संडे के दिन 4 घंटे काम करने पर छलका Google की इंजीनियर का दर्द, वर्क-लाइफ बैलेंस पर फिर से छिड़ी बहस

Published by : Ankit Anand Updated At : 29 Apr 2025 1:40 PM

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Google Engineer Anu Sharma

Google Engineer Viral Post: गूगल की इंजीनीय अनु शर्मा, जो अक्सर अपने काम से जुड़ी अपडेट्स साझा करती हैं का कहना है कि किसी बड़ी टेक कंपनी में ऑन-कॉल ड्यूटी निभाना स्टार्टअप में काम करने से कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है

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Google Engineer Viral Post: वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. प्रोफेशनल और पर्सनल जीवन के बीच संतुलन बनाने, बिना अतिरिक्त वेतन के ओवरटाइम की अपेक्षा और इस पर सीईओज की राय को लेकर अब तक काफी कुछ कहा और लिखा जा चुका है. अब इस बहस को एक बार फिर सोशल मीडिया पर हवा दी है गूगल की एक इंजीनियर ने, जिन्होंने रविवार को चार घंटे काम करने के बाद वर्क-लाइफ बैलेंस पर अपनी बेबाक राय रखी.

Google में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम करने वाली अनु शर्मा ने एक पोस्ट के जरिए खुलासा किया कि उन्हें रविवार के दिन चार घंटे तक एक प्रोडक्शन समस्या के चलते काम करना पड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि आम धारणा के विपरीत, किसी बड़े कंपनी में ‘ऑन कॉल’ रहना स्टार्टअप की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल होता है. अपनी पोस्ट के अंत में शर्मा ने वर्क-लाइफ बैलेंस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कंपनियां अपने कर्मचारियों को वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए नहीं, बल्कि काम के लिए पैसे देती है.

Google की इंजीनियर का पोस्ट

रविवार, 27 अप्रैल को एक्स (पूर्व ट्विटर) पर शर्मा ने लिखा, “रविवार को प्रोडक्शन संबंधी समस्या में चार घंटे बिताए. FAANG कंपनियों में ऑन-कॉल ड्यूटी स्टार्टअप्स की तुलना में कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण होती है और इसका प्रभाव भी बड़ा होता है. यकीन मानिए, आपको वर्क-लाइफ बैलेंस के लिए पैसे नहीं दिया  जाता.”

https://twitter.com/O_Anu_O/status/1916430356737036379

कॉर्पोरेट की भाषा में “ऑन कॉल” होने का मतलब है कि एम्प्लॉय को नियमित कार्य समय के बाहर भी किसी आपात स्थिति या तकनीकी गड़बड़ी का समाधान करने के लिए तैयार रहना होता है. FAANG शब्द अमेरिका की पांच प्रमुख टेक कंपनियों  फेसबुक (अब मेटा), अमेजन, एप्पल, नेटफ्लिक्स और गूगल के लिए इस्तेमाल किया जाता है.

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इंटरनेट पर छिड़ी बहस 

अनु शर्मा की यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई, जिससे सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई. जहां कुछ यूजर्स ने उन पर स्टार्टअप्स को नीचा दिखाने का आरोप लगाया, वहीं दूसरों ने कहा कि उनकी बातों ने टेक कर्मचारियों से की जाने वाली अवास्तविक उम्मीदों की एक बड़ी समस्या को उजागर किया है.

एक यूजर ने लिखा, “Google में काम करते हुए आपको 40 लाख+ का पैकेज मिलता है. ऑन-कॉल ड्यूटी पर रोने की क्या बात है? आप एसी में काम करते हो, धूप में नहीं. मजदूर और डिलीवरी करने वाले लोग भी हैं. अगर कंपनी इतना पैसा दे रही है, तो थोड़ा काम तो कराएगी ही, सिर्फ ‘डे इन द लाइफ’ व्लॉग बनाकर खाना खाने के लिए नहीं है ये नौकरी.”

एक यूजर ने टिप्पणी करते हुए लिखा, “इतना मुश्किल… मैंने एक बार ऑन-कॉल इन्सिडेंट संभाला… अब मुझे देखो, मैं उन स्टार्टअप वालों से कहीं बेहतर हूं. मुझे उम्मीद है कि मैं गलत हूं, लेकिन ऐसा ही लग रहा है.”

वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “आईटी में वर्क-लाइफ बैलेंस का मतलब सिर्फ 9 घंटे की नौकरी नहीं है. आपको थोड़ा व्यापक नजरिया अपनाना होगा, तभी महसूस होगा कि यहां वाकई संतुलन है लेकिन इसकी तुलना सरकारी नौकरियों से न करें.”

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अंकित आनंद, डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में एक उभरते हुए कंटेंट राइटर हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. उन्हें पत्रकारिता में 2 साल से अधिक का अनुभव है और इस दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई है. अंकित मुख्य रूप से स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी खबरें, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे विषयों पर काम करते हैं. इसके साथ ही वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी जरूरी और ट्रेंडिंग खबरों को भी कवर करते हैं. वह कार और बाइक से जुड़ी हर खबर को सिर्फ एक एंगल से नहीं, बल्कि टेक्निकल, यूजर एक्सपीरियंस और मार्केट ट्रेंड्स जैसे हर पहलू से समझकर पेश करते हैं. उनकी लेखन शैली सरल, स्पष्ट और यूजर्स-फर्स्ट अप्रोच पर बेस्ड है, जिसमें Gen Z की पसंद और उनकी डिजिटल समझ को भी ध्यान में रखा जाता है. बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई स्कूल से हुई है. इसके बाद 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. अपनी पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया. शिक्षा पूरी करने के बाद अंकित ने Zee News में करीब 1 साल तक काम किया, जहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क वर्क, कंटेंट रिसर्च और न्यूज राइटिंग की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उन्हें तेजी से बदलते न्यूज रूम माहौल में काम करने की क्षमता और खबरों को सरल तरीके से प्रस्तुत करने की कला सिखाई. अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें सिर्फ जानकारी नहीं देतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और फैसलों को भी असर डालती हैं. इसी सोच के साथ वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, रिसर्च-बेस्ड और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करते हैं, ताकि पाठकों को सही और उपयोगी जानकारी आसानी से मिल सके.

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