटूथ और फोन के सेंसर की मदद से आपकी सही लोकेशन पता नहीं लगा पाएगा, खासकर जब GPS ऑफ हो.
इसके अलावा, अपने फोन में मौजूद ऐप्स की लोकेशन परमिशन जरूर चेक करें. मौसम, सोशल मीडिया या फिटनेस वाले कई ऐप्स बिना ध्यान दिए आपकी लोकेशन इस्तेमाल कर रहे होते हैं. इनकी परमिशन को ‘Only while using the app’ पर सेट कर दें या जरूरत न हो तो पूरी तरह बंद कर दें.

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By अंकित आनंद
शॉर्ट बायो
अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.
काम के बारे में
अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.
उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई और करियर
बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.
विजन
अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.
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